Chaiti Chhath 2026: कब है नहाय-खाय और खरना? जानें अर्घ्य का शुभ मुहूर्त

आस्था और शुद्धता का महापर्व 'चैती छठ' साल 2026 में 22 मार्च को 'नहाय-खाय' के साथ शुरू हो रहा है। चार दिनों तक चलने वाले इस कठिन अनुष्ठान में 23 मार्च को खरना, 24 मार्च को अस्ताचलगामी (डूबते) सूर्य को संध्या अर्घ्य और 25 मार्च को उदीयमान (उगते) सूर्य को उषा अर्घ्य दिया जाएगा।

Chaiti Chhath 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 12, 2026

Chaiti Chhath 2026: छठ महापर्व हिंदू धर्म के प्रमुख और पवित्र पर्वों में से एक माना जाता है। यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित होता है। छठ साल में दो बार मनाया जाता है—एक बार कार्तिक महीने में और दूसरी बार चैत्र महीने में। चैत्र मास में मनाए जाने वाले इस पर्व को चैती छठ कहा जाता है। यह पर्व विशेष रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

छठ पर्व प्रकृति और सूर्य उपासना का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु कठिन व्रत रखकर सूर्य देव और छठी मैया की आराधना करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है और भक्तों को आरोग्यता तथा समृद्ध जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है। चैती छठ का यह महापर्व चार दिनों तक चलता है, जिसमें हर दिन का अपना अलग महत्व और पूजा-विधि होती है।

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चैती छठ की तिथि और पूरा कार्यक्रम

Chaiti Chhath 2026
कब है नहाय-खाय और खरना?

हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में चैती छठ की शुरुआत 22 मार्च से होगी और यह पर्व 25 मार्च तक चलेगा। इन चार दिनों में क्रमशः नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य की परंपराएं निभाई जाती हैं।

पहला दिन – नहाय-खाय (22 मार्च 2026)

छठ महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इस दिन व्रती सुबह पवित्र नदी, तालाब या गंगा में स्नान करते हैं। स्नान के बाद घर आकर शुद्ध और सात्विक भोजन बनाया जाता है। परंपरा के अनुसार इस दिन कद्दू-भात यानी चने की दाल, कद्दू की सब्जी और चावल का प्रसाद बनाया जाता है। व्रती इस भोजन को ग्रहण करके स्वयं को शारीरिक और मानसिक रूप से छठ व्रत के लिए तैयार करते हैं।

दूसरा दिन – खरना (23 मार्च 2026)

छठ महापर्व का दूसरा दिन खरना कहलाता है। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं। शाम के समय सूर्यास्त के बाद छठी मैया को गुड़ की खीर, रोटी और केले का भोग लगाया जाता है। पूजा के बाद व्रती इस प्रसाद को ग्रहण करते हैं और इसके बाद 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू हो जाता है। खरना का प्रसाद परिवार और आस-पड़ोस में भी बांटा जाता है।

तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य (24 मार्च 2026)

महापर्व का तीसरा दिन संध्या अर्घ्य के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन व्रती शाम के समय नदी, तालाब या घाट पर जाकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इस दौरान व्रती फल, ठेकुआ, नारियल और अन्य प्रसाद से भरी टोकरी लेकर पूजा करते हैं। घाटों पर दीपक जलाए जाते हैं और पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा से भर जाता है।

चौथा दिन – उषा अर्घ्य (25 मार्च 2026)

छठ महापर्व का चौथा और अंतिम दिन उषा अर्घ्य का होता है। इस दिन सुबह सूर्योदय के समय उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। पूजा पूरी होने के बाद व्रती अपना व्रत खोलते हैं और परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसी के साथ चार दिनों तक चलने वाले इस पवित्र छठ महापर्व का समापन हो जाता है।

छठ पर्व का धार्मिक महत्व

छठ महापर्व को सूर्य उपासना का सबसे कठिन और पवित्र व्रत माना जाता है। श्रद्धालु इस व्रत को पूरी आस्था और नियमों के साथ करते हैं। मान्यता है कि छठी मैया और सूर्य देव की पूजा से जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।