CG Politics: रायपुर से सांसद बृजमोहन अग्रवाल और स्वास्थ्य विभाग के सचिव आईएएस अमित कटारिया के बीच कथित बातचीत को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रूप लेता दिखाई दे रहा है। मामले ने प्रशासन और राजनीति दोनों में हलचल पैदा कर दी है। जानकारी के अनुसार, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने स्वास्थ्य सचिव के कथित आपत्तिजनक व्यवहार की शिकायत लोकसभा अध्यक्ष से की है। इस शिकायत के बाद लोकसभा सचिवालय भी पूरे मामले की जानकारी जुटा रहा है। विवाद के सामने आने के बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
भूपेश बघेल ने राज्य सरकार पर साधा निशाना
इस पूरे घटनाक्रम पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर राज्य सरकार का नहीं, बल्कि दिल्ली और नागपुर का प्रभाव दिखाई देता है। बघेल ने कहा कि यदि किसी निर्वाचित सांसद के साथ इस तरह का व्यवहार किया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और संसदीय गरिमा के लिए उचित संकेत नहीं है। उन्होंने सरकार से प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग भी की।
जनप्रतिनिधि के सम्मान का मुद्दा उठाया
भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि राजनीतिक या वैचारिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि का सम्मान लोकतंत्र की मूल भावना का हिस्सा है। उन्होंने लिखा कि बृजमोहन अग्रवाल देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था लोकसभा के सदस्य हैं और रायपुर की जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में किसी प्रशासनिक अधिकारी द्वारा उनके साथ कथित रूप से असम्मानजनक व्यवहार करना केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन सभी मतदाताओं का भी अपमान है जिन्होंने उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुना है।
दिल्ली और नागपुर से संचालन का लगाया आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर स्थानीय सरकार की बजाय दिल्ली और नागपुर का प्रभाव अधिक दिखाई देता है। उनके अनुसार, यदि अधिकारी जनप्रतिनिधियों की बातों और जनता से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से नहीं लेते, तो इससे यह संदेश जाता है कि वे केवल उच्च स्तर के राजनीतिक नेतृत्व को संतुष्ट रखने में अधिक रुचि रखते हैं। बघेल ने आरोप लगाया कि ऐसी स्थिति में आम जनता के मुद्दों और निर्वाचित प्रतिनिधियों की मांगों की अनदेखी होती है।
बृजमोहन अग्रवाल के अनुभव का भी किया उल्लेख
भूपेश बघेल ने अपने बयान में बृजमोहन अग्रवाल के लंबे राजनीतिक अनुभव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अग्रवाल संगठन और शासन दोनों में लंबे समय तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। इसलिए उन्हें प्रशासनिक प्रक्रियाओं और अधिकारियों के साथ काम करने का पर्याप्त अनुभव है। बघेल ने उम्मीद जताई कि वह अपने मतदाताओं के हितों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाएंगे और इस मामले को लोकतांत्रिक मर्यादा के अनुरूप आगे बढ़ाएंगे।
क्या है पूरा विवाद?
जानकारी के अनुसार, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने जनहित से जुड़े कई मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग से लगातार पत्राचार किया था। उनका आरोप है कि इन पत्रों का समय पर कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया और स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया से फोन पर बातचीत की। सांसद का दावा है कि बातचीत के दौरान सचिव का व्यवहार सम्मानजनक नहीं था और प्रशासनिक शिष्टाचार के अनुरूप नहीं था। इसी आधार पर उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को संसदीय मर्यादा और संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध बताते हुए शिकायत दर्ज कराई।
लोकसभा अध्यक्ष से विशेषाधिकार समिति में भेजने की मांग
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने इस मामले को गंभीर बताते हुए लोकसभा अध्यक्ष को लिखित शिकायत भेजी है। उन्होंने अनुरोध किया है कि मामले की जांच कर इसे विशेषाधिकार समिति को भेजा जाए ताकि यह तय किया जा सके कि क्या किसी सांसद के साथ प्रशासनिक अधिकारी का कथित व्यवहार संसदीय विशेषाधिकारों का उल्लंघन करता है। फिलहाल लोकसभा सचिवालय मामले से संबंधित जानकारी एकत्र कर रहा है। वहीं, इस विवाद के राजनीतिक रूप लेने के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है और सभी की नजर अब आगे होने वाली प्रशासनिक एवं संसदीय कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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