Central Secretariat Library : 135 साल पुरानी लाइब्रेरी पर संकट, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लिया स्वतः संज्ञान

दिल्ली की 135 साल पुरानी सेंट्रल सेक्रेटेरियट लाइब्रेरी के प्रस्तावित स्थानांतरण पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। शास्त्री भवन में स्थित इस लाइब्रेरी में 8.5 लाख से अधिक किताबें, दुर्लभ ग्रंथ और सरकारी दस्तावेज हैं। जस्टिस संजय कुमार और संजीव सचदेवा की पीठ 5 अक्टूबर को सुनवाई करेगी।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 4, 2026

Central Secretariat Library : दिल्ली की ऐतिहासिक और 135 साल पुरानी सेंट्रल सेक्रेटेरियट लाइब्रेरी यानी सीएसएल को अन्यत्र शिफ्ट किए जाने को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने गंभीर रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस महत्वपूर्ण मामले का स्वतः संज्ञान लिया है, क्योंकि यह संस्थान अपने भीतर करीब साढ़े आठ लाख से अधिक दुर्लभ पुस्तकों और ऐतिहासिक दस्तावेजों का एक विशाल भंडार समेटे हुए है। नए सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के विकास के बीच इस प्राचीन लाइब्रेरी के भविष्य को लेकर लगातार चिंताएं जताई जा रही थीं।

सोमवार को होगी सुनवाई

इस पूरे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की एक विशेष पीठ इस पर सुनवाई करने जा रही है। अदालत में जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की खंडपीठ सोमवार को इस विषय पर सुनवाई करेगी। न्यायालय का यह स्वतः संज्ञान ऐसे समय में सामने आया है जब सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत सरकारी कार्यालयों के पुनर्गठन का काम तेजी से चल रहा है और लाइब्रेरी के लिए एक नए व उपयुक्त स्थान की तलाश की जा रही है।
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सेंट्रल सेक्रेटेरियट लाइब्रेरी का गौरवशाली इतिहास

आपको बता दें कि सेंट्रल सेक्रेटेरियट लाइब्रेरी दिल्ली के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित सरकारी पुस्तकालयों में शुमार की जाती है। लगभग 135 वर्षों के अपने गौरवशाली सफर में इस संस्थान ने 8.5 लाख से भी ज्यादा पुस्तकों का अमूल्य संग्रह तैयार किया है। इस विशाल भंडार में विभिन्न अकादमिक विषयों की पुस्तकों के साथ-साथ शासन, प्रशासन, लोक नीति और शोध कार्यों से जुड़ी हुई अत्यंत महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।

शिफ्ट करना एक चुनौती

इस तरह के विशाल और ऐतिहासिक संग्रह को एक स्थान से उठाकर दूसरे स्थान पर ले जाना महज फर्नीचर या किताबों को इधर-उधर करने भर की साधारण प्रक्रिया नहीं है। लाइब्रेरी के इस व्यापक संग्रह को पूरी तरह सुरक्षित रखने, उसके करीने से रखरखाव करने तथा भविष्य में भी पाठकों, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए सुगम सुविधाएं सुनिश्चित करने हेतु अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे से लैस उपयुक्त इमारत की आवश्यकता होगी, जो आसान नहीं है।

लाइब्रेरी के लिए जगह पर असमंजस

सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नए सेंट्रल विस्टा मास्टर प्लान में फिलहाल सेंट्रल सेक्रेटेरियट लाइब्रेरी के लिए कोई स्पष्ट और स्थायी स्थान नजर नहीं आ रहा है। इसी असमंजस की स्थिति के बाद अब इस ऐतिहासिक लाइब्रेरी को किसी अन्य उपयुक्त जगह पर स्थानांतरित करने की संभावनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है, जिससे पुस्तकालय के अस्तित्व को बनाए रखा जा सके।

मंत्रालय और CPWD द्वारा नए स्थान की तलाश जारी

सूत्रों के हवाले से यह भी बताया गया है कि केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय तथा केंद्रीय लोक निर्माण विभाग यानी सीपीडब्ल्यूडी मिलकर इस लाइब्रेरी को शिफ्ट करने के लिए एक मुफीद जगह की तलाश में जुटे हैं। हालांकि, इतने बड़े पैमाने के पुस्तक संग्रह को सहेजने के लिए जरूरी तकनीकी और सुरक्षा मानकों के अनुरूप किसी सटीक स्थान का चयन करना अपने आप में एक बहुत बड़ी प्रशासनिक चुनौती बना हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट तय करेगी ऐतिहासिक संग्रह का भविष्य

लाइब्रेरी के इस प्रस्तावित स्थानांतरण और उसके बहुमूल्य ऐतिहासिक संग्रह के भविष्य को लेकर खड़े हुए सवालों के बीच ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल दिया है। अब सोमवार को होने वाली इस अदालती सुनवाई में यह सबसे अहम बिंदु होगा कि सरकार के पास लाइब्रेरी को कहां और कैसे स्थानांतरित करने की योजना है, तथा इसके विशाल संग्रह की पूर्ण सुरक्षा के लिए क्या कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं।

देश के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक रिकॉर्ड का केंद्र

यह बात विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है कि सेंट्रल सेक्रेटेरियट लाइब्रेरी का महत्व केवल इसमें रखी 8.5 लाख से अधिक किताबों तक ही सीमित नहीं है। इतने लंबे समय से इस प्रतिष्ठित संस्थान में जमा होती रही संदर्भ सामग्री देश भर के शोधार्थियों और प्रशासनिक कामकाज से जुड़े लोगों के लिए मार्गदर्शक रही है। इसलिए इसके स्थानांतरण का यह पूरा मुद्दा केवल एक दफ्तर को बदलने जैसा नहीं है।

संरक्षण सबसे बड़ी प्राथमिकता

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान असली और सबसे बड़ी चुनौती यही सुनिश्चित करना है कि रीलोकेशन के दौरान एक भी पुस्तक या दुर्लभ ऐतिहासिक दस्तावेज क्षतिग्रस्त न हो। साथ ही यह भी देखना होगा कि नए परिसर में भी इस लाइब्रेरी की उपयोगिता, पहुंच और ऐतिहासिक गरिमा पूरी तरह बरकरार रहे। अब देश भर के शिक्षाविदों और आम लोगों की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की इस अहम सुनवाई पर टिकी हुई हैं।