वंदे मातरम का राष्ट्रगीत होने पर केंद्र सरकार का आभार

वंदे मातरम का राष्ट्रगीत होने पर केंद्र सरकार का आभार  भोपाल  वंदे मातरम भारत का राष्ट्रीय गीत है जिसका एक ऐतिहासिक महत्व ही नहीं देशभक्त की भावना और मातृभूमि के प्रति सम्मान प्रकट के लिए है यह गीत वकील चंद चटर्जी द्वारा रचित किया गया था यह उसे अवसर का है जब देश गुलामी की जंजीरों में झगड़ा हुआ था तब स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एकता और ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रतिरोध का सबसे बड़ा प्रतीक बना इसका गायन राष्ट्रीय गौरव एवं बलिदानों की याद और देश प्रेम के समर्पण के प्रतीक स्वरूप है भारत की संविधान सभा ने वर्ष

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Published On :

फ़रवरी 12, 2026

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वंदे मातरम का राष्ट्रगीत होने पर केंद्र सरकार का आभार 
भोपाल 

वंदे मातरम भारत का राष्ट्रीय गीत है जिसका एक ऐतिहासिक महत्व ही नहीं देशभक्त की भावना और मातृभूमि के प्रति सम्मान प्रकट के लिए है यह गीत वकील चंद चटर्जी द्वारा रचित किया गया था यह उसे अवसर का है जब देश गुलामी की जंजीरों में झगड़ा हुआ था तब स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एकता और ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रतिरोध का सबसे बड़ा प्रतीक बना इसका गायन राष्ट्रीय गौरव एवं बलिदानों की याद और देश प्रेम के समर्पण के प्रतीक स्वरूप है भारत की संविधान सभा ने वर्ष 1950 भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया। शुरू में वंदे मातरम की रचना स्वतंत्र रूप से की गई थी और बाद में इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास "आनंदमठ" (1882 में प्रकाशित) में शामिल किया गया था। इसे पहली बार 1896 में कलकत्ता में कांग्रेस अधिवेशन में भी रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया था।

'वंदे मातरम्' भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा है। 'सुजलाम सुफलाम'  जो भारत माता की सुंदरता (स्वच्छ जल, फलदार, शीतल हवा, फसलों से हरी-भरी) का वर्णन करता है। यह गीत स्वतंत्रता संग्राम में प्रेरणा का स्रोत रहा है। श्री बंकिम चंद्र चटर्जी ने यह गीत बंगाल के हुगली नदी के पास वर्ष 1876 में लिखा था, और इसकी धुन यदुनाथ भट्टाचार्य ने बनाई थी फिर यह गीत उनके प्रसिद्ध उपन्यास पुस्तक 'आनंद मठ' में शामिल किया गया, जो संन्यासी विद्रोह की पृष्ठभूमि पर आधारित था। बंगाल विभाजन के विरोध में यह गीत स्वतंत्रता सेनानियों का मुख्य नारा बन गया था, जिससे देशभर में स्वदेशी आंदोलन को बल मिला। इसका प्रथम गायन वर्ष 1896 में रविंद्रनाथ टैगोर ने कलकत्ता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में इसे पहली बार लय और संगीत के साथ गाया।

एवं रायहाना तैयबजी कांग्रेस के एक अधिवेशन में वंदे मातरम गाने वाली पहली मुस्लिम महिला थीं। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में एक प्रमुख व्यक्ति थीं और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान के लिए जानी जाती थीं वंदे मातरम विवाद के विषय में इतिहास के अनुसार यह था कि मुख्य रूप से इसके कुछ अंश को लेकर उठा था जिस पर कुछ लोगों ने आपत्ति उठाई थी 1937 में कांग्रेस ने भी राष्ट्रगान बनाने हेतु निर्णय लिया था और यह विवाद देश में धार्मिक और राजनीतिक माहौल में चर्चा का विषय बना रहा यह विवाद केवल उसे मुद्दे पर आधारित रहा जो भारत माता को देवी के रूप में चित्रित करती है सभी धर्म विशेष कर इस्लाम को भी यह गीत स्वीकार था इसलिए 24 जनवरी 1950 में भारत सरकार ने  'जन गण मन' के साथ 'वंदे मातरम' को भी राष्ट्रगीत का दर्जा दिया था।

इसकी संरचना:  में छह छंद हैं, शुरु आती दो संस्कृत में और बाकी बांग्ला में हैं। इसका महत्व: यह है की यह गीत भारत के लोगों को एकता, बलिदान और मातृभूमि के प्रति गहरी भक्ति सिखाता है, और ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बन गया।वंदे मातरम गीत यह शोधपत्र राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान हैदराबाद राज्य और विशेष रूप से हैदराबाद, कर्नाटक के वंदे मातरम आंदोलन पर केंद्रित है। वंदे मातरम आंदोलन हैदराबाद के निज़ाम राज्य के स्वतंत्रता संग्राम में एक प्रभावी और सबसे लोकप्रिय नारा था। वंदे मातरम, यह एक शब्द ऐसा है जो हमें इतिहास में ले जाता है। यह हमारे आत्मविश्वास को, हमारे वर्तमान को, आत्मविश्वास से भर देता है और हमारे भविष्य को यह नया साहस प्रदान करता है कि ऐसा कोई संकल्प नहीं है, जिसे पूरा न किया जा सके । ऐसा कोई लक्ष्य नहीं है जिसे हम भारतीय हासिल न कर सकें।
वंदे मातरम का अर्थ है "मैं तुम्हें नमन करता हूँ, माँ" "मैं तुम्हारी वंदना करता हूँ, माँ," जिसमें 'माँ' भारत माता को कहां गया है जो की हमारी मातृभूमि की प्रतीक है,  जो देश के प्रति गहरे प्रेम, सम्मान और भक्ति को व्यक्त करता है, विशेषकर वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाने के लिए एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य वंदे मातरम की भावना और भारत के इतिहास में इसकी अनूठी भूमिका को याद करना है। वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं है; यह भारत की सामूहिक चेतना है और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों का प्रेरणादायक संकल्प था
भारत सरकार ने जैसा की अपेक्षा थी ऐसे वंदे मातरम गीत को राष्ट्रीय गीत का दर्जा देकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं शहीदों का सम्मान किया है जिसके लिए हम कृतज्ञ हैं
डॉ.राजेंद्र प्रसाद आचार्य 
पूर्व सदस्य धर्मस्य विशेषज्ञ समिति मध्य प्रदेश शासन

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