दो बड़े मामलों में इंस्पेक्टर समेत कई आरोपी पुलिसकर्मियों पर CBI का शिकंजा

चंडीगढ़. सीबीआई ने चंडीगढ़ पुलिस से जुड़े दो बड़े मामलों में सोमवार को सीबीआई की ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। एक मामला नामी डॉक्टर के अपहरण का है जिसमें इंस्पेक्टर हरिंदर सेखों समेत क्राइम ब्रांच के कई पुलिसकर्मी आरोपित हैं। वहीं, दूसरा मामला सबूतों से छेड़छाड़ का है, जिसमें इंस्पेक्टर रामरत्न शर्मा और एसआइ सत्यवान शामिल हैं। अपहरण के मामले में पिछले साल एफआइआर दर्ज हुई थी, जबकि सबूतों से छेड़छाड़ का मामला अप्रैल 2024 में दर्ज हुआ था। पहला मामला: जिला अदालत के बाहर से किया था डॉक्टर को अगवा पिछले साल सीबीआई ने इंस्पेक्टर हरिंदर

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Published On :

जनवरी 20, 2026

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चंडीगढ़.

सीबीआई ने चंडीगढ़ पुलिस से जुड़े दो बड़े मामलों में सोमवार को सीबीआई की ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। एक मामला नामी डॉक्टर के अपहरण का है जिसमें इंस्पेक्टर हरिंदर सेखों समेत क्राइम ब्रांच के कई पुलिसकर्मी आरोपित हैं।

वहीं, दूसरा मामला सबूतों से छेड़छाड़ का है, जिसमें इंस्पेक्टर रामरत्न शर्मा और एसआइ सत्यवान शामिल हैं। अपहरण के मामले में पिछले साल एफआइआर दर्ज हुई थी, जबकि सबूतों से छेड़छाड़ का मामला अप्रैल 2024 में दर्ज हुआ था।
पहला मामला: जिला अदालत के बाहर से किया था डॉक्टर को अगवा
पिछले साल सीबीआई ने इंस्पेक्टर हरिंदर सिंह सेखों समेत सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ आइपीसी की धारा 365 और 34 के तहत केस दर्ज किया था। करीब एक साल चली जांच के बाद सीबीआई ने सोमवार को चार्जशीट दाखिल कर दी। पिछले साल जिन पर केस दर्ज हुआ था उनमें क्राइम ब्रांच के पूर्व इंस्पेक्टर हरिंदर सिंह सेखों, सब-इंस्पेक्टर सुरेश कुमार, असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर अजमेर सिंह उर्फ अमितोज सिंह, हेड कॉन्स्टेबल अनिल कुमार, कॉन्स्टेबल विकास हुड्डा, कॉन्स्टेबल सुभाष और कॉन्स्टेबल नीरज कुमार के नाम थे। वहीं, सूत्रों से पता चला है कि चार्जशीट में कुछ और पुलिसकर्मियों के नाम भी शामिल जोड़े गए हैं। इनके खिलाफ सेक्टर-21 निवासी डेंटिस्ट डा.मोहित धवन ने शिकायत दी थी।

जिला अदालत के बाहर से किया अपहरण
आरोप के मुताबिक डा.मोहित धवन ने एक आपराधिक मामले में अग्रिम जमानत के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उस याचिका पर हाईकोर्ट ने डॉ.धवन को जिला अदालत, सेक्टर-43 में पेश होने के आदेश दिए थे। सात जनवरी 2022 को डा.मोहित धवन अदालत में पेश होने के लिए पहुंचे, लेकिन अदालत के एंट्री गेट पर ही क्राइम ब्रांच की टीम ने उन्हें अगवा कर लिया ताकि वे जज के सामने पेश न हो सकें। कई घंटों तक डॉ.धवन को गैर कानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया और शाम को उनकी गिरफ्तारी डाल दी गई। अगले दिन पुलिस ने उन्हें अदालत में पेश कर उनका सात दिनों का रिमांड भी ले लिया था। डा.मोहित धवन बिना किसी अपराध के करीब दो महीने जेल में रहे, फिर जमानत पर बाहर आने के बाद उन्होंने इन सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकाेर्ट ने जांच के लिए पंजाब पुलिस को विशेष टीम गठित करने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट के इस फैसले को चंडीगढ़ प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2024 को हाईकोर्ट के फैसले को बदल दिया और मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी।

डॉ.धवन को पकड़ने प्राइवेट कार से आए थे पुलिसकर्मी
सीबीआई जांच में सामने आया कि सात जनवरी 2022 को सुबह 10.20 से 10.50 के बीच क्राइम ब्रांच के चार पुलिस मुलाजिम डा.मोहित धवन को पकड़ने एक प्राइवेट आइटी-20 कार से आए थे। यह कार कॉन्स्टेबल विकास हुड्डा की थी जो उनके कजन वीरेंद्र हुड्डा के नाम पर रजिस्टर थी। सीबीआई जांच में सामने आया था कि सात जनवरी 2022 को चार पुलिसकर्मियों अजमेर सिंह, अनिल कुमार, विकास हुड्डा और सुभाष की मोबाइल टावर लोकेशन जिला अदालत के पास की ही थी।

दूसरा मामला: आरोपित को बचाने के लिए केस फाइल से बदला मोबाइल
दो साल पहले सीबीआई ने इंस्पेक्टर रामरत्न शर्मा और एसआइ सत्यवान के खिलाफ केस दर्ज किया था। इस केस में भी सोमवार को चार्जशीट दाखिल कर दी गई। इन दोनों पुलिसकर्मियों पर एक आरोपित को बचाने के लिए सबूतों से छेड़छाड़ करने के आरोप हैं। केस के मुताबिक इंडस्ट्रियल एरिया थाना पुलिस ने चार अप्रैल 2022 को एक महिला से यौन उत्पीड़न के आरोप में शहर के एक बड़े माल के जीएम के खिलाफ एफआइआर दर्ज की थी। इस मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपित के घर से उसका आइफोन-12 जब्त किया था। पुलिस ने इस मोबाइल को सील नहीं किया, उल्टा इसकी जगह आइफोन-7 को सील कर दिया। यह आइफोन-7 भी आरोपित का ही था। पुलिस ने आरोपित को बचाने के लिए केस के रिकार्ड से मोबाइल ही बदल डाला।

आरोप है कि असली मोबाइल और सिम आरोपित को वापस कर दिया गया था उसकी जगह बिना सिम वाला आइफोन-7 केस फाइल में रख दिया गया। सीबीआई ने शिकायत मिलने पर इस मामले की जांच की और आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर दी।

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