Budh Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित होता है। जब त्रयोदशी तिथि बुधवार के दिन पड़ती है, तो इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से शिवजी की पूजा करने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन के संकट दूर होते हैं।
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तिथि और समय

पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 अप्रैल 2026 को मध्यरात्रि 12 बजकर 12 मिनट पर आरंभ होगी और उसी दिन रात 10 बजकर 31 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि प्रदोष व्रत हमेशा त्रयोदशी तिथि में ही रखा जाता है, इसलिए यह व्रत 15 अप्रैल को ही मान्य होगा।
प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत में सबसे अधिक महत्व प्रदोष काल का होता है, जो सूर्यास्त के बाद का समय है। इस दौरान भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। 15 अप्रैल को प्रदोष काल शाम 6 बजकर 1 मिनट से रात 9 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। इस समय में शिवलिंग का पूजन करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं।
पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन उपवास रखकर भगवान शिव का स्मरण करें। प्रदोष काल में शिव मंदिर जाएं या घर पर शिवलिंग का जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और फूलों से अभिषेक करें। शिव मंत्रों का जाप करें और आरती करें। विशेष रूप से “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
धार्मिक महत्व
बुध प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, बुद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस व्रत से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। जो लोग नियमित रूप से प्रदोष व्रत रखते हैं, उन पर भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा बनी रहती है।
क्यों खास है यह व्रत
बुधवार का दिन भगवान गणेश और बुध ग्रह से जुड़ा होता है, जबकि प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है। जब यह दोनों संयोग एक साथ आते हैं, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन किया गया व्रत जीवन की बाधाओं को दूर कर सफलता के नए मार्ग खोल सकता है।
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।









