Budget Session 2026: लोकसभा के बजट सत्र के सोमवार को विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक संवेदनशील मुद्दे को उठाते हुए संसद में चर्चा करने की कोशिश की। उन्होंने एक मैगज़ीन में छपी रिपोर्ट का कुछ अंश पढ़ने की कोशिश की, जिसमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे का हवाला दिया गया था। हालांकि, सदन के नियमों का हवाला देते हुए उन्हें यह करने से रोक दिया गया। इस बीच सदन का माहौल तनावपूर्ण हो गया और कार्यवाही बाधित हुई।
अखिलेश यादव ने उठाया समर्थन
इस पूरे घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी प्रमुख और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने राहुल गांधी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित और सुरक्षा के मामलों में विपक्ष के नेताओं को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। अखिलेश ने स्पष्ट किया कि भारत के लिए पाकिस्तान की तुलना में चीन अधिक गंभीर खतरा है, इसलिए इस तरह के मुद्दों पर खुली बहस अनिवार्य है।अखिलेश यादव ने सदन में कहा, “अध्यक्ष महोदय, चीन का मुद्दा बेहद संवेदनशील है। अगर कोई सुझाव देश के हित में है तो विपक्ष के नेता को इसे पढ़ने दिया जाना चाहिए।” उन्होंने जोर देकर कहा कि चीन से जुड़े मामलों में कोई समझौता नहीं किया जा सकता और यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है।
ऐतिहासिक दृष्टांत और सावधानी की जरूरत
सदन में अखिलेश यादव ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा, “जॉर्ज फर्नांडिस, राम मनोहर लोहिया और अन्य नेताओं ने हमेशा कहा कि हमें चीन से सतर्क रहना चाहिए। यदि सावधानी नहीं बरती गई तो पहले भी हमने जमीन गंवाई है।” उनका यह बयान यह स्पष्ट करता है कि विपक्ष के नेता संवेदनशील राष्ट्रीय मुद्दों पर खुली बहस का समर्थन करते हैं।राहुल गांधी ने उस मैगज़ीन रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की किताब के अंश शामिल थे। यह किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है। रिपोर्ट में भारत और चीन के बीच एलएसी पर हुए संघर्ष का विवरण था और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी जिक्र था।
सरकार और सत्तापक्ष का विरोध
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्री मोदी के नाम शामिल होने के कारण सदन में सत्तापक्ष ने विरोध जताया। सदन अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी को निर्देश दिया कि वह अप्रकाशित पुस्तक के अंश को पढ़ नहीं सकते। इस विवाद के कारण सदन का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।सदन से बाहर आने के बाद राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री ने जटिल राष्ट्रीय स्थिति में जिम्मेदारी निभाने के बजाय इसे सेना अधिकारियों पर छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मसला है।
लोकतांत्रिक बहस की जरूरत
अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि लोकतंत्र में ऐसी बहसों को रोकना गलत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संसद का काम खुलकर चर्चा करना है और संवेदनशील राष्ट्रीय मुद्दों पर सभी को अपनी बात रखने का अधिकार मिलना चाहिए। उनका कहना था कि चीन के खतरे पर खुली बहस से ही देश की सुरक्षा और रणनीति को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।
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