Budget 2026 Pharma: आज 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में अपना रिकॉर्ड नौवां केंद्रीय बजट पेश कर इतिहास रच दिया है। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को नमन करते हुए की। वित्त मंत्री ने कहा, “आज माघ पूर्णिमा और गुरु रविदास जयंती का पावन अवसर है और इस शुभ घड़ी में मुझे देश का बजट प्रस्तुत करने का सौभाग्य मिला है।” उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद पिछले एक वर्ष में भारत की आर्थिक स्थिति अत्यंत सुदृढ़ रही है, जो भविष्य के बड़े सुधारों के लिए एक ठोस आधार प्रदान करती है।
फार्मा सेक्टर के लिए ‘मास्टरस्ट्रोक’: तीन नए NIPER संस्थानों की स्थापना
बजट 2026 की सबसे महत्वपूर्ण घोषणाओं में से एक स्वास्थ्य और दवा अनुसंधान (Pharmaceutical Research) क्षेत्र से जुड़ी है। वित्त मंत्री ने देश में तीन नए राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (NIPER) स्थापित करने का बड़ा एलान किया है। ये संस्थान दवा विज्ञान के क्षेत्र में उच्च स्तरीय शिक्षा और अनुसंधान का केंद्र बनेंगे। सरकार का मानना है कि भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी’ के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए केवल विनिर्माण ही नहीं, बल्कि मौलिक शोध और नवाचार (R&D) में भी अग्रणी बनना होगा। ये नए संस्थान इसी दिशा में एक मील का पत्थर साबित होंगे।
मौजूदा संस्थानों का कायाकल्प: सात NIPER संस्थानों को किया जाएगा अपग्रेड
सिर्फ नए संस्थानों की स्थापना ही नहीं, बल्कि सरकार ने पहले से मौजूद सात NIPER संस्थानों के आधुनिकीकरण का भी संकल्प लिया है। बजट में इन संस्थानों को उन्नत बनाने और उन्हें विश्व स्तरीय आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए विशेष फंड का प्रावधान किया गया है। इन केंद्रों में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल लाइब्रेरी और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों और शोधकर्ताओं को ऐसा वातावरण प्रदान करना है, जहाँ वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना कर सकें और नई दवाओं की खोज में भारत का नाम रोशन कर सकें।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा और नवाचार: दवा उद्योग को मिलेगी नई ऊर्जा
दवा उद्योग (Pharmaceutical Industry) भारत की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ है। वित्त मंत्री के इस फैसले को फार्मा क्षेत्र में ‘क्वांटम जंप’ के रूप में देखा जा रहा है। शोध और नवाचार पर केंद्रित ये संस्थान उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करेंगे, जिससे देश को कुशल वैज्ञानिक और पेशेवर मिलेंगे। इससे न केवल घरेलू स्तर पर दवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय दवाओं की स्वीकार्यता और मांग भी बढ़ेगी। यह कदम विशेष रूप से ‘बॉयो-फॉर्मा शक्ति’ मिशन को सफल बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
रोजगार और आत्मनिर्भरता: भविष्य की ओर एक कदम
इन नए और उन्नत संस्थानों के माध्यम से फार्मास्युटिकल सेक्टर में रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे। रिसर्च फेलोशिप से लेकर शिक्षण और तकनीकी पदों तक, युवाओं के लिए करियर के नए द्वार खुलेंगे। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सपना तब तक अधूरा है जब तक हम स्वास्थ्य और जीवन रक्षक दवाओं के लिए पूरी तरह स्वदेशी अनुसंधान पर निर्भर नहीं हो जाते। यह बजट पहल न केवल भारत की स्वास्थ्य प्रणाली को सुरक्षित करेगी, बल्कि आर्थिक विकास को भी नई गति प्रदान करेगी।
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