UP Politics : मथुरा में अखिलेश पर बरसे ब्रजेश पाठक, रामलला के दर्शन पर उठाया सवाल?

मथुरा में ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव पर अयोध्या, रामलला और सनातन को लेकर तीखा हमला बोला। चुनाव आयोग पर विपक्ष के सवालों का भी जवाब दिया। 2027 चुनाव से पहले धार्मिक मुद्दों से लेकर चुनावी प्रक्रिया तक सियासत गरमाती दिख रही है। अब नजर अखिलेश यादव और सपा की अगली प्रतिक्रिया पर है।

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Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 8, 2026

UP Politics : उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मथुरा के दीनदयाल धाम में आयोजित कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने अयोध्या यात्रा और रामलला के दर्शन से जुड़े सवाल उठाते हुए समाजवादी पार्टी की राजनीतिक सोच पर हमला बोला। उनके बयान के बाद यूपी में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर बहस फिर तेज हो गई है।

रामलला के दर्शन को लेकर अखिलेश पर सवाल

ब्रजेश पाठक ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव अयोध्या गए, लेकिन उन्होंने रामलला के दर्शन नहीं किए। डिप्टी सीएम ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के नेताओं की राजनीति का संबंध सनातन धर्म से नहीं है। उन्होंने सपा पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी धार्मिक मुद्दों पर वोट की राजनीति करती है।

कारसेवकों के मुद्दे पर भी हमला

कार्यक्रम में ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी के पुराने राजनीतिक इतिहास का जिक्र करते हुए कारसेवकों से जुड़ी घटनाओं को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा नेताओं पर कारसेवकों से जुड़ी पुरानी घटनाओं की राजनीतिक जिम्मेदारी का सवाल उठता रहा है। पाठक ने इसी संदर्भ में अखिलेश यादव के अयोध्या जाने और रामलला के दर्शन नहीं करने पर सवाल खड़े किए।

अयोध्या और काशी के विकास पर सवाल

डिप्टी सीएम ने अयोध्या और काशी में चल रहे विकास कार्यों को लेकर भी समाजवादी पार्टी को घेरा। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास के साथ बुनियादी ढांचे पर काम कर रही है। पाठक ने सपा सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि उस समय अयोध्या और काशी के विकास के लिए कितने बड़े काम किए गए थे।

चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोपों का जवाब

ब्रजेश पाठक ने चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष चुनाव जीतता है, तब चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाए जाते, लेकिन चुनाव परिणाम उसके पक्ष में नहीं आने पर आयोग पर आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने केरल, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश में विपक्ष की जीत का उदाहरण भी दिया।

2027 विधानसभा चुनाव पर भी निशाना

आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भी ब्रजेश पाठक ने विपक्ष पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2027 का चुनाव नजदीक आने के साथ संवैधानिक संस्थाओं और चुनाव प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक सवाल बढ़ रहे हैं। पाठक ने विपक्ष के आरोपों को चुनावी राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि चुनाव के दौरान जनता के बीच कई मुद्दों को लेकर बहस देखने को मिलेगी।

किसान और गरीब सरकार की प्राथमिकता

दीनदयाल धाम के कार्यक्रम में डिप्टी सीएम ने सरकार की योजनाओं और प्राथमिकताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसान, युवा, गरीब और बुजुर्ग सरकार के प्रमुख फोकस में हैं। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन और अंत्योदय की अवधारणा को सरकार की योजनाओं से जोड़ते हुए कहा कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

किसान सम्मान निधि और आवास योजनाओं का जिक्र

मीडिया से बातचीत में ब्रजेश पाठक ने किसान सम्मान निधि, पक्के मकान और स्वास्थ्य सुविधाओं समेत विभिन्न सरकारी योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ मिल रहा है। उनके मुताबिक सरकार का उद्देश्य गरीब और सामान्य परिवारों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।

अयोध्या मुद्दे पर भाजपा-सपा आमने-सामने

अखिलेश यादव और अयोध्या से जुड़े मुद्दे पर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी पहले भी होती रही है। भाजपा नेता जहां राम मंदिर और अयोध्या में विकास कार्यों को अपनी राजनीति का प्रमुख मुद्दा बताते हैं, वहीं समाजवादी पार्टी सरकार की नीतियों और विकास के अन्य पहलुओं पर सवाल उठाती रही है। ऐसे में 2027 से पहले यह मुद्दा फिर चर्चा में है।

चुनाव से पहले बढ़ेगा राजनीतिक टकराव?

ब्रजेश पाठक के ताजा बयान में अयोध्या, सनातन, चुनाव आयोग और सरकारी योजनाओं जैसे कई मुद्दे एक साथ सामने आए। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले इन विषयों पर भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है। हालांकि, पाठक द्वारा लगाए गए आरोप उनके राजनीतिक बयान हैं और इन पर समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।

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