Bollywood Religious Movies: भारतीय सिनेमा में इन दिनों एक खास बदलाव देखने को मिल रहा है। बॉक्स ऑफिस पर हाल ही में छप्परफाड़ कमाई करने वाली फिल्म ‘हनुमान अंश’ की शानदार सफलता ने बॉलीवुड को एक नया और अचूक फॉर्मूला दे दिया है। यह फिल्म न केवल दर्शकों के दिलों में जगह बना रही है, बल्कि सिनेमाघरों में एक अनूठा नजारा भी पेश कर रही है। नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित इस फिल्म को देखने पहुंचने वाले दर्शक थिएटर के बाहर ही अपने जूते-चप्पल उतारकर अपनी गहरी आस्था और श्रद्धा जाहिर कर रहे हैं।
सिनेमा और आस्था का अनोखा संगम

इस फिल्म की दीवानगी का आलम यह है कि एक बुजुर्ग दर्शक बिना चप्पल के ही पूरी तन्मयता के साथ फिल्म का आनंद लेते दिखे। इससे यह साफ जाहिर होता है कि सिनेमा हॉल और मंदिर के बीच की दूरी अब कम होती जा रही है। हैरानी की बात यह है कि रिलीज के 33 दिन बाद भी इस फिल्म की कमाई में करीब 10 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है। महज डेढ़ से दो करोड़ रुपये के छोटे बजट में बनी इस फिल्म ने 150 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है, जो यह साबित करता है कि मजबूत कंटेंट और आस्था का मेल बॉक्स ऑफिस पर बड़े रिकॉर्ड तोड़ सकता है।
इतिहास से जुड़ा है धार्मिक फिल्मों का नाता

यह कोई पहली बार नहीं है जब किसी धार्मिक फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर चमत्कार किया हो। साल 1975 में आई फिल्म ‘जय संतोषी मां’ इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। मात्र 25 लाख रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने लगभग सवा पांच करोड़ रुपये का कारोबार किया था। उस दौर में भी दर्शक सिनेमाघरों के बाहर जूते-चप्पल उतारकर ही अंदर जाया करते थे।
भारतीय सिनेमा की शुरुआत से ही पौराणिक कथाएं और आध्यात्मिक किरदार पर्दे का अहम हिस्सा रहे हैं। साल 1913 में दादा साहेब फाल्के की ‘राजा हरिश्चंद्र’ से लेकर आज के दौर की ‘ब्रह्मास्त्र’, ‘कांतारा’ और आने वाली ‘रामायण’ तक, दर्शकों का इन कहानियों से जुड़ाव हमेशा मजबूत रहा है। समय, तकनीक और कहानी कहने का अंदाज जरूर बदला है, लेकिन दर्शकों की आस्था का रिश्ता आज भी उतना ही अटूट है।
बॉक्स ऑफिस पर सदाबहार जादू

1950 में रिलीज हुई ‘हर हर महादेव’ उस साल की टॉप कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल थी। इसके बाद 1961 में आई ‘संपूर्ण रामायण’ दशक की सबसे सफल ब्लॉकबस्टर पौराणिक फिल्म साबित हुई। इसी दौर में भगवान हनुमान पर बनी फिल्मों में दारा सिंह का अभिनय बेहद लोकप्रिय हुआ था।
‘ओ माय G.O.D. 2’ के निर्देशक अमित राय का मानना है कि ऐसी फिल्मों में ईमानदारी और मजबूत संदेश का होना बेहद जरूरी है। वहीं, जाने-माने ट्रेड एनालिस्ट कोमल नाहटा का कहना है कि भारत में आस्था को हमेशा से एक विशेष स्थान मिला है। हम ऐसे समाज से आते हैं जहां धार्मिक भावनाएं और माउथ पब्लिसिटी किसी भी फिल्म को फर्श से अर्श तक पहुंचा सकती हैं।
आने वाले दिनों का सिनेमैटिक भविष्य

धार्मिक और पौराणिक फिल्मों के इस दौर को भुनाने के लिए मेकर्स पूरी तरह तैयार हैं। आने वाले समय में ‘रामायण’, ‘महावतार सीरीज’, ‘हनुमान अंश 2’, ‘तेरा साई’, और ‘बाबा खाटू श्याम’ जैसी कई बड़ी फिल्में रिलीज होने वाली हैं। नमित मल्होत्रा जैसे बड़े निर्माता हमारी पौराणिक कथाओं को ग्लोबल लेवल पर ले जाने के लिए करोड़ों रुपये का निवेश कर रहे हैं। यह साफ इशारा है कि बॉलीवुड को हिट फिल्मों का जो नया फॉर्मूला मिला है, वह आने वाले कई सालों तक बॉक्स ऑफिस पर राज करने वाला है।
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