Bolivia State of Emergency : अल नीनो का कहर बढ़ने की आशंका, बोलीविया में घोषित हुआ आपातकाल

अल नीनो के बढ़ते खतरे ने बोलीविया में चिंता बढ़ा दी है। सरकार ने देशव्यापी आपातकाल घोषित कर दिया है। सूखे से 78 हजार परिवार प्रभावित हैं और 75 हजार से ज्यादा मवेशियों की मौत हो चुकी है। वैज्ञानिकों ने 2027 तक गंभीर मौसम प्रभाव और लाखों लोगों के जोखिम की चेतावनी दी है।

Bolivia State of Emergency

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

नवम्बर 2, 2026

Bolivia State of Emergency : दक्षिण अमेरिकी देश बोलीविया में सूखे और संभावित बाढ़ के खतरे ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। अल नीनो मौसम प्रणाली के संभावित गंभीर प्रभावों से निपटने के लिए देशभर में आपातकाल घोषित कर दिया गया है। इस फैसले का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों के लिए आर्थिक संसाधनों के साथ अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती आसान बनाना है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि वर्ष 2026 के आखिरी महीनों में अल नीनो का प्रभाव अपने चरम पर पहुंच सकता है और इसका असर 2027 तक बना रह सकता है।

राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज ने जारी किया आपातकाल का आदेश

समाचार एजेंसी अल जजीरा के मुताबिक, बोलीविया के राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज ने शनिवार, 31 अक्टूबर को आपातकाल घोषित करने वाले आदेश पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही उन्होंने सूखे और बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त बचाव दल भेजने के निर्देश दिए। राष्ट्रपति ने कहा कि अल नीनो के कारण सूखे और बाढ़ के रूप में बेहद गंभीर प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए देश की सभी सरकारी संस्थाओं और संबंधित विभागों का सहयोग जरूरी होगा।

सूखे की चपेट में हजारों परिवार, मवेशियों की भी मौत

बोलीविया सरकार की इस सप्ताह जारी रिपोर्ट के अनुसार, देश के नौ प्रशासनिक विभागों में से छह में सूखे का असर दिखाई दे रहा है। इसकी वजह से करीब 78 हजार परिवार प्रभावित हुए हैं। सूखे ने खेती और पशुपालन पर भी गंभीर असर डाला है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 75 हजार से ज्यादा मवेशियों की मौत हो चुकी है। इससे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले परिवारों की आजीविका और आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ गया है।

बाढ़ का खतरा भी बढ़ा, पड़ोसी देशों में बिगड़े हालात

बोलीविया के सामने केवल सूखे की चुनौती नहीं है, बल्कि कई इलाकों में बाढ़ का खतरा भी मंडरा रहा है। दिसंबर 2025 में देश के सांता क्रूज क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ के कारण दर्जनों लोगों की जान चली गई थी। पड़ोसी देशों में भी मौसम की चरम स्थितियां देखने को मिल रही हैं। चिली की राजधानी सैंटियागो में अक्टूबर के दौरान रिकॉर्ड बारिश दर्ज की गई, जबकि पेरू में पिछले महीने जंगलों में लगी आग से कम से कम 12 लोगों की मौत हुई।

क्या है अल नीनो और क्यों बढ़ती है इसकी चिंता?

अल नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक होने की प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है। यह घटना आमतौर पर हर दो से सात साल के अंतराल पर होती है। समुद्र के तापमान में बदलाव के कारण दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हवाओं, वायुदाब और बारिश के सामान्य पैटर्न प्रभावित होते हैं। इसका नतीजा कहीं सूखे, कहीं अत्यधिक बारिश और कहीं बाढ़ के रूप में सामने आ सकता है।

2026 के अंत में चरम पर पहुंच सकता है अल नीनो

मौसम विशेषज्ञों को आशंका है कि मौजूदा अल नीनो अब तक दर्ज की गई सबसे शक्तिशाली घटनाओं में शामिल हो सकता है। इसका प्रभाव 2026 के आखिरी महीनों में सबसे ज्यादा रहने की आशंका है। हालांकि, इसके परिणाम 2027 के दौरान भी महसूस किए जा सकते हैं। अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में इसका असर अलग हो सकता है, इसलिए हर देश के लिए खतरे और तैयारी की जरूरत भी अलग होगी।

4.5 लाख से ज्यादा अतिरिक्त मौतों का अनुमान

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शिकागो विश्वविद्यालय की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के शोधकर्ताओं ने अनुमान जताया है कि असाधारण रूप से शक्तिशाली अल नीनो जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच दुनिया में करीब 4.51 लाख अतिरिक्त मौतों का कारण बन सकता है। यह एक शोध-आधारित अनुमान है, निश्चित भविष्यवाणी नहीं। गरीब देशों के लोगों को अधिक जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।

फरवरी 2027 तक बने रह सकता है असर

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने 3 सितंबर को जारी अपडेट में बताया था कि अल नीनो के फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना करीब 100 प्रतिशत है। संगठन ने इसके कारण दुनिया के कई हिस्सों में तापमान और बारिश के पैटर्न में बदलाव तथा बाढ़, सूखे और अत्यधिक गर्मी का खतरा बढ़ने की चेतावनी दी थी। ऐसे में बोलीविया का आपातकालीन फैसला आने वाले महीनों में संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।

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