यूपी में बनेगा बायोई-3 सेल, लैब से बाजार तक पहुंचेगी तकनीक, रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे

शोध और उद्योगों के बीच बढ़ेगा तालमेल, नई तकनीकों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर जोर,  निवेश और कुशल रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर लखनऊ योगी सरकार ने प्रदेश को जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी) के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए नई पहल की है। प्रदेश में जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान, नई तकनीकों के विकास और जैव विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए राज्य स्तरीय बायोई-3 सेल बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। ऐसे में सीएम योगी की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश प्रोमोट फार्मा काउंसिल (यूपीपीपीसी) ने देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों के विशेषज्ञों की एक कमेटी गठित की है, जिसका

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Published On :

अक्टूबर 26, 2026

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शोध और उद्योगों के बीच बढ़ेगा तालमेल, नई तकनीकों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर जोर,  निवेश और कुशल रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर

लखनऊ
योगी सरकार ने प्रदेश को जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी) के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए नई पहल की है। प्रदेश में जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान, नई तकनीकों के विकास और जैव विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए राज्य स्तरीय बायोई-3 सेल बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। ऐसे में सीएम योगी की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश प्रोमोट फार्मा काउंसिल (यूपीपीपीसी) ने देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों के विशेषज्ञों की एक कमेटी गठित की है, जिसका उद्देश्य प्रदेश में हो रहे शोध को उद्योगों से जोड़ना, स्वदेशी तकनीकों को बाजार तक पहुंचाना और स्टार्टअप के साथ रोजगार के नए अवसर बढ़ाना है।
   योगी सरकार की यह पहल केंद्र सरकार की बायोई-3 नीति के अनुरूप है। बायोई-3 में अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी को शामिल किया गया है। इसके तहत जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी) के इस्तेमाल से औद्योगिक विकास (इंडस्ट्रियल डवलपमेंट) को बढ़ावा देने और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन की संभावनाओं पर काम किया जाता है। उत्तर प्रदेश में भी इस क्षेत्र की वैज्ञानिक क्षमता और औद्योगिक संभावनाओं का इस्तेमाल कर नए अवसर पैदा करने की तैयारी है।

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बड़े वैज्ञानिक संस्थानों के विशेषज्ञ करेंगे मदद
यूपीपीपीसी की सीईओ कृतिका शर्मा ने बताया कि प्रदेश में बायोई-3 पहल को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ का एक पैनल बनाया गया है। इसमें सीएसआईआर की प्रमुख प्रयोगशालाओं, आईआईटी, नाइपर रायबरेली और लखनऊ स्थित सेंटर ऑफ बायोमेडिकल रिसर्च (सीबीएमआर) के वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों को शामिल किया गया है। इन विशेषज्ञों से प्रदेश में जैव प्रौद्योगिकी के विकास और इसे उद्योगों से जोड़ने के लिए सुझाव लिए जाएंगे। इसके लिए वैज्ञानिक संस्थानों, शैक्षणिक संगठनों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रदेश में मौजूद शोध सुविधाओं और विशेषज्ञता का इस्तेमाल नई तकनीकों के विकास और उनके व्यावसायिक उपयोग करना है। पैनल में यूपीपीपीसी के महाप्रबंधक (अनुसंधान एवं नवाचार) प्रो. (डॉ.) संदीप शर्मा को संयोजक बनाया गया है। कमेटी में नाइपर रायबरेली के सहायक प्रोफेसर डॉ. रविंदर कुमार कौंडल, सीएसआईआर-आईआईटीआर के वैज्ञानिक-जी डॉ. रजनीश कुमार चतुर्वेदी और सीएसआईआर-सीडीआरआई के वैज्ञानिक-जी डॉ. रविशंकर रामचंद्रन शामिल हैं।

प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों को उद्योगों तक पहुंचाना बायोई-3 का मुख्य उद्देश्य
काउंसिल के डायरेक्टर डॉ. जीएन सिंह ने बताया कि कमेटी में आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रांजल चंद्रा, सीबीएमआर लखनऊ के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सैयद मसूद हुसैन, सीएसआईआर-सीआईएमएपी के वैज्ञानिक-जी डॉ. करुणा शंकर और आईआईटी कानपुर के प्रो. जे. रामकुमार को भी जिम्मेदारी दी गई है। कमेटी में शामिल संस्थान दवा अनुसंधान, विष विज्ञान, औषधीय एवं सुगंधित पौधों और जैव चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में काम करते हैं। इनके अनुभव से प्रदेश में जैव प्रौद्योगिकी से जुड़े शोध और तकनीकी विकास को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। बायोई-3 पहल के तहत किन कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाए, इसे तय करने के लिए केंद्र सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के साथ बैठक प्रस्तावित है। इसमें राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के संस्थानों के बीच तालमेल बढ़ाने और उद्योगों तथा शिक्षण संस्थानों को साथ लाने पर चर्चा होगी। बैठक के जरिए प्रस्तावित कार्यक्रमों को अंतिम रूप देने की दिशा में काम किया जाएगा। प्रदेश में बायोई-3 सेल बनाने की पहल का अहम उद्देश्य प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों को उद्योगों तक पहुंचाना है। कई बार शोध और नई तकनीकों का इस्तेमाल व्यावसायिक स्तर पर नहीं हो पाता। ऐसे में वैज्ञानिक संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ने से नई तकनीकों को उत्पादन में इस्तेमाल करने के रास्ते खुल सकते हैं। इससे स्वदेशी नवाचारों को बाजार तक पहुंचाने और नए कारोबार शुरू करने में भी मदद मिल सकती है।