Bihar Politics : बिहार में ‘सहयोग शिविर’ पर सियासी संग्राम, कांग्रेस ने सम्राट चौधरी पर कसा तीखा तंज

बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा शुरू किए गए 'सहयोग शिविर' ने राज्य में नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने इसे जनता के साथ छलावा बताते हुए मुख्यमंत्री पर तीखे तंज कसे हैं। क्या यह शिविर वाकई जनता की समस्याओं का समाधान है या महज एक राजनीतिक पैंतरा?

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Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 1, 2026

Bihar Politics : बिहार की राजनीति में इन दिनों जन-सुनवाई और विकास योजनाओं को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। राज्य सरकार ने ग्रामीण स्तर पर समस्याओं के समाधान के लिए एक महत्वाकांक्षी अभियान की घोषणा की है, लेकिन विपक्षी दल इसे केवल एक राजनीतिक स्टंट करार दे रहे हैं। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की इस नई पहल ने सत्ता पक्ष और विपक्ष को आमने-सामने खड़ा कर दिया है, जिससे चुनावी सरगर्मी और बढ़ गई है।

पंचायत स्तर पर ‘सहयोग शिविर’: नीतीश सरकार की नई पहल

बिहार सरकार ने आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए पंचायत स्तर पर ‘सहयोग शिविर’ आयोजित करने का बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की विशेष पहल पर शुरू हो रहे इस अभियान के लिए 30 अप्रैल, 2026 को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए। सरकारी आदेश के अनुसार, 19 मई से पूरे राज्य में एक साथ इन शिविरों का आयोजन किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस कदम से लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए जिला मुख्यालय या राजधानी के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और उनके गांव में ही समस्याओं का निपटारा होगा।

बिहार कांग्रेस का हमला: “नया मुल्ला प्याज अधिक खाता है”

सरकार की इस पहल पर बिहार कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने शुक्रवार को सम्राट चौधरी पर तंज कसते हुए एक पुरानी कहावत का सहारा लिया। उन्होंने कहा, “नया मुल्ला प्याज अधिक खाता है। सम्राट जी अभी नए-नए पद पर आए हैं, इसलिए कुछ दिनों तक उत्साह में ऐसे दिखावे करेंगे।” कांग्रेस का आरोप है कि इस तरह के अभियान केवल कागजी साबित होते हैं और धरातल पर जनता को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलता।

ब्यूरोक्रेसी और पुराने अनुभवों का हवाला

असित नाथ तिवारी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुराने कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि जब नीतीश कुमार सत्ता में आए थे, तब उन्होंने भी ऐसे ही प्रयोग किए थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि गांव-गांव अधिकारियों के जाने की बात तो भूल जाइए, हकीकत यह है कि जनता अधिकारियों के दरवाजे पर माथा रगड़कर लौट आती है पर कोई सुनवाई नहीं होती। कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि बीजेपी-जेडीयू गठबंधन की सरकार में नौकरशाह (ब्यूरोक्रेट्स) खुद को शासक समझते हैं और मुख्यमंत्री केवल उनके सहायक की भूमिका में नजर आते हैं।

महंगाई और गैस सिलेंडर की कीमतों पर केंद्र को घेरा

जनता के मुद्दों पर बात करते हुए कांग्रेस ने केंद्र सरकार को भी आड़े हाथों लिया। कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जिस ‘पकौड़ा रोजगार’ की बात करते हैं, वह पकौड़ा इसी गैस पर तला जाता है। सिलेंडर के दाम बढ़ने से आम आदमी की जेब पर सीधा बोझ पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर, जिसका इस्तेमाल गरीब मजदूर और विद्यार्थी करते हैं, उसकी कीमत में भारी वृद्धि करना आम जनता पर जुल्म के समान है।

जनता की अदालत और भविष्य की चुनौती

बिहार में शुरू होने वाला यह ‘सहयोग शिविर’ अभियान सफल होगा या कांग्रेस की भविष्यवाणी सच साबित होगी, यह तो 19 मई के बाद ही साफ होगा। फिलहाल, बिहार की राजनीति में ‘पंचायत’ और ‘पकौड़ा’ दोनों ही मुख्य चर्चा के विषय बन गए हैं। एक तरफ सरकार इसे सुशासन का हिस्सा बता रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे महंगाई और प्रशासनिक विफलता से ध्यान भटकाने की कोशिश मान रहा है। बिहार की जनता अब इन सियासी दावों और वादों के बीच अपने वास्तविक हक का इंतजार कर रही है।

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