Bihar Politics: बिहार की सियासत में जारी उथुल-पुथल के बीच अब सत्ता की तस्वीर पूरी साफ नजर होती आ रही है. नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक पारी का पूरा फोकस अब पटना से हटाकर दिल्ली की ओर शिफ्ट करते दिख रहे हैं. यह रणनीतिक बदलवार सिर्फ पद परिवर्तन तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसे राज्य और केंद्र दोनों ही स्तरों पर व्यापक सत्ता संतुलन बदलने के बड़े संकेत के रूप में आंका जा रहा है.
सीएम पद से त्यागपत्र की चर्चा
मिली जानकारी के अनुसार, नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ लेंगे. षपथ लेने के बाद वे संसद के आगामी सत्र में हिस्सा लेंगे. इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े तकनीकी प्रावधानों में संशोधन और लोकसभा सहित विभिन्न विधानमंडलों में सीटों की संख्या में वृद्धि करने जैसे अति-महत्वपूर्ण विधेयकों पर गहन चर्चा होगी और उन्हें अमलीजामा पहनाया जाएगा. ऐसे अहम मोड़ पर नीतीश कुमार की उच्च सदन में मौजूदगी राष्ट्रीय राजनीति के पटल पर उनकी सक्रिय एवं निर्णायक भूमिका की विधिवत शुरुआत मानी जा रही है. इसी सिलसिले में 13 अप्रैल को उनके बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की अटकलें काफी तेज हो चुकी हैं.
बिहार विधान परिषद की सदस्यता का परित्याग
सूत्रों के अनुसार, देश की राजधानी में शपथ लेने के तुरंत बाद वे वापस पटना लौटकर महामहिम राज्यपाल को अपना औपचारिक इस्तीफा सौंप देंगे. हाल ही में उन्होंने बिहार विधान परिषद की सदस्यता का परित्याग किया था, जिसे इसी बड़े सियासी बदलाव की सुविचारित रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. नीतीश कुमार के इस कदम के उठते ही बिहार राज्य में ‘सत्ता हस्तांतरण’ या पावर शिफ्ट का होना लगभग तय है.
BJP के हाथों में नेतृत्व की बागडोर
बिहार के इस नए राजनीतिक समीकरण के तहत अब सत्ता की पूरी कमान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मजबूत हाथों में जाने की प्रबल संभावना है. मुख्यमंत्री के इस सर्वोच्च पद के लिए वर्तमान में सम्राट चौधरी का नाम सबसे प्रमुख और मजबूत दावेदार के तौर पर राजनीतिक गलियारों में गूंज रहा है. भाजपा इस बार एनडीए गठबंधन के भीतर पूरी तरह से नेतृत्वकारी और बड़े भाई की भूमिका निभाने की आक्रामक रणनीति पर काम कर रही है.










