Bihar Politics: बिहार में नई सरकार कब? विजय चौधरी ने बताया इस्तीफा और शपथ ग्रहण का पूरा शेड्यूल

बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर होने वाला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और पद से इस्तीफा देने की चर्चा तेज है। जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी के संकेतों के अनुसार, 14 अप्रैल को खरमास खत्म होते ही राज्य में नई सरकार का गठन हो सकता है। सत्ता की कमान भाजपा के हाथों में जाने की संभावना है।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 9, 2026

Bihar Politics: बिहार की सियासत एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों के बीच अब यह लगभग साफ हो गया है कि प्रदेश में जल्द ही नेतृत्व परिवर्तन होने वाला है। जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के हालिया बयानों ने इन अटकलों पर मुहर लगा दी है, जिससे सूबे का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

सत्ता परिवर्तन की पटकथा

विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट संकेतों में कहा है कि नीतीश कुमार जैसे ही राज्यसभा सदस्य के रूप में अपनी शपथ लेंगे, वह मुख्यमंत्री के पद से मुक्त हो जाएंगे। संवैधानिक नियमों के अनुसार, उच्च सदन का सदस्य बनने के बाद उनका वर्तमान पद पर बने रहना संभव नहीं होगा। चौधरी के अनुसार, इस्तीफे की प्रक्रिया के लिए किसी औपचारिक कैबिनेट बैठक की आवश्यकता नहीं है; मुख्यमंत्री सीधे राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। यह कदम बिहार की राजनीति में एक लंबे युग के अंत और नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक होगा।

बिहार का नया सियासी समीकरण

भारतीय परंपराओं को ध्यान में रखते हुए, बिहार में नई सरकार का गठन खरमास की समाप्ति के बाद ही होगा। 14 अप्रैल को खरमास खत्म होते ही राजनीतिक हलचलें तेज हो जाएंगी। माना जा रहा है कि शुभ समय शुरू होते ही नई मंत्रिपरिषद की शपथ दिलाई जाएगी। विजय चौधरी ने संकेत दिया है कि सरकार बनाने की दिशा में सभी बाधाएं लगभग दूर हो चुकी हैं और अब बस औपचारिकताओं का पूरा होना बाकी है। 15 अप्रैल के बाद बिहार को नया नेतृत्व मिलने की प्रबल संभावना है।

NDA की महाबैठक और BJP के हाथ में कमान

नीतीश कुमार के पद छोड़ने के बाद एनडीए (NDA) के विधायक दल की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई जाएगी। इस निर्णायक बैठक में तय किया जाएगा कि प्रदेश की कमान किसके हाथों में होगी। सूत्रों का दावा है कि इस बार सत्ता का केंद्र पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर झुक सकता है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बार मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री दोनों ही पदों पर नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, आधिकारिक घोषणा होने तक सस्पेंस बरकरार है, लेकिन गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन अब बीजेपी के पक्ष में नजर आ रहा है।

दिल्ली में हाई-प्रोफाइल बैठकें

9 अप्रैल को दिल्ली में जनता दल यूनाइटेड (JDU) की एक अति-महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक में ललन सिंह और संजय झा जैसे दिग्गज नेता शामिल होंगे। माना जा रहा है कि यहीं पर सत्ता हस्तांतरण की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके उपरांत, नीतीश कुमार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात होने की भी संभावना है। दिल्ली के इन दौरों से यह स्पष्ट है कि बिहार की नई बिसात के मोहरे राष्ट्रीय नेतृत्व की सहमति से ही तय किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री पद की रेस और भविष्य की चुनौतियां

राज्य का अगला मुखिया कौन होगा, यह सवाल हर बिहारी की जुबां पर है। विजय चौधरी ने नामों के खुलासे से बचते हुए कहा कि चर्चा में शामिल सभी नेता इस मुख्यमंत्री की दौड़ में बने हुए हैं। बीजेपी के भीतर कई अनुभवी चेहरों पर विचार किया जा रहा है जो 2025 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का नेतृत्व कर सकें। बदलाव निश्चित है, लेकिन जातीय समीकरणों और विकास के एजेंडे को साधते हुए नए नेता का चुनाव करना एनडीए के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।