Bihar Politics: बिहार की राजनीति एक बहुत ही महत्वपूर्ण और बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ी है। सूबे के लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार आगामी 10 अप्रैल 2026 को संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण करने जा रहे हैं। इस कदम को राज्य की सियासत में एक सकारात्मक मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने रविवार को समाचार एजेंसी से खास बातचीत में इस खबर की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि इस शपथ ग्रहण समारोह के बाद एनडीए (NDA) का शीर्ष केंद्रीय नेतृत्व और खुद नीतीश कुमार बैठकर भविष्य की रणनीति की रूपरेखा तैयार करेंगे।
बिहार में सत्ता परिवर्तन
बताते चले कि, नीतीश कुमार के दिल्ली रवाना होने और उच्च सदन की सदस्यता लेने की खबर के साथ ही बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर हलचल तेज हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि राज्य में नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर चल रही लंबी चर्चाओं पर बहुत जल्द विराम लग जाएगा। राजनीतिक गलियारों में इस वक्त कई दिग्गज चेहरों के नामों पर मंथन का दौर जारी है, लेकिन जानकारों का मानना है कि अब असली फैसले की घड़ी बेहद करीब आ चुकी है। आने वाले चंद दिनों में राज्य को एक नया सियासी नेतृत्व मिल सकता है, जिससे बिहार के शासन-प्रशासन में और अधिक तेजी तथा स्पष्टता आने की पूरी उम्मीद है।
‘सुशासन बाबू’ के फैसले ने सबको चौंकाया
याद दिला दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साल 2005 में पहली बार बिहार की कमान पूरी मजबूती से संभाली थी। तब से लेकर अब तक (बीच के कुछ महीनों को छोड़ दिया जाए) वे लगातार सूबे के मुख्यमंत्री पद पर बने हुए हैं। उनके इस लंबे कार्यकाल में बिहार ने विकास के कई नए आयाम छुए। ऐसे में जब राज्यसभा चुनाव का समय आया, तो उन्होंने अचानक बिहार की सक्रिय सत्ता छोड़कर दिल्ली जाने (उच्च सदन में जाने) का फैसला कर हर किसी को हैरान कर दिया। आज भी जनता और उनके करीबी नेताओं द्वारा लगातार उनसे इस बड़े फैसले पर पुनर्विचार करने की भावुक अपील की जा रही है।
बिहार से चुने गए पांच दिग्गज नेता
भले ही भावुक अपीलें जारी हों, लेकिन नीतीश कुमार अब आधिकारिक तौर पर राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित हो चुके हैं। यही वजह है कि अब सभी की निगाहें 10 अप्रैल को होने वाले उनके शपथ ग्रहण पर टिकी हैं। बिहार से इस बार उनके साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, रालोमो के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और शिवेश कुमार भी उच्च सदन के लिए निर्वाचित हुए हैं।
भाजपा के सीएम पद और निशांत कुमार की चर्चाएं तेज
संख्या बल और मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए अब यह कयास जोरों पर हैं कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी (BJP) कोटे से हो सकता है। हालांकि, कमान पूरी तरह ट्रांसफर होने से पहले जनता दल यूनाइटेड (JDU) के अंदर से भी एक अलग सुर सुनाई दे रहा है। जदयू के कई स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मांग उठाई है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विरासत को आगे बढ़ाते हुए राज्य की कमान उनके पुत्र निशांत कुमार के हाथों में सौंप दी जाए। इस मांग के समर्थन में बिहार के विभिन्न चौराहों पर पोस्टर भी लगाए जा रहे हैं, जिसने सियासी तापमान को और बढ़ा दिया है।










