Bihar Industrial Investment Policy: अगर 30 दिन में नहीं मिली मंजूरी तो… बिहार सरकार ने निवेशकों के लिए कर दिया बड़ा खेल

बिहार में उद्योगों को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन अधिनियम 2016 के तहत अब SIPB सचिवालय को मुख्य नोडल एजेंसी बनाया गया है, जो मात्र 30 दिनों के भीतर आवेदनों पर 'स्वतः मंजूरी' प्रदान कर व्यापार प्रक्रिया को बेहद आसान बनाएगी।

Bihar Industrial Investment Policy

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 9, 2026

Bihar Industrial Investment Policy: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में बिहार में औद्योगिक विकास को रफ्तार देने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। राज्य सरकार ने ‘बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन अधिनियम 2016’ के तहत राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद (SIPB) सचिवालय को निवेश से जुड़े मामलों की मुख्य नोडल एजेंसी बनाने की मंजूरी दे दी है। सरकार का मुख्य उद्देश्य उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक सरल, त्वरित और पारदर्शी बनाना है, जिससे राज्य में पूंजी निवेश बढ़े और आर्थिक प्रगति को नई दिशा मिले।

नए व्यापारिक निवेश के लिए अब नहीं करना होगा बेवजह इंतजार

बताते चले कि, मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का प्रयास है कि बिहार में उद्योग लगाने के इच्छुक उद्यमियों को किसी भी प्रकार की अनावश्यक प्रशासनिक लेत-लतीफी का सामना न करना पड़े। निवेशकों को समय पर सभी आवश्यक स्वीकृतियां मिल सकें, इसके लिए एक नई जवाबदेह व्यवस्था लागू की जा रही है। इस नई व्यवस्था के अंतर्गत, SIPB सचिवालय किसी भी निवेश प्रस्ताव की गहन जांच और सिफारिश करने के बाद संबंधित विभाग को भेजेगा, जिसे तय समय-सीमा के भीतर अपनी मंजूरी देनी होगी। इसके लिए अधिकतम 30 दिनों की समय-सीमा अनिवार्य कर दी गई है।

तय समय-सीमा में सरकारी मंजूरी न मिलने पर मिलेगी ‘स्वतः स्वीकृति’

औद्योगिक परियोजनाओं को गति देने और निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए सरकार ने एक बेहद क्रांतिकारी नियम लागू किया है। यदि कोई संबंधित विभाग या सक्षम अधिकारी निर्धारित समयावधि के भीतर आवेदन पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लेता है, तो SIPB सचिवालय के पास खुद ही मंजूरी (Deemed Approval) जारी करने का अधिकार होगा। इस सचिवालय द्वारा दी गई इस विशेष मंजूरी को सभी संबंधित विभागों को अनिवार्य रूप से मानना होगा और इसके बाद किसी भी विभाग के पास उस फैसले को रोकने या पलटने का अधिकार नहीं रहेगा।

सिंगल विंडो सिस्टम के तहत एक ही छत के नीचे होगा सारा काम

प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के लिए सरकार ने निर्णय लिया है कि उद्योगों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारियों को सीधे SIPB सचिवालय में ही तैनात किया जाएगा। इस कदम से निवेशकों को अलग-अलग सरकारी दफ्तरों और विभागों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी। ये सभी तैनात अधिकारी औद्योगिक विकास आयुक्त (Industrial Development Commissioner) की प्रत्यक्ष निगरानी में कार्य करेंगे, जिससे निवेश से जुड़े मामलों पर त्वरित निर्णय लिए जा सकेंगे और फैक्ट्रियां स्थापित करने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

नई फैक्ट्रियों की स्थापना के लिए बनेंगे पारदर्शी नियम

मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों की स्थापना, उनके सुचारू संचालन और विस्तार से जुड़ी सभी आवश्यक मंजूरियों के लिए पूरी तरह से स्पष्ट दिशा-निर्देश और नियम विकसित किए जाएंगे। इन नए नियमों के धरातल पर उतरने से पूरी निवेश प्रणाली अत्यधिक पारदर्शी हो जाएगी। इसके साथ ही, संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी, जिससे निवेशकों को पहले से ही यह स्पष्ट रूप से पता रहेगा कि उनके किस कार्य को पूरा होने में कितना समय लगेगा।

आर्थिक प्रगति और युवाओं के रोजगार को मिलेगी अभूतपूर्व रफ्तार

सरकार का मानना है कि उद्योगों का व्यापक विस्तार ही बिहार की आर्थिक उन्नति का सबसे मजबूत स्तंभ है। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर युवाओं को रोजगार के भरपूर अवसर मिलेंगे, बल्कि व्यापार का दायरा बढ़ेगा और राज्य की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का विजन बिहार को देश और विदेश के उद्यमियों के लिए एक सुरक्षित, भरोसेमंद और पसंदीदा निवेश केंद्र (Investment Hub) के रूप में स्थापित करना है, ताकि राज्य के विकास की गति को तेज किया जा सके।