BRICS सांस्कृतिक महाआयोजन की मेजबानी करेगा भोपाल, प्रशासन ने शुरू की व्यापक तैयारियां

भोपाल. राजधानी में पांच से आठ अगस्त तक आयोजित होने वाली तृतीय ब्रिक्स कल्चर वर्किंग ग्रुप (सीडब्ल्यूजी) और ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने गुरुवार को संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा कर सभी व्यवस्थाएं समय-सीमा में, उच्च गुणवत्ता और बेहतर समन्वय के साथ पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन को लेकर प्रशासन पूरी सक्रियता से तैयारियों में जुटा है। सुरक्षा, परिवहन और आवास व्यवस्था पर विशेष जोर कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने सुरक्षा, परिवहन, आवास, आतिथ्य, स्वच्छता, आयोजन स्थल की व्यवस्थाओं और विभागीय समन्वय की समीक्षा

Wrriten By :

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Published On :

जुलाई 17, 2026

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भोपाल.

राजधानी में पांच से आठ अगस्त तक आयोजित होने वाली तृतीय ब्रिक्स कल्चर वर्किंग ग्रुप (सीडब्ल्यूजी) और ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने गुरुवार को संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा कर सभी व्यवस्थाएं समय-सीमा में, उच्च गुणवत्ता और बेहतर समन्वय के साथ पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन को लेकर प्रशासन पूरी सक्रियता से तैयारियों में जुटा है।

सुरक्षा, परिवहन और आवास व्यवस्था पर विशेष जोर
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने सुरक्षा, परिवहन, आवास, आतिथ्य, स्वच्छता, आयोजन स्थल की व्यवस्थाओं और विभागीय समन्वय की समीक्षा करते हुए कहा कि यह आयोजन भोपाल और मध्यप्रदेश के लिए गौरव का अवसर है। उन्होंने सभी विभागों को जिम्मेदारियों का प्रभावी निर्वहन करने और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए, ताकि देश-विदेश से आने वाले प्रतिनिधियों को उत्कृष्ट सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

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पांच से आठ अगस्त तक होंगे विभिन्न आयोजन
कार्यक्रम के तहत पांच से छह अगस्त को तृतीय ब्रिक्स कल्चर वर्किंग ग्रुप की बैठक, छह से सात अगस्त को ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव और सात से आठ अगस्त को ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक आयोजित होगी।

इन महत्वपूर्ण विषयों पर होगी चर्चा
बैठकों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) और रचनात्मक अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी तथा जलवायु परिवर्तन और संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा होगी। साथ ही कलाकारों के कापीराइट संरक्षण, बौद्धिक संपदा अधिकारों, औपनिवेशिक काल में विदेश ले जाई गई सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी और पर्यावरण संरक्षण में पारंपरिक ज्ञान की भूमिका पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य आयोजन को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सफल और यादगार बनाना है।

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