Bharat Bandh: आज गुरुवार को देश के विभिन्न कोनों में ‘भारत बंद’ का व्यापक असर देखने को मिल सकता है। प्रमुख मजदूर और किसान संगठनों द्वारा बुलाए गए इस राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन के कारण सरकारी कार्यालयों, बैंकों और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के पटरी से उतरने की आशंका जताई जा रही है।
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10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मोर्चा और संगठनों की लामबंदी
बताते चले कि, इस बड़े आंदोलन का नेतृत्व 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का एक संयुक्त मंच कर रहा है। इसमें इनटक (INTUC), एआईटीयूसी (AITUC), सीटू (CITU) और एचएमएस (HMS) जैसे दिग्गज संगठन कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। इन संगठनों की एकजुटता ने इस बंद को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत आधार प्रदान किया है, जिससे कई राज्यों में प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होने के आसार हैं।
चार नए लेबर कोड्स का विरोध और श्रमिक अधिकारों का हनन
आपको बता दे कि, मजदूर संगठनों के इस कड़े रुख के पीछे मुख्य वजह केंद्र सरकार द्वारा पिछले साल लागू किए गए चार नए श्रम कानून (Labour Codes) हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ये नए नियम श्रमिकों के कानूनी अधिकारों को कमजोर करते हैं। मजदूरों का मानना है कि इन संशोधनों के बाद निजी कंपनियों को कर्मचारियों की ‘हायर एंड फायर’ (जब चाहें भर्ती करना और जब चाहें निकालना) की खुली छूट मिल गई है, जिससे औद्योगिक क्षेत्र में अस्थिरता पैदा होगी।
जॉब सिक्योरिटी पर खतरा और मनरेगा बहाली की प्रमुख मांगें
श्रमिक संगठनों ने अपनी चिंताओं को स्पष्ट करते हुए कहा है कि नए कानूनों से नौकरी की सुरक्षा (Job Security) पूरी तरह समाप्त हो गई है। निजीकरण की बढ़ती रफ्तार ने सामाजिक सुरक्षा के ढांचे को भी चोट पहुंचाई है। इसके अलावा, आंदोलनकारी संगठन ड्राफ्ट सीड बिल, बिजली संशोधन विधेयक और शांति बिल जैसे विवादित प्रस्तावों को तुरंत वापस लेने की मांग कर रहे हैं। साथ ही, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए मनरेगा (MGNREGA) को प्रभावी ढंग से फिर से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है।
बैंक यूनियनों का हड़ताल को समर्थन और वित्तीय सेवाओं में बाधा
इस बंद का सबसे ज्यादा असर वित्तीय क्षेत्र, विशेषकर सरकारी बैंकों पर देखने को मिल सकता है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने किसी आधिकारिक छुट्टी का ऐलान नहीं किया है, लेकिन ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉयी एसोसिएशन सहित कई बड़ी बैंक यूनियनों ने हड़ताल का पूर्ण समर्थन किया है। इसके चलते बैंकों में चेक क्लीयरेंस, नकद निकासी और जमा जैसे महत्वपूर्ण कार्य ठप पड़ सकते हैं। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई (SBI) ने भी स्वीकार किया है कि इस विरोध प्रदर्शन का असर उनके दैनिक कामकाज पर पड़ सकता है।
डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से ग्राहकों को मिलेगी राहत
जहां एक ओर बैंक शाखाओं में ताले लटके रह सकते हैं, वहीं दूसरी ओर डिजिटल माध्यम ग्राहकों के लिए सहारा बनेंगे। ऑनलाइन बैंकिंग, नेट बैंकिंग और एटीएम (ATM) सेवाएं सामान्य रूप से काम करती रहेंगी। निजी क्षेत्र के बैंकों (Private Banks) ने इस हड़ताल से दूरी बनाई है, जिससे वहां कामकाज प्रभावित नहीं होगा। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसी भी वित्तीय आपात स्थिति के लिए ग्राहक आज डिजिटल प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करें।









