भाई दूज 4 या 5 मार्च को? भ्रम दूर करें—जानें सही तारीख, तिलक का शुभ समय और पूजा विधि

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, साल में दो बार भाई दूज का पर्व मनाया जाता है और हर का अपना-अपना महत्व है। पहला भाई दूज चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि और दूसरा कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को पड़ने वाले भाई दूज को भ्रातृ द्वितीया भी कहा जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाने के साथ सुख-समृद्धि, उज्जवल भविष्य और लंबी आयु की कामना करती हैं। इस साल द्वितीया तिथि दो दिन होने के कारण भाई दूज की सही तिथि को लेकर काफी असमंजस

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Published On :

मार्च 4, 2026

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हिंदू कैलेंडर के अनुसार, साल में दो बार भाई दूज का पर्व मनाया जाता है और हर का अपना-अपना महत्व है। पहला भाई दूज चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि और दूसरा कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को पड़ने वाले भाई दूज को भ्रातृ द्वितीया भी कहा जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाने के साथ सुख-समृद्धि, उज्जवल भविष्य और लंबी आयु की कामना करती हैं। इस साल द्वितीया तिथि दो दिन होने के कारण भाई दूज की सही तिथि को लेकर काफी असमंजस स्थिति बनी हुई है। जानें होली भाई दूज की सही तिथि, तिलक लगाने का सही समय से लेकर विधि तक….

कब है होली भाई दूज 2026?
चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि आरंभ- 4 मार्च को शाम 4 बजकर 48 मिनट से
चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि समाप्त- 5 मार्च को शाम 05:03 बजे
होली भाई दूज 2026 तिथि– 5 मार्च 2026, गुरुवार

होली भाई दूज 2026 भाई को तिलक करने का मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि सुबह से लेकर शाम 5:03 तक है। इस दौरान बहनें भाई को तिलक लगा सकती है। लेकिन राहुकाल का अवश्य ध्यान रखें।

होली भाई दूज 2026 राहुकाल का समय
द्रिक पंचांग के अनुसार, दोपहर 2:05 से दोपहर 3:33 तक राहुकाल है।

होली भाई दूज का चौघड़ियां मुहूर्त
शुभ – उत्तम- 06:42 ए एम से 08:10 ए एम
लाभ – उन्नति- 12:33 पी एम से 02:00 पी एम
अमृत – सर्वोत्तम- 02:00 पी एम से 03:28 पी एम
शुभ-उत्तम- 04:56 पी एम से 06:23

होली भाई दूज पर बहनें ऐसे करें तिलक
द्वितीया तिथि को शुभ मुहूर्त पर एक थाली में सिंदूर, चंदन, अक्षत, मिठाई, गुझिया और घी का दीपक रख लें। इसके बाद भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने के बाद भाई को एक लकड़ी की चौकी या फिर ऊंचेे स्थान में बैठाएं। इसके बाद उसके सिर पर कपड़ा या रुमाल रखें। फिर माथे पर तिलक और अक्षत लगाएं और मिठाई खिलाएं। फिर घी के दीपक से उसकी आरती उतार लें। अंत में भाई अपनी बहन के पैर छूकर सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद लें और कुछ उपहार दें।

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