Bhadohi Name Change: यूपी का भदोही जिला एक फिर से अपने नाम को लेकर सुर्खियों में है. विश्व प्रसिद्ध कालीन नगरी के तौर पर पहचान रखने वाले इस जिले की पहचान पिछले लगभग 3 दशकों में कई बार बदली है. इस जिले का नाम कभी भदोही, कभी संत रविदास नगर और कभी दोनों नाम साथ जुड़े, लेकिन अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नए ऐलान के बाद एक बार फिर संत रविदास नगर नाम किए जाने की सार्वजनिक घोषणा कर दी है.
क्यों बार-बार बदला गया इस जिले का नाम?

आखिर क्यों बार-बार बदला गया इस जिले का नाम और क्या है इसके पीछे की पूरी सियासी कहानी? आइए जानते हैं….उत्तर प्रदेश के भदोही जिले की पहचान सिर्फ कालीन उद्योग तक सीमित नहीं है. पिछले करीब तीन दशकों में इस जिले के नाम को लेकर कई बार राजनीतिक और प्रशासनिक बदलाव हुए. साल1994 में अलग जिला बनने के बाद कभी ‘भदोही’, कभी ‘संत रविदास नगर’ और कभी दोनों नाम साथ इस्तेमाल किए गए. ऐसे में जानिए 1994 से 2026 तक जिले के नाम की पूरी कहानी.
1994 में वाराणसी से अलग होकर बना भदोही जिला

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, भदोही लंबे समय तक वाराणसी जिले का हिस्सा रहा. अलग जिला बनाने की मांग के बाद 30 जून 1994 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की सरकार ने भदोही को वाराणसी से अलग कर नया जनपद बनाया. नए जिले की पहचान भदोही नाम से हुई। कालीन उद्योग के कारण पहले से ही देश-दुनिया में चर्चित इस क्षेत्र को अलग जिला बनने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी नई पहचान मिली.
1997 में आया संत रविदास नगर नाम

बताते चले कि, उत्तर प्रदेश की राजनीति में बदलाव के साथ जिले के नाम में भी बड़ा परिवर्तन हुआ। 4 दिसंबर 1997 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की सरकार ने भदोही का नाम बदलकर संत रविदास नगर कर दिया। इसके बाद जिले का आधिकारिक नाम संत रविदास नगर के रूप में इस्तेमाल होने लगा। यह बदलाव संत रविदास की विरासत और सामाजिक संदेश से जोड़कर देखा गया।
1999 में संत रविदास नगर के साथ जुड़ा भदोही

नाम को लेकर बदलाव यहीं नहीं रुका। 12 नवंबर 1999 को तत्कालीन मुख्यमंत्री रामप्रकाश गुप्ता की भाजपा सरकार में जिले का नाम ‘संत रविदास नगर भदोही’ किया गया। यानी संत रविदास नगर नाम को बरकरार रखते हुए भदोही को भी नाम का हिस्सा बनाया गया। उपलब्ध रिपोर्टों में इस बदलाव को कालीन कारोबार और निर्यात से जुड़े लोगों की मांग से भी जोड़ा गया है।
2014 में अखिलेश सरकार ने फिर किया भदोही
समाजवादी पार्टी की सरकार आने के बाद एक बार फिर जिले के पुराने नाम की वापसी हुई। 6 दिसंबर 2014 को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में संत रविदास नगर का नाम बदलकर भदोही करने का फैसला लिया गया। सरकारी स्तर पर इस निर्णय को जिला मजिस्ट्रेट की सिफारिश से भी जोड़ा गया। इस फैसले पर मायावती ने आपत्ति जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि सपा सरकार ने संत रविदास नगर का नाम हटाकर संत रविदास का अपमान किया। हालांकि यह उस समय मायावती की राजनीतिक प्रतिक्रिया थी।
2026 में फिर लौटा संत रविदास नगर का मुद्दा
अब करीब 12 साल बाद एक बार फिर जिले के नाम को लेकर बड़ा राजनीतिक ऐलान हुआ है। 29 जुलाई 2026 को वाराणसी में संत रविदास की 650वीं जयंती से जुड़े कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की कि भदोही को फिर संत रविदास नगर के नाम से जाना जाएगा। सीएम योगी ने 2014 में जिले का नाम बदले जाने का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब एक बार फिर भदोही के नाम को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
अखिलेश यादव की प्रक्रिया आई सामने
मुख्यमंत्री योगी की घोषणा पर सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भदोही का नाम बदलकर संत रविदास के नाम पर रखना अच्छी बात है, लेकिन सिर्फ नाम बदलने से बात पूरी नहीं होती। संत रविदास के विचारों को पढ़ने और उन्हें जीवन में अपनाने की जरूरत है। अखिलेश ने सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए।
मायावती ने योगी सरकार की घोषणा का किया स्वागत
वहीं, बसपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने योगी सरकार की घोषणा का स्वागत किया। उन्होंने संत रविदास नगर नाम की बहाली को संत रविदास के अनुयायियों और बहुजन समाज की भावनाओं के सम्मान से जोड़ा। साथ ही उन्होंने 2014 में अखिलेश यादव सरकार द्वारा नाम बदलकर भदोही किए जाने का मुद्दा भी उठाया।
रविदास नगर की प्रस्तावित वापसी का ऐलान
भदोही के नाम का सफर देखें तो 1994 में भदोही, 1997 में संत रविदास नगर, 1999 में संत रविदास नगर भदोही, 2014 में फिर भदोही और अब 2026 में संत रविदास नगर की प्रस्तावित वापसी का ऐलान हुआ है। यानी करीब तीन दशक में जिले का नाम कई बार राजनीतिक सत्ता परिवर्तन के साथ बदला।
भदोही नाम बदलने की पूरी टाइमलाइन

- 1994 — मुलायम सिंह यादव सरकार में भदोही अलग जिला बना
- 1997 — मायावती सरकार में नाम संत रविदास नगर हुआ
- 1999 — रामप्रकाश गुप्ता सरकार में ‘संत रविदास नगर भदोही’ नाम हुआ
- 2014 — अखिलेश यादव सरकार में फिर नाम भदोही हुआ
- 2026 — योगी आदित्यनाथ ने संत रविदास नगर नाम बहाल करने की घोषणा की
नाम बदलने की प्रशासनिक प्रक्रिया कब और कैसे पूरी होगी?
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि भदोही से संत रविदास नगर नाम बदलने की प्रशासनिक प्रक्रिया कब और कैसे पूरी होगी? घोषणा के बाद सरकारी स्तर पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नाम परिवर्तन औपचारिक रूप से लागू होगा। ऐसे में आने वाले दिनों में इस जिले का नाम एक बार फिर उत्तर प्रदेश की सियासत में बड़ा मुद्दा बन सकता है।










