Bangladesh News: बांग्लादेश के प्रधानमंत्री बने तारिक रहमान, चीन ने बढ़ाया दोस्ती का हाथ, भारत की बढ़ी चिंता

बांग्लादेश में दशकों बाद 'बेगमों की जंग' खत्म हुई और तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाल ली है। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद चीन ने अरबों डॉलर के निवेश का न्योता दिया, जिसने भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। क्या तारिक रहमान 'पड़ोसी प्रथम' नीति को ठेंगा दिखाकर चीन का हाथ थामेंगे?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 18, 2026

Bangladesh News : बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति की बिसात पर नई चालें चली जाने लगी हैं। तारिक रहमान के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद चीन ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने मंगलवार को एक आधिकारिक संदेश भेजकर तारिक रहमान को जीत की बधाई दी। यह संदेश केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि बीजिंग, ढाका के साथ अपने संबंधों को एक नई और अधिक रणनीतिक दिशा में ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है। चीनी नेतृत्व ने नई सरकार को पूर्ण समर्थन का भरोसा दिलाया है।

बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) पर जोर: बुनियादी ढांचे और निवेश में साझेदारी

चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि बीजिंग, ढाका के साथ मिलकर ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) के तहत सहयोग को और अधिक मजबूती प्रदान करना चाहता है। चीन ने उच्च गुणवत्ता वाले बुनियादी ढांचे, व्यापार, निवेश और तकनीकी क्षेत्रों में बांग्लादेश का प्रमुख साझेदार बनने की प्रतिबद्धता जताई है। ली कियांग का मानना है कि इन साझा प्रयासों से न केवल द्विपक्षीय संबंधों को एक नया स्तर मिलेगा, बल्कि दोनों देशों के नागरिकों को आर्थिक रूप से ठोस लाभ भी प्राप्त होगा।

चीन-बांग्लादेश रणनीतिक साझेदारी: आपसी सम्मान और पारंपरिक मित्रता

चीन ने बांग्लादेश को अपना एक “व्यापक रणनीतिक सहकारी साझेदार” बताया है। चीनी मीडिया और सरकार ने रेखांकित किया कि दोनों देशों के बीच आपसी सम्मान और ‘विन-विन’ (Win-Win) सहयोग का एक लंबा और सफल इतिहास रहा है। ली कियांग के अनुसार, नई बांग्लादेशी सरकार के सुचारू प्रशासन का समर्थन करना चीन की प्राथमिकता है। बीजिंग का यह रुख दर्शाता है कि वह दक्षिण एशिया में अपने प्रभाव को और अधिक विस्तारित करने के लिए बांग्लादेश को एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देख रहा है।

तारिक रहमान की विदेश नीति: “राष्ट्रीय हित सर्वोपरि” का मंत्र

12 फरवरी को हुए 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की शानदार जीत के बाद, प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने अपनी विदेश नीति के मुख्य स्तंभों को स्पष्ट किया है। अपने पहले आधिकारिक बयान में उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की विदेश नीति का एकमात्र आधार ‘राष्ट्रीय हित’ होगा। रहमान ने जोर देकर कहा कि बांग्लादेश और उसके नागरिकों के हित ही यह तय करेंगे कि देश का झुकाव किस ओर होगा। उनके इस बयान को रणनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि इसमें चीन के लिए स्पष्ट सकारात्मक संकेत छिपे हैं।

मोहम्मद यूनुस की विरासत: चीन और पाकिस्तान की ओर बढ़ता झुकाव

तारिक रहमान से पहले, अगस्त 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद सत्ता संभालने वाली मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने स्पष्ट रूप से चीन और पाकिस्तान के प्रति अपना नरम रुख प्रदर्शित किया था। उस दौरान बांग्लादेश की विदेश नीति में आए इस बदलाव ने भारत के साथ ढाका के पारंपरिक संबंधों में खटास पैदा कर दी थी। चीन ने उस समय का लाभ उठाते हुए बांग्लादेश के विकास कार्यों में अपनी पैठ गहरी की थी। अब रहमान सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह इस विरासत को आगे बढ़ाती है या अपनी नई राह चुनती है।

क्षेत्रीय राजनीति पर असर: भारत, चीन और पाकिस्तान के बीच का संतुलन

दक्षिण एशिया की भू-राजनीति के लिए तारिक रहमान सरकार का अगला कदम बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। एक तरफ चीन भारी निवेश और BRI परियोजनाओं के जरिए बांग्लादेश को अपने पाले में करने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ भारत के साथ बांग्लादेश के ऐतिहासिक और भौगोलिक संबंध हैं। पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकी भी इस समीकरण को जटिल बना रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रहमान सरकार चीन की ओर अधिक झुकती है, तो क्षेत्र में शक्ति संतुलन बिगड़ सकता है, जिसका सीधा असर भारत की सुरक्षा और कूटनीति पर पड़ेगा।

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