Bangladesh Elections: बांग्लादेश में लोकतंत्र की अग्निपरीक्षा! आज मतदान और जनमत संग्रह, जानें क्या है ‘जुलाई चार्टर’

तख्तापलट के 18 महीने बाद आज बांग्लादेश में ऐतिहासिक मतदान हो रहा है। अवामी लीग पर प्रतिबंध के बीच मुख्य मुकाबला तारीक रहमान (BNP) और शफीकुर रहमान (जमात-गठबंधन) के बीच है। 44% युवा मतदाताओं की भूमिका और संवैधानिक सुधारों पर होने वाला जनमत संग्रह इस चुनाव को बेहद खास बना रहा है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

फ़रवरी 12, 2026

Bangladesh Elections: बांग्लादेश के इतिहास में आज का दिन (12 फरवरी, 2026) बेहद ऐतिहासिक है। शेख हसीना के तख्तापलट के बाद देश अपने पहले आम चुनाव का गवाह बन रहा है। इस बार मुकाबला सत्ता के पुराने चेहरों के बीच नहीं, बल्कि ‘दो रहमान’ और नई राजनीतिक विचारधाराओं के बीच सिमटा हुआ है।

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12.76 करोड़ मतदाता लिखेंगे बांग्लादेश का नया भविष्य

बताते चले कि, बांग्लादेश में गुरुवार सुबह 7:30 बजे से मतदान की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। निर्वाचन आयोग के अनुसार, देश के कुल 12,76,12,384 मतदाता 300 संसदीय सीटों पर अपने प्रतिनिधियों का चयन कर रहे हैं। इस बार बैलेट पेपर के जरिए चुनाव कराए जा रहे हैं और शाम 4:30 बजे मतदान खत्म होते ही वोटों की गिनती शुरू हो जाएगी। खास बात यह है कि इस चुनाव में विदेश में रहने वाले प्रवासियों को भी पोस्टल बैलेट के जरिए शामिल किया गया है, जिसके लिए 8 लाख से अधिक मतपत्र जारी किए गए हैं।

‘जुलाई चार्टर’ पर जनता की मुहर का इंतजार

आपको बता दे कि, संसदीय चुनाव के साथ-साथ आज बांग्लादेशी नागरिक एक महत्वपूर्ण जनमत संग्रह (Referendum) में भी भाग ले रहे हैं। मतदाताओं को ‘जुलाई चार्टर’ के संवैधानिक सुधारों पर ‘हां’ या ‘नहीं’ में अपना जवाब देना है। यदि बहुमत सुधारों के पक्ष में रहता है, तो नई सरकार को प्रधानमंत्री के कार्यकाल को 10 साल तक सीमित करने और द्विसदनीय संसद (Bicameralism) जैसे बड़े कानूनी बदलाव लागू करने होंगे। यह जनमत संग्रह देश में भविष्य की निरंकुशता को रोकने की एक बड़ी कोशिश माना जा रहा है।

44% युवा मतदाता बनेंगे किंगमेकर

इस बार के चुनाव में सबसे निर्णायक भूमिका युवा मतदाताओं (Gen Z Voters) की है। 18 से 37 वर्ष की आयु के लगभग 56 मिलियन मतदाता हैं, जो कुल वोट बैंक का करीब 44 फीसदी हिस्सा हैं। चूंकि 2024 का तख्तापलट छात्र आंदोलनों की ही उपज था, इसलिए पहली बार मतदान करने वाले 4.57 मिलियन युवाओं का रुझान जिस भी गठबंधन की ओर होगा, सत्ता की चाबी उसी के पास जाएगी। लिंग अनुपात की बात करें तो पुरुष (6.47 करोड़) और महिला (6.28 करोड़) मतदाताओं के बीच का अंतर काफी कम है, जो संतुलित जनभागीदारी को दर्शाता है।

अवामी लीग पर प्रतिबंध और मुख्य सियासी गठबंधन

शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव लड़ने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। ऐसे में चुनावी मैदान में तीन मुख्य ताकतें उभरी हैं—बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP), जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP)। जमात-ए-इस्लामी और NCP ने 11 दलों का एक मजबूत गठबंधन बनाया है। 300 सीटों वाली संसद में बहुमत के लिए 151 का जादुई आंकड़ा जरूरी है। इसके अतिरिक्त, महिलाओं के लिए 50 आरक्षित सीटें हैं, जिन्हें चुनाव के बाद पार्टियों के वोट शेयर के आधार पर आवंटित किया जाएगा।

तारिक रहमान बनाम शफीकुर रहमान

बांग्लादेश की राजनीति जो कभी ‘दो बेगमों’ (खालिदा जिया और शेख हसीना) के इर्द-गिर्द घूमती थी, अब ‘दो रहमान’ के बीच सिमट गई है। एक तरफ BNP की ओर से तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं, जो 17 साल के निर्वासन के बाद लौटे हैं। दूसरी तरफ जमात-ए-इस्लामी गठबंधन के शफीकुर रहमान उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं। दोनों नेताओं ने भ्रष्टाचार मुक्त शासन और आर्थिक सुधारों का वादा किया है, लेकिन कट्टरपंथी बनाम उदारवादी विचारधारा की यह जंग आज मतपेटियों में कैद हो जाएगी।

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