Bangladesh General Election 2026: 12 फरवरी को बदलेगा बांग्लादेश का भाग्य, मोहम्मद यूनुस ने किया सत्ता छोड़ने का ऐलान

अगस्त 2024 की क्रांति के बाद, बांग्लादेश कल अपनी सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा से गुजरने वाला है। 12 फरवरी को 127 मिलियन मतदाता न केवल नई सरकार चुनेंगे, बल्कि 'जुलाई चार्टर' पर जनमत संग्रह भी करेंगे। मोहम्मद यूनुस ने स्पष्ट किया है कि वोटिंग के साथ ही उनके मिशन का अंत होगा। क्या बांग्लादेश फिर से अस्थिरता की ओर बढ़ेगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 11, 2026

Bangladesh General Election 2026: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने राष्ट्र के नाम एक अत्यंत महत्वपूर्ण संबोधन दिया है। देश में लंबे समय से जारी राजनीतिक अस्थिरता के बीच, उन्होंने जनता को स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया है कि लोकतंत्र की बहाली और एक चुनी हुई सरकार को सत्ता सौंपना उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यूनुस ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य केवल एक निष्पक्ष चुनाव आयोजित करना है, न कि सत्ता में बने रहना।

12 फरवरी: सत्ता हस्तांतरण की समयसीमा तय

अपने टेलीविजन संबोधन में मोहम्मद यूनुस ने घोषणा की कि 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनावों के तुरंत बाद सत्ता का हस्तांतरण कर दिया जाएगा। उन्होंने उन सभी अफवाहों और आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें यह कहा जा रहा था कि अंतरिम सरकार सत्ता छोड़ने में देरी कर सकती है। यूनुस ने बड़े गर्व के साथ कहा कि नई सरकार के कार्यभार संभालते ही उनकी टीम अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाएगी और सामान्य जीवन में लौट आएगी।

निर्णायक मतदान और ऐतिहासिक जनमत संग्रह

आगामी 12 फरवरी का दिन बांग्लादेश के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने वाला है। मुख्य सलाहकार ने इसे देश के भविष्य के लिए एक “ऐतिहासिक क्षण” करार दिया है। इस चुनाव की खास बात यह है कि संसदीय मतदान के साथ-साथ एक विशेष जनमत संग्रह भी आयोजित किया जा रहा है। यह जनमत संग्रह ‘जुलाई चार्टर’ के क्रियान्वयन पर आधारित होगा, जो छात्र आंदोलन के दौरान उभरे सुधारों के एजेंडे को वैधानिक मान्यता देगा। यूनुस ने सभी नागरिकों से लोकतंत्र के इस उत्सव में निडर होकर भाग लेने की अपील की है।

सुरक्षा का अभूतपूर्व घेरा: सेना को मिले विशेष अधिकार

चुनाव को शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए पूरे बांग्लादेश में सुरक्षा के कड़े और व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सरकार ने चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी रोकने के लिए सशस्त्र बलों (सेना) को ‘मजिस्ट्रेटी अधिकार’ प्रदान किए हैं। इसका अर्थ है कि सेना अब मौके पर ही निर्णय लेने और उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई करने में सक्षम होगी। सभी राजनीतिक दलों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अपने समर्थकों को चुनावी हिंसा से दूर रखें, अन्यथा कानून की पूरी शक्ति का सामना करना होगा।

दुष्प्रचार और अफवाहों के खिलाफ कड़ी चेतावनी

मोहम्मद यूनुस ने देशवासियों को आगाह किया है कि कुछ असामाजिक तत्व और पुराने शासन के हितैषी चुनाव की प्रक्रिया को बाधित करने के लिए भ्रामक सूचनाएं फैला सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाएगी। उन्होंने जनता से आग्रह किया कि वे केवल आधिकारिक सूत्रों पर ही विश्वास करें और किसी भी ऐसी खबर को बढ़ावा न दें जिससे समाज का सांप्रदायिक या राजनीतिक सौहार्द बिगड़े।

क्रांति के बाद एक नए युग की शुरुआत

यह चुनाव अगस्त 2024 में शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के पतन के बाद होने वाला पहला लोकतांत्रिक अभ्यास है। गौरतलब है कि कोटा विरोधी छात्र आंदोलन ने एक विशाल जनक्रांति का रूप ले लिया था, जिसके परिणामस्वरूप 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर भारत में शरण लेनी पड़ी थी। तब से देश का कामकाज अंतरिम प्रशासन संभाल रहा है, जिसे अब एक चुनी हुई सरकार को सौंपने की तैयारी पूरी हो चुकी है।

प्रशासनिक निष्पक्षता और पारदर्शी प्रक्रिया

चुनाव आयोग को स्वतंत्र रूप से कार्य करने के लिए अंतरिम प्रशासन ने हर संभव संसाधन उपलब्ध कराए हैं। मोहम्मद यूनुस का मानना है कि केवल एक पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव ही बांग्लादेश के वैश्विक सम्मान को वापस ला सकता है। उन्होंने सरकारी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे बिना किसी राजनीतिक झुकाव के अपनी ड्यूटी निभाएं। 12 फरवरी का सूरज बांग्लादेश के लिए एक नई उम्मीद और स्थिरता की किरण लेकर आएगा।