Bangladesh Election 2026: जमात-ए-इस्लामी प्रमुख का विवादित बयान, कहा- ‘महिलाएं नहीं बन सकतीं पार्टी प्रमुख’

बांग्लादेश आम चुनाव 2026 से ठीक पहले जमात-ए-इस्लामी के अमीर शफीकुर रहमान ने एक इंटरव्यू में कहा कि महिलाएं उनकी पार्टी की प्रमुख नहीं बन सकतीं। उन्होंने जैविक कारणों का हवाला देते हुए इसे धर्म के खिलाफ बताया। क्या यह बयान बांग्लादेश की दशकों पुरानी महिला प्रधान राजनीति को चुनौती है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 31, 2026

Bangladesh Election 2026:  बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच, देश की सबसे बड़ी कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के अमीर (प्रमुख) शफीकुर रहमान ने एक इंटरव्यू में महिलाओं के नेतृत्व को लेकर विवादित टिप्पणी की है। अल-जजीरा को दिए गए साक्षात्कार में रहमान ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी में कभी भी कोई महिला शीर्ष पद पर नहीं बैठ सकती। उन्होंने इसके पीछे ‘धार्मिक जिम्मेदारियों’ और ‘जैविक सीमाओं’ का तर्क दिया। रहमान का कहना है कि नेतृत्व की भूमिकाएं ईश्वर द्वारा निर्धारित हैं और पुरुषों व महिलाओं के बीच कुछ ऐसे बुनियादी अंतर हैं जिन्हें बदला नहीं जा सकता।

‘अल्लाह की व्यवस्था’ का तर्क: नेतृत्व से महिलाओं की दूरी पर अड़े जमात प्रमुख

इंटरव्यू के दौरान जब शफीकुर रहमान से पूछा गया कि क्या भविष्य में कोई महिला जमात-ए-इस्लामी का नेतृत्व कर सकती है, तो उन्होंने इसे ‘असंभव’ करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि अल्लाह ने पुरुषों और महिलाओं को अलग-अलग भूमिकाओं के लिए बनाया है। रहमान ने विवादास्पद उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह पुरुष बच्चे पैदा नहीं कर सकते या स्तनपान नहीं करा सकते, उसी तरह महिलाएं पार्टी की कमान नहीं संभाल सकतीं। उन्होंने इसे ‘ईश्वर प्रदत्त व्यवस्था’ बताते हुए कहा कि जो प्रकृति ने तय कर दिया है, उसमें इंसान को बदलाव करने का कोई अधिकार नहीं है। उनके इस बयान की मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और महिला संगठनों ने कड़ी आलोचना की है।

चुनावी मैदान में महिलाओं की अनुपस्थिति: एक भी महिला उम्मीदवार नहीं उतारा

बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में जमात-ए-इस्लामी की ओर से इस बार एक भी महिला उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया गया है। जब इस पर सवाल उठा, तो रहमान ने इसे बांग्लादेश की ‘सांस्कृतिक संरचना’ और वर्तमान समय की मजबूरी बताया। उन्होंने दावा किया कि अन्य राजनीतिक दलों में भी महिलाओं की भागीदारी बहुत ज्यादा नहीं है, हालांकि जमात इस दिशा में धीरे-धीरे तैयारी कर रही है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि अवामी लीग पर प्रतिबंध लगने के बाद जमात-ए-इस्लामी अपनी कट्टरपंथी विचारधारा को और अधिक मजबूती से लागू करने की कोशिश कर रही है, जिसका सीधा असर महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पर पड़ रहा है।

बांग्लादेश का इतिहास और रहमान का पलटवार: “महिला पीएम का दौर व्यावहारिक नहीं”

इंटरव्यूअर ने जब रहमान को याद दिलाया कि बांग्लादेश में दशकों तक महिला प्रधानमंत्रियों (शेख हसीना और खालिदा जिया) का शासन रहा है, तो जमात प्रमुख ने इसे वैश्विक परिप्रेक्ष्य में खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया के अधिकांश देशों ने महिला नेतृत्व को व्यावहारिक नहीं माना है। हालांकि जमात-ए-इस्लामी अतीत में बीएनपी के साथ गठबंधन में रही है जब खालिदा जिया प्रधानमंत्री थीं, लेकिन रहमान ने अब उस पर स्पष्ट प्रतिक्रिया देने के बजाय इसे केवल एक राजनीतिक समझौता करार दिया। उनका यह रुख दर्शाता है कि पार्टी अब अपनी पुरानी कट्टरपंथी जड़ों की ओर लौट रही है।

12 फरवरी का चुनाव: अवामी लीग की अनुपस्थिति और बढ़ती अराजकता

आगामी 12 फरवरी के चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक और चुनौतीपूर्ण हैं। पहली बार देश की सबसे पुरानी पार्टी अवामी लीग चुनाव में हिस्सा नहीं ले रही है, क्योंकि यूनुस सरकार ने उसे प्रतिबंधित कर दिया है। इसके कारण मुकाबला अब मुख्य रूप से बीएनपी और जमात समर्थित गठबंधन के बीच सिमट गया है। यूरेशिया रिव्यू की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में बढ़ती कट्टरता और महिलाओं के प्रति असहिष्णुता के कारण इस बार महिला उम्मीदवार चुनाव लड़ने से कतरा रही हैं। हिंसा और डर के माहौल ने चुनावी उत्सव को चिंता में बदल दिया है।

बांग्लादेश के लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी?

शफीकुर रहमान के इस बयान ने बांग्लादेश के भविष्य के लोकतांत्रिक स्वरूप पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। एक ओर देश ‘जुलाई क्रांति’ के बाद सुधारों की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सबसे बड़ी संगठित राजनीतिक शक्ति महिलाओं को नेतृत्व के अयोग्य बता रही है। यदि 12 फरवरी के बाद ऐसी विचारधारा सत्ता के करीब पहुँचती है, तो बांग्लादेश में महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक स्वतंत्रता पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी बांग्लादेश के इन बदलते समीकरणों पर पैनी नजर बनाए हुए है।