Bangladesh Election 2026: दक्षिण एशिया की राजनीति में इस वक्त सबकी नजरें बांग्लादेश पर टिकी हैं। 12 फरवरी को होने वाले 13वें आम चुनाव की घोषणा ने देश का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। एक तरफ कड़ाके की ठंड और घना कोहरा है, तो दूसरी तरफ चुनावी रैलियों की तपिश। हाल ही में आए एक ओपिनियन पोल ने यह संकेत दे दिया है कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दिन अब गिनती के रह गए हैं और देश एक बड़े सत्ता परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है।
Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश चुनाव से अवामी लीग बाहर, अंतरिम सरकार के फैसले पर बढ़ा राजनीतिक टकराव
ओपिनियन पोल के चौंकाने वाले आंकड़े

‘एमिनेंस एसोसिएट्स फॉर सोशल डेवलपमेंट’ द्वारा कराए गए इस व्यापक सर्वे ने राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है। बांग्लादेश के सभी 300 संसदीय क्षेत्रों में 20,000 से अधिक मतदाताओं के बीच किए गए इस सर्वे के नतीजे बताते हैं कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी कर सकती है। इस सर्वे के मुताबिक करीब 70 प्रतिशत मतदाता BNP के पक्ष में हैं। जमात-ए-इस्लामी पार्टी को करीब 19 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिलता दिख रहा है।
NCP की विफलता: सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पिछले साल शेख हसीना सरकार के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन से निकली ‘नेशनल सिटिजन्स पार्टी’ (NCP) को मात्र 2.6 प्रतिशत वोट मिलते दिख रहे हैं। इससे साफ है कि सड़कों का आंदोलन चुनावी जीत की गारंटी नहीं होता।
तारिक रहमान की ताजपोशी
BNP के कार्यवाहक नेता तारिक रहमान के लिए यह समय संजीवनी जैसा है। ओपिनियन पोल के सकारात्मक रुझानों के बीच पार्टी उन्हें औपचारिक रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त करने की तैयारी में है। पार्टी महासचिव फखरुल इस्लाम आलमगीर ने इसके संकेत देते हुए कहा कि अगले एक-दो दिनों में इसकी घोषणा हो सकती है।
अपनी माँ खालिदा जिया की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, तारिक रहमान अपना चुनावी अभियान सिलहट से शुरू कर सकते हैं। राजनीतिक हलकों में सिलहट को चुनाव जीतने के लिए बेहद अच्छा माना जाता है, जहाँ से कभी खालिदा जिया भी अपनी रैलियों की शुरुआत किया करती थीं।
आवामी लीग के किले में बड़ी सेंध
शेख हसीना की पार्टी ‘आवामी लीग’ के लिए यह सर्वे किसी बड़े झटके से कम नहीं है। सर्वे के मुताबिक, आवामी लीग के पुराने और वफादार वोट बैंक में जबरदस्त बिखराव हुआ है। पुराने समर्थकों में से करीब 60 प्रतिशत अब खुलकर BNP का समर्थन कर रहे हैं। लगभग 20 प्रतिशत मतदाता अब जमात-ए-इस्लामी की विचारधारा की ओर झुक रहे हैं।
बदलाव की दहलीज पर बांग्लादेश
ओपिनियन पोल के ये आंकड़े बता रहे हैं कि बांग्लादेश की जनता अब स्थिरता और एक मजबूत राजनीतिक नेतृत्व चाहती है। जहाँ छात्र आंदोलन ने बदलाव की नींव रखी थी, वहीं अब चुनावी मैदान में पुरानी और अनुभवी पार्टियाँ ही बाजी मारती दिख रही हैं। अगर ये रुझान वास्तविक परिणामों में बदलते हैं, तो 12 फरवरी को बांग्लादेश की सत्ता की कमान एक बार फिर से BNP और तारिक रहमान के हाथों में आ जाएगी।










