Independence Day 2026: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर योग गुरु बाबा रामदेव ने देश में सरकारी नौकरियों, शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक माहौल को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने सरकारी भर्तियों में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अगर व्यवस्था में समय रहते सुधार नहीं किया गया तो आने वाले समय में देश में बड़े आंदोलन की स्थिति पैदा हो सकती है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन के नाम पर अराजकता को बढ़ावा देना उचित नहीं है।
सरकारी भर्तियों में भ्रष्टाचार का बाबा रामदेव ने लगाया आरोप
बाबा रामदेव ने सरकारी नौकरियों में होने वाली भर्ती प्रक्रिया, खासकर इंटरव्यू सिस्टम, पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह इंटरव्यू के दौरान बड़े स्तर पर गड़बड़ी होती है और अपने लोगों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जाती है। उनका दावा है कि कुछ मामलों में चयन पहले से तय कर लिया जाता है और पैसे के लेन-देन के जरिए भर्ती किए जाने के आरोप सामने आते हैं।
इंटरव्यू प्रक्रिया में गड़बड़ी पर बाबा रामदेव की चिंता
योग गुरु ने दावा किया कि इंटरव्यू में 90 से 99 प्रतिशत तक घोटाले होने की स्थिति चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यदि योग्यता और मेहनत के बजाय पहचान और पैसे के आधार पर नौकरी मिलने लगे तो इससे युवाओं का व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है। बाबा रामदेव ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर समस्या बताते हुए भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुधार की जरूरत बताई।
सरकारी नौकरी भर्ती में पारदर्शिता की मांग
बाबा रामदेव ने कहा कि सरकारी नौकरियों में चयन की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने को जरूरी बताया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी आंदोलन को हिंसा या अराजकता का रूप नहीं लेना चाहिए। उनके मुताबिक व्यवस्था में बदलाव लोकतांत्रिक तरीके और संवैधानिक दायरे में रहकर किया जाना चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर भी बाबा रामदेव ने जताई चिंता
बाबा रामदेव ने देश की शिक्षा व्यवस्था में मौजूद बुनियादी समस्याओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर छोटे बच्चों तक को स्कूलों में सुविधाओं की कमी की शिकायत है। कहीं शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं तो कहीं पीने के पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने कहा कि कुछ जगह किताबें तो हैं, लेकिन पढ़ाने वाले शिक्षक नहीं हैं और कहीं शिक्षक मौजूद हैं तो पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।
स्कूलों में शिक्षक और बुनियादी सुविधाओं की जरूरत
योग गुरु ने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए केवल किताबें उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक, साफ पानी, शौचालय और जरूरी शैक्षणिक संसाधन भी होने चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी देश की प्रगति की बुनियाद है और यदि बच्चों को बेहतर माहौल नहीं मिलेगा तो देश के विकास की गति प्रभावित होगी।
पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी पर बाबा रामदेव ने उठाए सवाल
बाबा रामदेव ने नकल और पेपर लीक जैसी समस्याओं को भी गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठना छात्रों के भविष्य के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने परीक्षा परिणामों में कथित गड़बड़ियों की शिकायतों का भी जिक्र किया और कहा कि बच्चों को अपनी मेहनत के आधार पर आगे बढ़ने का उचित अवसर मिलना चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी तभी देश आगे बढ़ेगा
बाबा रामदेव के मुताबिक देश को मजबूत बनाने के लिए शिक्षा व्यवस्था में सुधार बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अच्छी शिक्षा और समान अवसर मिलेंगे तो वे देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे। इसलिए स्कूल स्तर से लेकर उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं तक पूरी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की जरूरत है।
राजनीतिक माहौल पर बाबा रामदेव का संदेश- नफरत नहीं, संवाद जरूरी
बाबा रामदेव ने देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की अपनी जिम्मेदारी होती है। सत्ता पक्ष को विपक्ष की बात सुननी चाहिए और विपक्ष को भी सत्ता पक्ष के संवैधानिक दायित्व और भूमिका का सम्मान करना चाहिए। उनके अनुसार राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन इन्हें व्यक्तिगत दुश्मनी में बदलना उचित नहीं है।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद को बताया जरूरी
योग गुरु ने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए बातचीत और आपसी सम्मान जरूरी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच विचारों का मतभेद हो सकता है, लेकिन देशहित को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। संविधान, भारतीय संस्कृति और सभ्यता भी आपसी सम्मान और संवाद का संदेश देती है।
जाति और धर्म के नाम पर विभाजन से बचने की अपील
बाबा रामदेव ने समाज में जाति, धर्म और वर्ग के नाम पर बढ़ती दूरी को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने से बचना चाहिए। उनका कहना था कि भारत के सामने आंतरिक चुनौतियों के साथ बाहरी चुनौतियां भी मौजूद हैं, ऐसे में देश की एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है।
असामाजिक तत्वों पर संविधान के दायरे में कार्रवाई की बात
बाबा रामदेव ने कहा कि हर समुदाय में कुछ ऐसे लोग हो सकते हैं जो समाज में अशांति पैदा करने की कोशिश करें। ऐसे लोगों के खिलाफ कानून और संविधान के दायरे में कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के गलत काम के आधार पर पूरे समुदाय को निशाना बनाना उचित नहीं है।
राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक सद्भाव से मजबूत होगा भारत
बाबा रामदेव ने अपने संदेश में राजनीतिक मतभेदों के बावजूद संवाद, शिक्षा में सुधार, सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता और सामाजिक एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ समाज में आपसी विश्वास और सद्भाव भी जरूरी है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उनके बयान में युवाओं, शिक्षा, रोजगार और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े कई अहम मुद्दे सामने आए।










