Azam Khan resigns Jauhar Trust: उत्तर प्रदेश के रामपुर जिला कारागार में बंद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान, उनकी पत्नी डॉ. तंजीन फातिमा और छोटे बेटे अब्दुल्ला आजम ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया है। यह फैसला लंबे समय से चल रहे कानूनी विवादों और ट्रस्ट के कामकाज में आ रही बाधाओं के चलते लिया गया है। ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामलों ने इस कदम को अपरिहार्य बना दिया।
नई कार्यकारिणी का ऐलान, बहन बनीं अध्यक्ष
इस्तीफे के साथ ही जौहर ट्रस्ट की नई कार्यकारिणी की घोषणा भी कर दी गई है। आजम खान ने अपनी बहन निकहत अफलाक को ट्रस्ट का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसके अलावा उनके बड़े बेटे मोहम्मद अदीब आजम को सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस तरह ट्रस्ट की पूरी कमान अब नई टीम को सौंप दी गई है।
ट्रस्ट में अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति
नई कार्यकारिणी में समाजवादी पार्टी के विधायक नसीर अहमद खान को संयुक्त सचिव बनाया गया है। वहीं मुश्ताक अहमद सिद्दीकी को उपाध्यक्ष और जावेद उर रहमान खान को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. एसएन सलाम ने इन नियुक्तियों की आधिकारिक पुष्टि की है।
दिग्गजों की भागीदारी से हुई थी जौहर ट्रस्ट की स्थापना
गौरतलब है कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना देश की राजनीति के बड़े नामों ने मिलकर की थी। इसमें मुलायम सिंह यादव, आजम खान, अमर सिंह और अभिनेत्री-राजनेता जयाप्रदा जैसे दिग्गज शामिल थे। इस ट्रस्ट को 28 मई 2013 को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान आयोग (NCMEI) से मान्यता मिली थी।
आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा जौहर यूनिवर्सिटी
जौहर यूनिवर्सिटी आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है। ट्रस्ट न केवल विश्वविद्यालय का संचालन करता है, बल्कि रामपुर के पब्लिक स्कूलों के प्रबंधन की जिम्मेदारी भी इसी के पास है। शिक्षा के क्षेत्र में यह संस्थान एक बड़े प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया था, लेकिन कानूनी विवादों ने इसकी राह मुश्किल कर दी।
कानूनी मामलों ने मजबूर किया इस्तीफे के लिए
आजम खान के खिलाफ चल रहे अनेक कानूनी मामलों के कारण उन्हें ट्रस्ट के अध्यक्ष पद से हटना पड़ा। जिन अन्य सदस्यों पर केस दर्ज थे, उन्हें भी ट्रस्ट से अलग किया गया है। आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम इस समय डबल पैन कार्ड मामले में रामपुर जेल में बंद हैं। इसके अलावा ट्रस्ट पर किसानों की जमीन कब्जाने के आरोप भी लगे हैं।
जौहर ट्रस्ट पर करीब 30 केस दर्ज
फिलहाल जौहर ट्रस्ट पर लगभग 30 मुकदमे चल रहे हैं। बताया जा रहा है कि आजम खान के जुड़े रहने से ट्रस्ट के रोजमर्रा के कामकाज में लगातार दिक्कतें आ रही थीं। इसी वजह से ट्रस्ट को नए सिरे से व्यवस्थित करने का फैसला लिया गया।
सत्ता परिवर्तन के बाद बढ़ीं मुश्किलें
मई 2017 में अखिलेश यादव सरकार के सत्ता से बाहर होने और योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद आजम खान और जौहर ट्रस्ट की मुश्किलें और बढ़ गईं। रामपुर में आजम खान पर करीब 90 मुकदमे दर्ज हुए, जिनमें से 30 मामले अकेले जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं।
जमीन विवाद से प्रभावित हो रहे छात्र
जौहर यूनिवर्सिटी के लिए खरीदी गई करीब 1500 बीघा जमीन को लेकर पिछले पांच वर्षों से जांच चल रही है। जांच एजेंसियों की लगातार कार्रवाई के चलते यूनिवर्सिटी के छात्र भी परेशान हैं। अब नई कार्यकारिणी से उम्मीद की जा रही है कि वह ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी के कामकाज को स्थिरता देने की कोशिश करेगी।










