
UP News: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को शत्रु संपत्ति से जुड़े मामले में अदालत से झटका लगा है। तीन मुकदमों को एक साथ चलाने की मांग को लेकर दाखिल उनकी पुनरीक्षण याचिका सेशन कोर्ट ने खारिज कर दी है। इससे पहले निचली अदालत भी इस मांग को खारिज कर चुकी थी। इसके बाद आजम खान की ओर से सेशन कोर्ट में रिवीजन दाखिल किया गया था, लेकिन यहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली।
आजम खान के वकील ने तीनों मुकदमों को एक करने की क्यों की मांग?

बताते चले कि, आजम खान के अधिवक्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि तीनों मुकदमों में विवादित संपत्ति एक ही है। उनका कहना था कि ज्यादातर आरोपी और दस्तावेज भी लगभग समान हैं। ऐसे में तीनों मामलों की सुनवाई एक साथ की जानी चाहिए। बचाव पक्ष का तर्क था कि मामलों में समानता होने के कारण अलग-अलग सुनवाई की जरूरत नहीं है। हालांकि, अदालत ने पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार नहीं किया।
अभियोजन पक्ष ने अलग-अलग सुनवाई के समर्थन में क्या कहा?
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सीमा राणा ने बहस की। उन्होंने दलील दी कि तीनों मुकदमे अलग-अलग दस्तावेजों, अलग-अलग स्थानों और अलग-अलग समय पर कथित रूप से किए गए फर्जीवाड़े से जुड़े हैं। उनका कहना था कि प्रत्येक मामले में अभिलेखों और कथित अपराध की परिस्थितियां अलग हैं। इसलिए तीनों मुकदमों का विचारण अलग-अलग किया जाना चाहिए। अदालत में दोनों पक्षों की दलीलों के बाद पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई।
शत्रु संपत्ति मामले की शुरुआत कैसे हुई थी?
मामले के अनुसार, कलेक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम में सहायक अभिलेखपाल मोहम्मद फरीद की ओर से 9 मई 2020 को सिविल लाइंस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। शुरुआती प्राथमिकी लखनऊ के पीरपुर हाउस निवासी सैयद आफाक अहमद और अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज हुई थी। यह मामला उस संपत्ति से जुड़ा था, जो आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी के आसपास स्थित बताई गई है।
पाकिस्तान गए इमामुद्दीन कुरैशी के नाम दर्ज थी संपत्ति
विवादित जमीन इमामुद्दीन कुरैशी पुत्र बदरुद्दीन कुरैशी के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज बताई गई है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, इमामुद्दीन कुरैशी विभाजन के समय पाकिस्तान चले गए थे। वर्ष 2006 में इस संपत्ति को राजस्व अभिलेखों में शत्रु संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया था। इसके बाद जमीन के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया।
राजस्व रिकॉर्ड में कथित फर्जीवाड़े की जांच में क्या सामने आया?
जमीन के अभिलेखों की जांच के दौरान आरोप लगा कि राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर करके शत्रु संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने की कोशिश की गई। जांच में आफाक अहमद का नाम गलत तरीके से दर्ज किए जाने और रिकॉर्ड के कुछ पन्ने फटे मिलने की बात सामने आई थी। ये आरोप मामले की जांच का हिस्सा हैं और इन्हें अदालत में साबित किया जाना बाकी है।
आजम खान के परिवार और जौहर ट्रस्ट के सदस्य भी आरोपी

इस मामले में आजम खान, उनकी पत्नी और पूर्व सांसद डॉ. तजीन फात्मा, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम और जौहर ट्रस्ट के अन्य सदस्यों को भी आरोपी बनाया गया था। मुकदमे में सेवानिवृत्त कलेक्ट्रेट कर्मचारी भगवंत का नाम भी शामिल है, जो सरकारी गवाह बन चुके हैं। उनके बयान के आधार पर पुलिस ने आगे की जांच की थी। इसके बाद आजम खान के खिलाफ तीन अतिरिक्त धाराएं जोड़कर पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया था।
शत्रु संपत्ति के दो अन्य मुकदमे भी दर्ज
इस मामले के अलावा शत्रु संपत्ति से जुड़े दो अन्य मुकदमे वर्ष 2019 में दर्ज किए गए थे। इनमें एक मुकदमा अजीमनगर थाने और दूसरा शहर कोतवाली में दर्ज हुआ था। अब तीनों मुकदमों को एक करने की मांग खारिज होने के बाद इनकी सुनवाई अलग-अलग चलने का रास्ता बना हुआ है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत की सुनवाई पर नजर रहेगी।











