Ayodhya Ram Mandir: रामलला के मंदिर को मिला FSSAI का खास प्रमाणपत्र, 2 साल तक रहेगा मान्य

Ayodhya Ram Mandir: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए एक अहम खबर सामने आई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने राम मंदिर को ‘ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप’ प्रमाणपत्र दिया है। यह प्रमाणपत्र मंदिर परिसर में खाद्य सुरक्षा और साफ-सफाई से जुड़े तय मानकों का पालन करने के लिए दिया गया है। इस उपलब्धि को मंदिर में प्रसाद और दूसरे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राम मंदिर का FSSAI प्रमाणपत्र कब तक रहेगा मान्य? FSSAI की ओर से दिया गया यह प्रमाणपत्र

Ayodhya Ram Mandir

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 11, 2026

Ayodhya Ram Mandir: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए एक अहम खबर सामने आई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने राम मंदिर को ‘ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप’ प्रमाणपत्र दिया है। यह प्रमाणपत्र मंदिर परिसर में खाद्य सुरक्षा और साफ-सफाई से जुड़े तय मानकों का पालन करने के लिए दिया गया है। इस उपलब्धि को मंदिर में प्रसाद और दूसरे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

राम मंदिर का FSSAI प्रमाणपत्र कब तक रहेगा मान्य?

राम मंदिर का FSSAI प्रमाणपत्र कब तक रहेगा मान्य?

FSSAI की ओर से दिया गया यह प्रमाणपत्र 11 अक्टूबर 2026 से 10 अक्टूबर 2028 तक मान्य रहेगा। यानी राम मंदिर को अगले दो साल तक इस प्रमाणपत्र का लाभ मिलेगा। प्राधिकरण ने रविवार को सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी साझा की। इससे पहले शनिवार को अयोध्या में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में FSSAI के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) रजित पुन्हानी ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को यह प्रमाणपत्र सौंपा।

धार्मिक स्थलों पर खाद्य सुरक्षा क्यों जरूरी है?

मंदिरों में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। ऐसे में प्रसाद और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है। FSSAI की ‘ईट राइट प्लेसेज ऑफ वर्शिप’ पहल का मकसद धार्मिक स्थलों पर प्रसाद, लंगर और दूसरे खाद्य पदार्थों को तैयार करने तथा बांटने के दौरान साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा के नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।

इस पहल के जरिए धार्मिक संस्थानों को खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता बनाए रखने, गड़बड़ियों को रोकने और तय नियमों के मुताबिक व्यवस्था चलाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इससे श्रद्धालुओं को मिलने वाले प्रसाद और अन्य खाद्य पदार्थों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जाता है।

FSSAI की ‘ईट राइट इंडिया’ पहल से जुड़ा है प्रमाणपत्र

FSSAI की ‘ईट राइट इंडिया’ पहल से जुड़ा है प्रमाणपत्र

राम मंदिर को दिया गया यह प्रमाणपत्र FSSAI के ‘ईट राइट इंडिया’ अभियान का हिस्सा है। इस अभियान के तहत धार्मिक स्थलों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और उससे जुड़े नियमों के मुताबिक व्यवस्था विकसित करने के लिए जागरूक किया जाता है। इसके लिए संबंधित संस्थानों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए जाते हैं। साथ ही, खाद्य सुरक्षा से जुड़ा प्रशिक्षण और व्यावहारिक जानकारी भी उपलब्ध कराई जाती है, ताकि भोजन तैयार करने से लेकर उसे श्रद्धालुओं तक पहुंचाने की प्रक्रिया में जरूरी सावधानियां बरती जा सकें।

कैसे मिलता है राम मंदिर जैसा खाद्य सुरक्षा प्रमाणपत्र?

FSSAI का ‘ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप’ प्रमाणपत्र हासिल करना केवल आवेदन करने तक सीमित नहीं है। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। सबसे पहले संबंधित धार्मिक स्थल का शुरुआती ऑडिट किया जाता है। इसमें खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े मानकों की जांच होती है।

इसके बाद संबंधित संस्थान को जरूरी प्रशिक्षण दिया जाता है। फिर तृतीय-पक्ष एजेंसियों के जरिए अंतिम ऑडिट कराया जाता है। इस जांच में तय मानकों पर खरा उतरने के बाद ही प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद धार्मिक स्थलों पर खाद्य सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्था को बेहतर बनाना है।

22 जनवरी 2024 को हुई थी रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को हुई थी। इस भव्य कार्यक्रम का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। इसके बाद से मंदिर में दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। अब FSSAI का यह प्रमाणपत्र मंदिर परिसर में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों को लेकर एक और महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। इससे प्रसाद और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने के प्रयासों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।