Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और दान-पात्रों को लेकर छिड़ा विवाद अब राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन गया है। इस मामले की गूंज महाराष्ट्र तक सुनाई दे रही है, जहां सोमवार को शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी पर कड़ा प्रहार किया। पार्टी ने भाजपा को ‘राम मंदिर लुटेरे’ करार देते हुए कहा कि जिन कारसेवकों ने मंदिर निर्माण के लिए अपना खून बहाया और बलिदान दिया, आज सत्ता में बैठी भाजपा उसी मंदिर के चढ़ावे को लूट रही है। संपादकीय में तल्ख लहजे में सवाल उठाया गया कि क्या ‘मंदिर विकास’ का असल मतलब दान-पात्रों की लूट है?
महमूद गजनवी से तुलना और अमित शाह पर सीधा निशाना
बताते चले कि, शिवसेना (यूबीटी) ने अपने हमले को और आक्रामक बनाते हुए भाजपा की तुलना मध्यकालीन आक्रमणकारी महमूद गजनवी से कर दी, जिसने कभी सोमनाथ मंदिर को निशाना बनाया था। पार्टी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश के प्रमुख मंदिर आज लुटेरों के निशाने पर हैं और ये लुटेरे सीधे तौर पर भाजपा के संरक्षण में पल रहे हैं। शिवसेना ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी सीधा निशाना साधा। कोल्हापुर में शाह की हालिया रैली का जिक्र करते हुए पार्टी ने कहा कि जो लोग राम मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रहे, वे अंबाबाई मंदिर के विकास का दावा करने का नैतिक अधिकार खो चुके हैं। पार्टी ने अमित शाह को राम मंदिर का ‘लुटेरा’ और लोकतंत्र का ‘हत्यारा’ तक कह डाला।
विपक्षी दलों का तीखा विरोध
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के इस पूरे प्रकरण ने विपक्ष को भाजपा पर हमला करने का एक बड़ा मौका दे दिया है। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पहले ही इस मुद्दे पर मुखर होकर सवाल उठाए थे कि मंदिर के दान-पात्रों से चोरी के आरोपों के बावजूद अभी तक FIR क्यों दर्ज नहीं की गई? विपक्ष का मानना है कि मंदिर प्रशासन और सरकार इस मामले में पारदर्शिता बरतने में विफल रहे हैं, जिससे करोड़ों राम भक्तों की आस्था को ठेस पहुंची है। विपक्षी दल अब इस मुद्दे को देशभर में ले जाकर भाजपा की ‘मंदिर राजनीति’ को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।
योगी सरकार का बड़ा कदम
बढ़ते राजनीतिक दबाव और राम भक्तों के आक्रोश के बीच, उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कार्रवाई की है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के विशेष अनुरोध पर मामले की गहन जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। इस SIT में लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और वित्त विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी नील रतन को शामिल किया गया है। योगी सरकार ने इस पैनल को जल्द से जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के सख्त निर्देश दिए हैं, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कार्रवाई हो सके। अब सभी की निगाहें SIT की रिपोर्ट पर टिकी हैं।










