Khamenei Death Mystery: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को 48 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन उनके शव को लेकर पूरी दुनिया में एक रहस्यमय सस्पेंस बना हुआ है। शनिवार को हुए भीषण हमले के बाद से न तो उनके शव की कोई आधिकारिक तस्वीर सार्वजनिक की गई है और न ही ईरान सरकार ने उनके अंतिम संस्कार को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी दी है। रिपोर्टों के अनुसार, मलबे से निकाले गए उनके पार्थिव शरीर की आखिरी झलक केवल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को ही डिजिटल माध्यम से दिखाई गई थी। युद्ध के इस तनावपूर्ण माहौल में खामेनेई की डेड बॉडी का गायब होना अंतरराष्ट्रीय मीडिया के लिए सबसे बड़ी कूटनीतिक पहेली बन गया है।
खौफनाक ऑपरेशन: 28 फरवरी की वह सुबह जब मलबे में तब्दील हुआ सरकारी आवास
शनिवार, 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका ने एक संयुक्त खुफिया ऑपरेशन के तहत खामेनेई के सुरक्षित सरकारी आवास को निशाना बनाया। उस वक्त 86 वर्षीय खामेनेई अपने बेहद करीबी रिवोल्यूशनरी गार्ड प्रमुख मोहम्मद पाकपूर और सुरक्षा सलाहकार अली शमखानी के साथ एक उच्च-स्तरीय रणनीतिक बैठक कर रहे थे। अचानक हुई भीषण बमबारी ने पूरे परिसर को खंडहर बना दिया। हमला इतना सटीक और शक्तिशाली था कि खामेनेई की मौके पर ही मौत हो गई। अमेरिकी रिपोर्टों का दावा है कि स्ट्राइक के तुरंत बाद मोसाद के एजेंटों ने मलबे से उनका क्षत-विक्षत शव निकाला, उसकी तस्वीरें लीं और जरूरी दस्तावेज तैयार करने के बाद उसे वहीं छोड़कर चले गए।
अंतिम संस्कार पर चुप्पी: तेहरान, मशहद या अभी और लंबा इंतजार?
ईरान सरकार ने अब तक अंतिम संस्कार के समय या स्थान को लेकर रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है, जिससे कयासों का बाजार गर्म है। जानकारों का मानना है कि उनका अंतिम संस्कार या तो तेहरान के प्रसिद्ध बेहश्त-ए जहरा कब्रिस्तान में हो सकता है, जहाँ पहले सुप्रीम लीडर खुमैनी को दफनाया गया था। दूसरी संभावना उनके गृहनगर मशहद की है, जिसे ईरान में अत्यंत पवित्र माना जाता है। हालांकि, एक तीसरी थ्योरी यह भी है कि जारी युद्ध को देखते हुए अंतिम संस्कार को अनिश्चित काल के लिए स्थगित किया जा सकता है, ठीक उसी तरह जैसे हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरुल्लाह की विदाई में महीनों का समय लगा था।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का खेल: सऊदी अरब और अमेरिका की कथित मिलीभगत
वाशिंगटन पोस्ट की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस पूरे ऑपरेशन के पीछे सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) का भी हाथ हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, क्राउन प्रिंस ने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखा और इस हमले के लिए सबसे सटीक समय का सुझाव दिया था। इस बीच, भारत ने भी मिडिल ईस्ट की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्थिति की समीक्षा के लिए सुरक्षा समिति की एक आपातकालीन बैठक बुलाई है, क्योंकि इस क्षेत्र में लाखों भारतीय प्रवासी भी मौजूद हैं।
जवाबी कार्रवाई की आग: 14 अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का भीषण पलटवार
अपने सर्वोच्च नेता की मौत का बदला लेने के लिए ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने ‘ऑपरेशन ट्रुथफुल प्रॉमिस’ के अगले चरण के तहत जवाबी हमले तेज कर दिए हैं। ईरान का दावा है कि उसने अब तक 14 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जिसमें बड़े पैमाने पर नुकसान की खबरें हैं। तेहरान, इस्फ़हान और शिराज जैसे शहरों पर हुए हवाई हमलों के बाद अब पूरा क्षेत्र एक महायुद्ध की ओर बढ़ रहा है। युद्ध की इस विभीषिका के बीच खामेनेई के शव से जुड़ी जानकारी का न मिलना कूटनीतिक और मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा माना जा रहा है।









