Avimukteshwaranand News: क्लीन चिट या जेल! अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर कोर्ट का बड़ा फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी को अग्रिम जमानत दी है। अदालत ने गिरफ्तारी से फिलहाल राहत दी, साथ ही दोनों और शिकायतकर्ता को मीडिया में बयान देने पर रोक लगाई। कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है और मामले की आगे की जांच एजेंसियों द्वारा होगी।

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

मार्च 25, 2026

Avimukteshwaranand News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी को यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े मामले में अग्रिम जमानत मिली है। अदालत के इस निर्णय के बाद फिलहाल दोनों आरोपियों को गिरफ्तारी का डर नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने शिकायतकर्ता और आरोपियों दोनों को मीडिया में इंटरव्यू देने से रोक लगा दी है।

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हाईकोर्ट का फैसला और सुनवाई

अदालत ने इस मामले की सुनवाई पहले ही पूरी कर ली थी और 27 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच ने दोनों की अग्रिम जमानत याचिका को मंजूरी देते हुए यह निर्णय सुनाया। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला लिया।

गिरफ्तारी से बचने के लिए याचिका

गिरफ्तारी से बचने के लिए याचिका
गिरफ्तारी से बचने के लिए याचिका

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। अदालत ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद उनकी जमानत को मंजूरी दी। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया अभी भी जारी है और मामले की आगे की सुनवाई तथा जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जाएगी।

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मामले का विवरण

इस मामले में आरोप यह हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य ने आश्रम से जुड़े नाबालिग बच्चों के साथ यौन शोषण किया। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने अदालत में याचिका दाखिल की थी। इस याचिका के आधार पर कथित पीड़ित नाबालिगों के बयान दर्ज किए गए और कुछ सबूत प्रस्तुत किए गए।

FIR और जांच

पीड़ित बच्चों की शिकायत के बाद प्रयागराज के झूंसी थाना में FIR दर्ज की गई। इसके बाद मामले की जांच शुरू की गई। आरोप यह भी है कि पिछले एक वर्ष में दो बच्चों के साथ कथित यौन उत्पीड़न हुआ। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (IPC) और POCSO एक्ट की कई धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

अदालत की रोक और मीडिया पर निर्देश

हाईकोर्ट ने इस मामले में मीडिया में किसी प्रकार के इंटरव्यू देने पर रोक लगा दी है। यह आदेश अदालत ने इसलिए दिया ताकि मामले की निष्पक्ष जांच प्रभावित न हो और कोई पक्ष मीडिया में बयान देकर जांच को प्रभावित न कर सके।

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