Israel Iran Conflict: ईरान पर इजरायल-अमेरिका के हमले का ऑस्ट्रेलिया ने किया समर्थन, लेकिन सैन्य भागीदारी से किया साफ इनकार

मिडिल ईस्ट में 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के बीच ऑस्ट्रेलिया ने अमेरिका और इजरायल के एक्शन का खुला समर्थन किया है। प्रधानमंत्री अल्बनीज ने कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम वैश्विक शांति के लिए खतरा है। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया ने सीधे तौर पर युद्ध में शामिल होने से इनकार कर दिया है। क्या यह कूटनीतिक संतुलन है?

Israel Iran Conflict

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 2, 2026

Israel Iran Conflict: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब एक पूर्ण विकसित युद्ध का रूप ले चुका है। सोमवार को ईरान ने मिडिल ईस्ट के कई देशों पर अब तक का सबसे भीषण हमला किया है। इजरायल द्वारा तेहरान पर किए गए ताजा हमलों के जवाब में ईरान ने मिसाइलों की झड़ी लगा दी है। कुवैत, बहरीन, दुबई और सऊदी अरब जैसे देशों में इन हमलों के बाद हाहाकार मच गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई है और आम नागरिकों में दहशत का माहौल है।

कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर सीधा प्रहार: दूतावास से उठता धुआं

इस युद्ध की सबसे चौंकाने वाली घटना कुवैत से सामने आई है, जहाँ ईरान ने सीधे तौर पर अमेरिकी दूतावास (US Embassy) को निशाना बनाया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमले के बाद दूतावास परिसर से काला धुआं उठता देखा गया है। इतना ही नहीं, बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के ‘फिफ्थ फ्लीट’ के हेडक्वार्टर को भी ईरान ने अपना निशाना बनाया है। इराक के इरबिल क्षेत्र में भी जोरदार धमाकों की खबर है। इन हमलों से स्पष्ट है कि ईरान अब सीधे तौर पर अमेरिकी सैन्य और राजनयिक ठिकानों को चुनौती दे रहा है।

ऑस्ट्रेलिया का बड़ा फैसला: किसी भी सैन्य अभियान में शामिल होने से इनकार

मिडिल ईस्ट में गहराते इस संकट के बीच ऑस्ट्रेलिया ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक स्टैंड लिया है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं बनेगा। ऑस्ट्रेलिया ने संघर्ष बढ़ने की स्थिति में मिडिल ईस्ट में अपनी सेना तैनात करने से साफ इनकार कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देश इस युद्ध में गुटबाजी करते नजर आ रहे हैं। कैनबरा का यह फैसला क्षेत्र में अपनी तटस्थता बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

सऊदी अरब की अपील: प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने दी संयम बरतने की चेतावनी

ईरान के इन हमलों के बावजूद सऊदी अरब ने बेहद संभलकर प्रतिक्रिया दी है। सऊदी अरब ने संकेत दिया है कि वह फिलहाल ईरान पर जवाबी कार्रवाई करने के पक्ष में नहीं है। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद ने खाड़ी देशों से अपील की है कि वे किसी भी ऐसे कदम से बचें जिससे तनाव और बढ़े। उन्होंने चेतावनी दी कि कोई भी आक्रामक कार्रवाई ईरान या उसके सहयोगियों की ओर से और भी घातक जवाबी हमले को दावत दे सकती है। सऊदी अरब इस समय पूरे क्षेत्र को बड़े विनाश से बचाने के लिए मध्यस्थ की भूमिका की तलाश में है।

डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी: ईरानी सेना को हथियार डालने का अल्टीमेटम

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रति अपना कड़ा रुख बरकरार रखा है। ट्रंप ने ईरानी सैन्य अधिकारियों को सीधे तौर पर हथियार डालने का आदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का सैन्य अभियान तब तक नहीं रुकेगा, जब तक कि सभी निर्धारित लक्ष्य हासिल नहीं कर लिए जाते। ट्रंप ने यह प्रस्ताव भी दिया कि यदि ईरानी अधिकारी आत्मसमर्पण करते हैं, तो उन्हें सुरक्षा की पूरी गारंटी दी जाएगी। व्हाइट हाउस के इस बयान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका पीछे हटने के मूड में नहीं है।

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