ट्रंप की हत्या की पाकिस्तान में ट्रेनिंग और ईरान से पैसा लेने वाला आतंकी आसिफ दोषी करार

तेहरान. ईरानी जासूसों द्वारा भर्ती किए गए 48 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट को शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश रचने के आरोप में दोषी ठहराया गया है। ब्रुकलिन की एक जूरी ने दो घंटे से भी कम समय तक विचार-विमर्श करने के बाद उसे 'मर्डर-फॉर-हायर' (पैसे देकर हत्या करवाना) और आतंकवाद के आरोपों में दोषी पाया। जूरी ने मर्चेंट के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उसने कहा था कि ईरान द्वारा उसके परिवार को 'धमकी' दिए जाने के कारण उसे मजबूरी में इस साजिश का हिस्सा बनना पड़ा था। बेतुकी योजना: जून 2024

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Published On :

मार्च 7, 2026

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तेहरान.

ईरानी जासूसों द्वारा भर्ती किए गए 48 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट को शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश रचने के आरोप में दोषी ठहराया गया है। ब्रुकलिन की एक जूरी ने दो घंटे से भी कम समय तक विचार-विमर्श करने के बाद उसे 'मर्डर-फॉर-हायर' (पैसे देकर हत्या करवाना) और आतंकवाद के आरोपों में दोषी पाया।

जूरी ने मर्चेंट के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उसने कहा था कि ईरान द्वारा उसके परिवार को 'धमकी' दिए जाने के कारण उसे मजबूरी में इस साजिश का हिस्सा बनना पड़ा था। बेतुकी योजना: जून 2024 में एफबीआई के खुफिया कैमरों ने क्वींस के फ्लोरल पार्क मोटर लॉज में मर्चेंट को अपने एक साथी (जो वास्तव में एफबीआई का मुखबिर था) के साथ रिपब्लिकन रैली में ट्रंप को मारने की योजना बनाते हुए कैद किया था। कागज और वेप से समझाया प्लान: मर्चेंट ने एक नोटबुक के पन्ने पर आयताकार बॉक्स बनाकर भीड़ और स्टेज को दर्शाया। फिर उसने एक तीर के निशान के ऊपर क्रीमसिकल रंग का वेप रखते हुए कहा- यह टारगेट है।

यह कैसे मरेगा?
एडवांस पेमेंट और गिरफ्तारी: पूर्व बैंकर रह चुके मर्चेंट ने भाड़े के हत्यारे (हिटमैन) बने दो अंडरकवर एफबीआई एजेंटों को 5000-5000 डॉलर का एडवांस भी दिया था। उसे अगस्त 2024 में अमेरिका से भागने की कोशिश करते समय गिरफ्तार कर लिया गया था।

आसिफ मर्चेंट को पाकिस्तान में ट्रेनिंग मिली थी
अदालत के दस्तावेजों और ट्रायल के दौरान दी गई गवाही के अनुसार, आसिफ मर्चेंट ने 2022 के अंत या 2023 की शुरुआत में पाकिस्तान में रहकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के लिए काम करना शुरू किया था। इसी अवधि में उसे 'ट्रेडक्राफ्ट' (जासूसी और खुफिया काम करने के तरीके) का विशेष प्रशिक्षण दिया गया था, जिसमें काउंटर-सर्विलांस (निगरानी या खुफिया एजेंसियों से बचने की तकनीक) की ट्रेनिंग मुख्य रूप से शामिल थी। मर्चेंट ने अदालत में यह भी स्वीकार किया कि उसे इस बात की पूरी जानकारी थी कि IRGC एक घोषित आतंकी संगठन है। इस ट्रेनिंग को पूरा करने के बाद, 2023 में उसे ऐसे संभावित IRGC रंगरूटों की तलाश करने के लिए अमेरिका भेजा गया था, जो वहां रहकर संगठन के लिए काम कर सकें। इसके अलावा, इस पूरी अवधि के दौरान मर्चेंट अपने IRGC हैंडलर से मिलने और निर्देश प्राप्त करने के लिए बार-बार ईरान की यात्रा भी करता रहा था।

मकसद और अदालत में दलीलें
मर्चेंट ने अदालत में गवाही दी कि अप्रैल 2024 में उसके ईरानी हैंडलर ने उसे अमेरिका भेजा था। उसके हैंडलर ने स्पष्ट रूप से किसी एक का नाम नहीं लिया था, बल्कि तीन संभावित लक्ष्य बताए थे- डोनाल्ड ट्रंप, जो बाइडेन और निक्की हेली। इस काम के लिए उसे दस लाख डॉलर तक मिलने की उम्मीद थी। बचाव पक्ष का दावा: मर्चेंट के वकील एवी मोस्कोविट्ज ने इस साजिश को हास्यास्पद बताया और कहा कि मर्चेंट को लगा कि ईरान में उसका परिवार खतरे में है, इसलिए उसने केवल इस योजना का हिस्सा होने का नाटक किया। अदालत में 'नदीम अली' के नाम से गवाही देने वाले मुखबिर की टिप पर एफबीआई ने यह पूरा जाल बिछाया था। सरकारी वकीलों का पलटवार: एफबीआई एजेंट ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी के बाद मर्चेंट ने किसी धमकी का जिक्र नहीं किया था। इसके बजाय, उसने पैसे और 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए शीर्ष ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए ट्रंप की हत्या की बात स्वीकार की थी।

यह मुकदमा एक ऐसे समय में संपन्न हुआ है जब मध्य पूर्व में भारी तनाव है। अमेरिका और इजरायली सेनाओं के एक अभूतपूर्व सैन्य अभियान में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और दर्जनों अन्य शीर्ष ईरानी अधिकारी मारे गए हैं, जिससे युद्ध की स्थिति और गंभीर हो गई है। इस मामले में दोषी पाए जाने के बाद, अब सजा सुनाए जाने पर आसिफ मर्चेंट को अधिकतम उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।

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