Arvind Kejriwal Delhi High Court: आबकारी नीति केस में बड़ा फैसला आज, जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा पर सभी की नजर

दिल्ली आबकारी नीति मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है, जहाँ दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा आज शाम 4:30 बजे अपना फैसला सुनाएंगी कि वह इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग (Recuse) करेंगी या नहीं।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अप्रैल 20, 2026

Arvind Kejriwal Delhi High Court: दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मामले में एक बार फिर कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। इस केस में दिल्ली हाईकोर्ट आज शाम 4:30 बजे यह फैसला सुनाएगा कि जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग करेंगी या नहीं।

यह मामला तब और अहम हो गया जब आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अदालत में याचिका दायर कर जस्टिस शर्मा से मामले से अलग होने की मांग की। अदालत ने इस याचिका को रिकॉर्ड पर ले लिया है और अब इस पर अंतिम आदेश दिया जाएगा।

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केजरीवाल की दलील और आरोप

अरविंद केजरीवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में अपनी बात रखी। उन्होंने दलील दी कि उनके द्वारा दायर किए गए जवाबी हलफनामे को स्वीकार न करना “न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन” होगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में हितों के टकराव की स्थिति बन रही है। केजरीवाल का आरोप है कि जज के परिवार से जुड़े कुछ लोग केंद्र सरकार की कानूनी पैनल में शामिल हैं और सॉलिसिटर जनरल के माध्यम से काम करते हैं, जबकि इसी मामले में सॉलिसिटर जनरल सीबीआई की ओर से पेश हो रहे हैं।

इसी आधार पर उन्होंने न्यायाधीश से सुनवाई से अलग होने की मांग की है। केवल केजरीवाल ही नहीं, बल्कि आप नेता मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने भी इसी तरह की याचिकाएं दायर की हैं।

सॉलिसिटर जनरल का विरोध और सख्त रुख

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस याचिका का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने अदालत में कहा कि लिखित दलीलों के बाद अतिरिक्त हलफनामे की आवश्यकता नहीं होती और इस मामले में सभी पक्षों को पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के आरोपों के आधार पर न्यायाधीश से सुनवाई से अलग होने का अनुरोध स्वीकार करना एक गलत परंपरा स्थापित करेगा। मेहता ने इसे “बेबुनियाद आशंकाएं” बताते हुए कहा कि ऐसे दबाव में न्यायाधीश को झुकना नहीं चाहिए।

उन्होंने यहां तक सुझाव दिया कि इस तरह के अनुरोधों को लेकर अदालत को अवमानना की कार्रवाई पर भी विचार करना चाहिए, क्योंकि यह न्यायिक प्रक्रिया पर दबाव बनाने जैसा है।

अन्य पक्ष और पिछला घटनाक्रम

इस मामले में विजय नायर और अरुण रामचंद्र पिल्लई सहित अन्य प्रतिवादियों ने भी न्यायाधीश से खुद को अलग करने का अनुरोध किया है। सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अब अदालत अंतिम निर्णय सुनाएगी।

गौरतलब है कि 27 फरवरी को निचली अदालत ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को राहत देते हुए आरोपमुक्त कर दिया था। अदालत ने उस समय कहा था कि सीबीआई द्वारा प्रस्तुत मामला न्यायिक जांच की कसौटी पर खरा नहीं उतरता और यह पूरी तरह से आधारहीन साबित हुआ था।

आज के फैसले पर सबकी नजर

अब सभी की नजरें दिल्ली हाईकोर्ट के शाम 4:30 बजे आने वाले फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई जारी रखेंगी या नहीं। यह निर्णय मामले की आगे की कानूनी दिशा पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

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