Armed Forces Veterans Day: सशस्त्र सेना वेटरन्स डे के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली कैंट स्थित मानेकशॉ सेंटर में पूर्व सैनिकों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने देश की रक्षा में जीवन समर्पित करने वाले पूर्व सैनिकों के शौर्य, बलिदान और आजीवन सेवा को नमन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र अपने वेटरन्स के योगदान को कभी नहीं भूल सकता और उनका सम्मान करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
वन रैंक वन पेंशन पर सरकार का रुख
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने वन रैंक वन पेंशन (OROP) को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि वर्षों से चली आ रही इस मांग को सरकार ने पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ लागू किया। इस पहल का उद्देश्य उस असमानता को खत्म करना था, जिसे पूर्व सैनिक लंबे समय से महसूस कर रहे थे।राजनाथ सिंह ने कहा कि वन रैंक वन पेंशन लागू होने से न केवल पूर्व सैनिकों के जीवन में आर्थिक स्थिरता आई है, बल्कि इससे यह भरोसा भी मजबूत हुआ है कि देश अपने सैनिकों के साथ न्याय करता है। यह व्यवस्था सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान और सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है।
पूर्व सैनिकों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं पर फोकस
रक्षा मंत्री ने पूर्व सैनिकों की स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिसने अपना पूरा जीवन देश के नाम कर दिया हो, उसके स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। इसी सोच के तहत Ex-Servicemen Contributory Health Scheme (ECHS) को लगातार मजबूत किया जा रहा है।उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य है कि स्वास्थ्य सुविधाएं केवल शहरों तक सीमित न रहें, बल्कि गांवों और दूरदराज़ क्षेत्रों तक भी पहुंचें। इससे रिमोट एरिया में रहने वाले वेटरन्स को इलाज के लिए किसी तरह की परेशानी न हो और उन्हें समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके।
टेलीमेडिसीन और डिजिटल सुविधाओं का विस्तार
राजनाथ सिंह ने कहा कि टेलीमेडिसीन के माध्यम से डॉक्टरों से दूर बैठकर परामर्श लेने की सुविधा को भी बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उम्र या दूरी इलाज में बाधा न बने और पूर्व सैनिकों को घर बैठे चिकित्सा सलाह मिल सके।रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि जो वेटरन्स अपना खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, सरकार उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके साथ ही रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने का भी प्रयास किया गया है, ताकि पूर्व सैनिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
शहीदों के सम्मान में स्मारकों का निर्माण
कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने उन सैनिकों को भी श्रद्धांजलि दी जिन्होंने राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय समर स्मारक जैसे स्थल इसी भावना के प्रतीक हैं, जो हर नागरिक को यह याद दिलाते हैं कि आज की शांति और आजादी अनगिनत बलिदानों का परिणाम है।उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों में स्थानीय स्तर पर भी ऐसे स्मारकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के मन में भी सैनिकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना बनी रहे।
वेटरन्स डे का ऐतिहासिक महत्व
सशस्त्र सेना वेटरन्स डे स्वर्गीय फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो 1953 में इसी दिन सेवानिवृत्त हुए थे। यह दिन भारतीय सशस्त्र बलों में सेवा देने वाले बहादुर सैनिकों के सम्मान और पहचान के लिए समर्पित है। इस अवसर पर देशभर में कई कार्यक्रम और आउटरीच गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।
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