अब आवेदक घर बैठे देख सकेंगे फाइल का हर मूवमेंट, बाबुओं की नोटिंग पर नजर

जयपुर  गुलाबी नगरी के जयपुर विकास प्राधिकरण में अब फाइलों को दबाने और मेज के नीचे का खेल खत्म होने वाला है। जेडीए ने भ्रष्टाचार और लेटलतीफी पर 'डिजिटल स्ट्राइक' करते हुए एक क्रांतिकारी व्यवस्था लागू की है। अब जेडीए के बाबू और अधिकारी फाइलों पर जो भी 'नोटिंग' करेंगे, उसे आवेदक घर बैठे अपनी SSO ID के जरिए ऑनलाइन देख सकेगा। अब कोई अधिकारी यह कहकर आपको नहीं टरका पाएगा कि 'फाइल अभी प्रोसेस में है।' अब बताना होगा क्यों अटकी फाइल? अब तक जेडीए की कार्यप्रणाली में सबसे बड़ी बाधा 'अस्पष्ट नोटिंग' होती थी। अधिकारी अक्सर फाइलों पर

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Published On :

मई 13, 2026

जयपुर

 गुलाबी नगरी के जयपुर विकास प्राधिकरण में अब फाइलों को दबाने और मेज के नीचे का खेल खत्म होने वाला है। जेडीए ने भ्रष्टाचार और लेटलतीफी पर 'डिजिटल स्ट्राइक' करते हुए एक क्रांतिकारी व्यवस्था लागू की है। अब जेडीए के बाबू और अधिकारी फाइलों पर जो भी 'नोटिंग' करेंगे, उसे आवेदक घर बैठे अपनी SSO ID के जरिए ऑनलाइन देख सकेगा। अब कोई अधिकारी यह कहकर आपको नहीं टरका पाएगा कि 'फाइल अभी प्रोसेस में है।'

अब बताना होगा क्यों अटकी फाइल?
अब तक जेडीए की कार्यप्रणाली में सबसे बड़ी बाधा 'अस्पष्ट नोटिंग' होती थी। अधिकारी अक्सर फाइलों पर ऐसी तकनीकी टिप्पणियां लिख देते थे जो आम आदमी की समझ से बाहर होती थीं। लेकिन जेडीए सचिव के नए आदेश के अनुसार, अब नोटिंग की भाषा सरल और स्पष्ट होनी चाहिए। इतना ही नहीं, अगर कोई अधिकारी किसी फाइल को रोकता है या कोई आपत्ति लगाता है, तो उसे पोर्टल पर यह स्पष्ट करना होगा कि किस नियम के तहत यह टिप्पणी की गई है। अनावश्यक आपत्ति लगाकर फाइल अटकाने वाले कर्मचारियों की अब खैर नहीं होगी।

इन 6 सेवाओं के लिए अब नहीं काटने होंगे चक्कर
शुरुआती चरण में सबसे ज्यादा काम आने वाली छह सेवाओं को जेडीए ने पूरी तरह पारदर्शी बना दिया है। यदि आप निम्नलिखित कामों के लिए आवेदन कर रहे हैं, तो आपकी फाइल का हर मूवमेंट डैशबोर्ड पर दिखेगा।
    ई-पट्टा (फ्री होल्ड या लीज डीड)
    नाम ट्रांसफर (नाम हस्तांतरण)
    सब-डिविजन (उपविभाजन)
    रिकॉन्स्टीट्यूशन (पुनर्गठन)
    वन टाइम लीज सर्टिफिकेट (OTLC)
    अन्य संबंधित भूमि सेवाएं

खत्म होगी ऑफलाइन फाइलों की 'दोहरी दुनिया'
जेडीए में अब तक सबसे बड़ा झोल यह था कि फाइलें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में चलती थीं। इससे अधिकारियों को फाइल दबाने का मौका मिल जाता था। अब सचिव के आदेशानुसार, हर फाइल का मूवमेंट जेडीए सर्विस पोर्टल के डैशबोर्ड पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। आवेदक को यह पता रहेगा कि उसकी फाइल किस टेबल पर, किस तारीख से और क्यों रुकी हुई है।

आमजन को क्या होगा फायदा?
इस नई व्यवस्था से बिचौलियों का रोल पूरी तरह खत्म हो जाएगा। आवेदक को अपनी फाइल की कमी जानने के लिए जेडीए के गलियारों में भटकने या किसी बाबू की खुशामद करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर आवेदन में कोई कमी है, तो वह डैशबोर्ड पर स्पष्ट दिखेगी, जिसे आवेदक तुरंत ठीक कर सकेगा। जेडीए का यह कदम राजस्थान सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अब देखना यह है कि फाइलों के डिजिटल होने से गुलाबी नगरी की जनता को गुलाबी राहत कब तक मिलती है।

 

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