Maharashtra Politics: सहर शेख के ‘हरे’ बयान पर आनंद दुबे का पलटवार—’भगवा था और भगवा रहेगा’

महाराष्ट्र में रंगों की सियासत गरमा गई है। AIMIM पार्षद सहर शेख के 'मुंब्रा को हरा करने' वाले बयान पर शिवसेना (UBT) नेता आनंद दुबे ने तीखा पलटवार किया है। दुबे ने AIMIM नेताओं की तुलना 'हरे सांपों' से करते हुए कहा कि भारत कभी हरा नहीं होगा और यहाँ केवल भगवा का अस्तित्व रहेगा।

सहर शेख के 'हरे' बयान पर आनंद दुबे का पलटवार

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जनवरी 26, 2026

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में एआईएमआईएम (AIMIM) पार्षद सहर शेख के ‘हरे रंग’ वाले बयान ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस मुद्दे पर अब शिवसेना (UBT) के नेता आनंद दुबे ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी पर तीखा प्रहार किया है। दुबे ने वारिस पठान और इम्तियाज जलील जैसे नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए विवादित टिप्पणी की है।

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‘हरे सांप’ वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया

बताते चले कि, आनंद दुबे ने सहर शेख के बयान का समर्थन करने वाले नेताओं पर हमला बोलते हुए कहा कि यह देश कभी किसी के सामने नहीं झुका है। उन्होंने कट्टरपंथी सोच की तुलना ‘हरे सांपों’ से करते हुए कहा कि जिस तरह जहरीले सांपों का फन कुचल दिया जाता है, वैसे ही भारत ऐसी विभाजनकारी सोच को कुचल देगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में ‘हरी सोच’ यानी कट्टरता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

AIMIM नेताओं की तुलना मुगल शासक बाबर से की

शिवसेना यूबीटी नेता ने एआईएमआईएम नेताओं की तुलना मुगल शासक बाबर से की। उन्होंने कहा कि जो सपना बाबर ने 1526 में भारत को पूरी तरह ‘हरा’ करने का देखा था, वही भाषा आज वारिस पठान और इम्तियाज जलील बोल रहे हैं। दुबे के अनुसार, बाबर खुद कब्र में चला गया लेकिन भारत को नहीं बदल पाया, और आज के नेता भी अपने मंसूबों में कभी सफल नहीं होंगे।

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छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत का उल्लेख

आपको बता दे कि, भारत की सांस्कृतिक पहचान पर जोर देते हुए दुबे ने कहा कि यह देश वीर महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान और छत्रपति शिवाजी महाराज का है। उन्होंने भगवा रंग को सबसे पवित्र बताते हुए कहा कि भारत कल भी भगवा था, आज भी है और भविष्य में भी रहेगा। उनके अनुसार, सनातन धर्म की जड़ें इतनी गहरी हैं कि उन्हें कोई भी बाहरी या कट्टरपंथी विचारधारा हिला नहीं सकती।

हरियाली का स्वागत लेकिन ‘पाकिस्तानी सोच’ का कड़ा विरोध

आनंद दुबे ने स्पष्ट किया कि उन्हें हरे रंग से परहेज नहीं है, बशर्ते वह किसानों की फसल, पर्यावरण या हरियाली का प्रतीक हो। हालांकि, उन्होंने ‘हरी सोच’ को पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मानसिकता का परिचायक बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि मुंब्रा तो दूर, भारत की एक भी गली को इस तरह की कट्टरपंथी सोच के रंग में रंगने नहीं दिया जाएगा क्योंकि यह एक ‘नया भारत’ है।

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बीजेपी-AIMIM के बीच नूरा कुश्ती

अपने संबोधन के अंत में दुबे ने भाजपा और एआईएमआईएम के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया। उन्होंने इसे एक ‘नूरा कुश्ती’ करार दिया, जहाँ दोनों दल एक-दूसरे को उकसाकर समाज में जहर घोल रहे हैं। दुबे ने दावा किया कि इन दोनों पार्टियों द्वारा फैलाए गए नफरत के जहर को खत्म करने के लिए शिवसैनिकों को मैदान में उतरना ही होगा।