Irfan Solanki News: इलाहाबाद हाईकोर्ट से इरफान सोलंकी को झटका, गैंगस्टर एक्ट रद्द करने की याचिका खारिज

इरफान सोलंकी के राजनीतिक भविष्य पर संकट के बादल: क्या इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद अब पूर्व सपा विधायक की जेल से बाहर आने की उम्मीदें खत्म हो गई हैं? जानिए क्यों कोर्ट ने उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की धाराएं हटाने से साफ इनकार कर दिया और इस फैसले का कानपुर की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 30, 2026

Irfan Solanki News: कानपुर की सीसामऊ विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ लगे गैंगस्टर एक्ट को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद इरफान सोलंकी की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। अदालत के इस निर्णय से उनके समर्थकों में भी निराशा देखी जा रही है।

याचिका खारिज, ट्रायल पर लगी रोक से इनकार

इरफान सोलंकी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर गैंगस्टर एक्ट के तहत ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। उन्होंने दलील दी थी कि उनके खिलाफ दर्ज मामला गलत आधार पर बनाया गया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ कर दिया कि ट्रायल कोर्ट में मुकदमे की कार्यवाही जारी रहेगी।

12 जनवरी को सुरक्षित रखा गया था फैसला

इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 जनवरी को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद लंबे इंतजार के बाद कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाते हुए इरफान सोलंकी की याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले को न्यायिक प्रक्रिया के तहत अहम माना जा रहा है, क्योंकि कोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले में हस्तक्षेप से इनकार किया है।

गैंगस्टर मामले में पहले मिल चुकी है जमानत

गौरतलब है कि इरफान सोलंकी को सितंबर 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट से गैंगस्टर एक्ट के मामले में जमानत मिल चुकी थी। हालांकि, जमानत मिलने के बावजूद उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे को खत्म नहीं किया गया था। इसी क्रम में उन्होंने केस रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अब कोर्ट ने उनकी इस कोशिश को नाकाम कर दिया है।

2022 में दर्ज हुआ था गैंगस्टर एक्ट का मामला

इरफान सोलंकी के खिलाफ दिसंबर 2022 में कानपुर के जाजमऊ थाने में गैंगस्टर एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में उन्हें एक आपराधिक गिरोह का सरगना बताया गया था। मामले में तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार दुबे को प्रतिवादी बनाया गया है। इस केस की सुनवाई जस्टिस समित गोपाल की सिंगल बेंच ने की।

गंभीर आरोपों से जुड़ा है मामला

गैंगस्टर एक्ट से जुड़े इस प्रकरण में आरोप लगाया गया है कि इरफान सोलंकी अपने गैंग के जरिए लोगों को धमकाकर अवैध वसूली करते थे। आरोप यह भी है कि गैंग के सदस्य आम लोगों के साथ मारपीट और दबदबे की राजनीति में शामिल रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, इरफान सोलंकी के खिलाफ दो दर्जन से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

भाई रिजवान सोलंकी भी हैं आरोपी

इस मामले में इरफान सोलंकी के भाई रिजवान सोलंकी को भी आरोपी बनाया गया है। दोनों भाइयों पर संगठित अपराध से जुड़े आरोप लगे हैं। इरफान सोलंकी को पिछले साल 25 सितंबर को जमानत जरूर मिल गई थी, लेकिन केस समाप्त नहीं हुआ था। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद उनके खिलाफ चल रहा ट्रायल और ज्यादा अहम हो गया है।

राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज

इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक और कानूनी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्ष इसे कानून के राज की जीत बता रहा है, जबकि समर्थक इसे राजनीतिक साजिश करार दे रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में आगे बढ़ेगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।