Alka Lamba Letter: हजीना सैयद निष्कासन के बाद कांग्रेस में बवाल, अल्का लांबा पर लगाए गंभीर आरोप

हज़ीना सैयद के निष्कासन के बाद कांग्रेस में बड़ा सियासी बवाल खड़ा हो गया है, जिसमें अल्का लांबा पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अब सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ संगठनात्मक कार्रवाई है या पार्टी के भीतर किसी बड़े राजनीतिक टकराव का संकेत, जानिए पूरी सच्चाई

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अप्रैल 13, 2026

Alka Lamba Letter: Indian National Congress की तमिलनाडु महिला विंग प्रमुख एम. हज़ीना सैयद को “पार्टी विरोधी गतिविधियों” के आरोप में संगठन से बाहर कर दिया गया है। यह फैसला अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अल्का लांबा द्वारा जारी आदेश के तहत लिया गया, जिसमें कहा गया कि संगठनात्मक अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कदम तुरंत प्रभाव से जरूरी था।

इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस के भीतर आंतरिक कलह और तेज हो गई है, और मामला अब सार्वजनिक विवाद का रूप ले चुका है।

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इस्तीफे और निष्कासन को लेकर टकराव

हज़ीना सैयद ने दावा किया है कि उन्होंने निष्कासन से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके अनुसार, उसी दिन उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी। इसके बावजूद, निष्कासन पत्र जारी किए जाने पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब उन्होंने पहले ही इस्तीफा दे दिया था, तो उन्हें आधिकारिक रूप से बाहर करने का निर्णय क्यों लिया गया।

सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया

सैयद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और संगठन के भीतर अनियमितताएं मौजूद हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सदस्यता शुल्क और संगठनात्मक फंड का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिससे पार्टी के भीतर वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

अल्का लांबा पर गंभीर आरोप

Alka Lamba द्वारा जारी निष्कासन पत्र के बाद हज़ीना सैयद ने उन पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए तीखा हमला बोला। अपने ईमेल में उन्होंने विवादित बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने लांबा पर संगठन के संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि महिला कांग्रेस के फंड का ऑडिट क्यों नहीं कराया जाता और क्या संगठन में वित्तीय पारदर्शिता मौजूद है।

संगठन में बढ़ती अंदरूनी खींचतान

इस पूरे विवाद ने महिला कांग्रेस इकाई के भीतर गहरी दरारों को उजागर कर दिया है। एक ओर अनुशासन और संगठनात्मक नियंत्रण की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार और उत्पीड़न के आरोप लगाए जा रहे हैं। यह मामला अब सिर्फ एक निष्कासन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

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आगे क्या होगा?

इस विवाद के बाद कांग्रेस नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया है कि वह स्थिति को नियंत्रित करे और संगठन के भीतर पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए। फिलहाल, यह देखना अहम होगा कि पार्टी इस आंतरिक विवाद को कैसे संभालती है और क्या दोनों पक्षों के बीच किसी तरह का समाधान निकल पाता है या नहीं।