पहाड़ों में अलर्ट: बद्रीनाथ-केदारनाथ की चोटियों पर बर्फ नहीं, 40 साल में ऐसा पहली बार

उत्तराखंड उत्तराखंड में इस सर्दी में ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी  लगभग नहीं हुई है। अक्टूबर से जनवरी तक हिमपात का रिकॉर्ड लगभग शून्य रहा है। रुद्रप्रयाग जिले के प्रसिद्ध क्षेत्र तुंगनाथ में जनवरी में बर्फ नहीं जमी, जो 1985 के बाद पहली बार हुआ है। इसी तरह बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे ऊंचे पर्वतीय इलाकों में भी बर्फ नहीं पड़ी है, जबकि आम तौर पर जनवरी में यहां बर्फ की मोटी चादर फैल जाती है। गूंजी क्षेत्र में भी नहीं हुई बर्फबारी पहाड़ी इलाकों के साथ-साथ लोकप्रिय हिल स्टेशन जैसे नैनीताल, मसूरी और मुक्तेश्वर में भी इस बार बर्फ दिखाई

Wrriten By :

Editor

Published On :

जनवरी 18, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

उत्तराखंड
उत्तराखंड में इस सर्दी में ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी  लगभग नहीं हुई है। अक्टूबर से जनवरी तक हिमपात का रिकॉर्ड लगभग शून्य रहा है। रुद्रप्रयाग जिले के प्रसिद्ध क्षेत्र तुंगनाथ में जनवरी में बर्फ नहीं जमी, जो 1985 के बाद पहली बार हुआ है। इसी तरह बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे ऊंचे पर्वतीय इलाकों में भी बर्फ नहीं पड़ी है, जबकि आम तौर पर जनवरी में यहां बर्फ की मोटी चादर फैल जाती है।

गूंजी क्षेत्र में भी नहीं हुई बर्फबारी
पहाड़ी इलाकों के साथ-साथ लोकप्रिय हिल स्टेशन जैसे नैनीताल, मसूरी और मुक्तेश्वर में भी इस बार बर्फ दिखाई नहीं दी। यहां तक कि 15,000 फीट ऊंचाई वाले गूंजी क्षेत्र में भी बर्फबारी नहीं हुई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तराखंड में बर्फबारी के न होने का मुख्य कारण ग्लोबल वार्मिंग है। तापमान में बढ़ोतरी और जलवायु परिवर्तन के कारण पूरा प्रदेश अब एक “स्नोलेस एरिया” की ओर बढ़ता जा रहा है।
 
पहाड़ों में जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ रही
बर्फ के अभाव का एक और प्रभाव यह भी है कि पहाड़ों में जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ रही हैं, जो सामान्यतया गर्मियों में ही होती थीं। मौसम के अनियंत्रित बदलाव से हिमालय के पारिस्थितिक तंत्र, जल स्रोत, कृषि और पर्यटन पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। नासा की सैटेलाइट तस्वीरों में केदारनाथ की पहाड़ियां सूखी दिखाई दे रही हैं, जो जनवरी में असामान्य है। बद्रीनाथ की पहाड़ियों में भी अभी तक बर्फ नहीं पड़ी है। वैज्ञानिक इसे “स्नो ड्राउट (बर्फ का अकाल)” कह रहे हैं, और यह पैटर्न उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बढ़ता जा रहा है।
 
इस सर्दी में पश्चिमी विक्षोभ कमजोर रहा
एक प्रमुख वजह यह भी रही कि इस सर्दी में पश्चिमी विक्षोभ (वेदर सिस्टम) कमजोर रहा। सामान्यत: सर्दियों में चार-पांच पश्चिमी विक्षोभ उत्तराखंड में बर्फबारी और बारिश लाते हैं, लेकिन इस बार जो सिस्टम बना वह कमजोर होकर राज्य से पहले ही दक्षिण की ओर मुड़ गया। इसके कारण पहाड़ों को बर्फ नहीं मिली। मौसम विभाग के मुताबिक, कश्मीर के दक्षिण-पूर्व में एक पश्चिमी विक्षोभ 21 जनवरी तक उत्तराखंड तक पहुँच सकता है। अगर यह सिस्टम सक्रिय होता है तो राज्य में बर्फबारी होने की संभावना बन सकती है।

 

Leave a Comment

2