West Bengal Elections : बंगाल में ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ की एंट्री, अखिलेश यादव ने क्यों बताया इसे भाजपा की चाल?

पश्चिम बंगाल चुनाव के दूसरे चरण से पहले चुनाव आयोग ने यूपी के चर्चित IPS अजय पाल शर्मा को पुलिस ऑब्जर्वर बनाकर भेजा है। इस फैसले पर अखिलेश यादव और ममता बनर्जी की पार्टी ने कड़ा ऐतराज जताया है। अखिलेश ने इसे भाजपा की डराने वाली राजनीति करार दिया है। क्या इस तैनाती से चुनाव प्रभावित होगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 28, 2026

West Bengal Elections :  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अंतिम चरणों के बीच उत्तर प्रदेश के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति ने एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मामले में मोर्चा खोलते हुए भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया है। अखिलेश यादव का दावा है कि बंगाल में जानबूझकर उन अधिकारियों को चुनाव ऑब्जर्वर बनाकर भेजा गया है, जो सत्ता के इशारे पर काम करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि अधिकारियों को मनचाही पोस्टिंग का लालच देकर उनसे राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध किए जा रहे हैं।

IPS अजय पाल शर्मा की नियुक्ति पर विवाद: सिंघमकी कार्यशैली पर घेरा

अखिलेश यादव ने विशेष रूप से आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा की नियुक्ति पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में तैनात रहे ऐसे अधिकारियों को बंगाल भेजना, जिनका रिकॉर्ड चुनाव को प्रभावित करने का रहा है, निष्पक्ष मतदान पर प्रश्नचिह्न लगाता है। सपा प्रमुख ने रामपुर और संभल के पिछले चुनावों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि इन अधिकारियों ने वहां चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी की थी। उन्होंने अजय पाल शर्मा के सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या ऐसे विवादित आचरण वाले अधिकारी को संवेदनशील क्षेत्रों में ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए? इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी वीडियो जारी कर भाजपा पर निशाना साधा है।

रिश्तेदारी और पोस्टिंग: चुनाव आयुक्त के परिजनों की नियुक्ति पर उठाए सवाल

अखिलेश यादव ने केवल पुलिस अधिकारियों ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक नियुक्तियों में भी भाई-भतीजावाद का आरोप लगाया। उन्होंने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के परिजनों का जिक्र करते हुए सनसनीखेज दावे किए। अखिलेश ने कहा कि चुनाव आयुक्त की बेटी मेधा रूपम नोएडा की जिलाधिकारी (DM) हैं और उनके दामाद मनीष बंसल आगरा के डीएम पद पर तैनात हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि आप भाजपा के एजेंडे पर काम करेंगे या रसूखदार परिवारों से संबंध रखेंगे, तो आपको डीजीपी और डीएम जैसी महत्वपूर्ण कुर्सियां आसानी से मिल जाएंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इन महत्वपूर्ण पदों का इस्तेमाल चुनाव को एकतरफा बनाने के लिए किया जा रहा है।

यूपी की कानून-व्यवस्था पर प्रहार: “लोकतंत्र बचाने के लिए आगे आएं”

उत्तर प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा और अपराध की घटनाओं को लेकर भी अखिलेश यादव ने योगी सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने हरदोई और गाजीपुर में हुई बलात्कार और हत्या की जघन्य वारदातों का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रदेश में कानून का राज खत्म हो चुका है। सपा प्रमुख ने मीडिया कर्मियों को भी झकझोरते हुए एक भावुक और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा, “पुलिस अब बुनियादी नियमों का पालन करने के बजाय केवल सरकार के इशारों पर नाच रही है। पत्रकारों को भी समझना होगा कि अंत में असुरक्षा सबको घेरेगी, इसलिए कम से कम लोकतंत्र और सच्चाई को बचाने के लिए निडर होकर आगे आएं।”

बंगाल से यूपी तक सियासी हलचल: टीएमसी और सपा एक साथ

पश्चिम बंगाल में यूपी के अफसरों की एंट्री ने सपा और टीएमसी को एक मंच पर ला दिया है। टीएमसी के आधिकारिक हैंडल से भी ऐसे वीडियो साझा किए गए हैं, जिनमें आईपीएस अजय पाल शर्मा द्वारा कथित तौर पर उम्मीदवारों को धमकाने का दावा किया गया है। अखिलेश यादव का मानना है कि यह सब एक सोची-समझी रणनीति के तहत हो रहा है ताकि विपक्षी दलों के हौसले पस्त किए जा सकें। इस सियासी घमासान ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल चुनाव के नतीजे न केवल वहां की सत्ता तय करेंगे, बल्कि 2026 और भविष्य की राष्ट्रीय राजनीति में विपक्षी एकता और संस्थानों की निष्पक्षता के बीच की जंग को भी परिभाषित करेंगे।

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