Arvind Kejriwal on Bhagwant Mann: पंजाब की सियासत और सिख धार्मिक हलकों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था श्री अकाल तख्त साहिब (Sri Akal Takht Sahib) ने एक कथित आपत्तिजनक वीडियो के मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। सोमवार (15 जून) को अमृतसर में हुई ‘पांच सिंह साहिबान’ (सिख धर्मगुरुओं) की एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद मुख्यमंत्री को ‘गुरु द्रोही’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित कर दिया गया। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने संस्था के मंच से बाकायदा इस ऐतिहासिक आदेश का ऐलान किया। इसके साथ ही शीर्ष धार्मिक पीठ ने समूचे सिख समुदाय को कड़ा निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वे मुख्यमंत्री भगवंत मान से अपने सभी तरह के सामाजिक और धार्मिक संबंध पूरी तरह तोड़ लें।
अरविंद केजरीवाल का पलटवार
बताते चले कि, धार्मिक पीठ के इस बड़े फैसले के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) के शीर्ष नेतृत्व में खलबली मच गई है। इस पूरे विवाद पर ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर मुख्यमंत्री भगवंत मान का एक वीडियो साझा करते हुए अपने सिपहसालार का खुलकर बचाव किया। केजरीवाल ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी के सियासी विरोधियों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत पूरी तरह झूठ का सहारा लेकर मुख्यमंत्री मान की छवि को धूमिल और बदनाम करने की कोशिश की है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीति से प्रेरित बताया।
भगवंत मान की सफाई
वहीं, केजरीवाल द्वारा साझा किए गए वीडियो में मुख्यमंत्री भगवंत मान (CM Bhagwant Mann) ने अकाल तख्त के हुक्मनामे पर अपनी बात रखते हुए इस पूरे विवाद को तकनीकी छेड़छाड़ का नतीजा बताया। मुख्यमंत्री मान ने स्पष्ट रूप से कहा कि जिस कथित वीडियो के आधार पर श्री अकाल तख्त ने उनके खिलाफ इतना बड़ा और सख्त हुक्मनामा जारी किया है, वह वीडियो असल है ही नहीं। भगवंत मान के मुताबिक, वह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI Genereated Video) यानी डीपफेक तकनीक के जरिए तैयार की गई एक फर्जी क्लिप है। सीएम ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में अकाल तख्त के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपना पक्ष रखा था और बताया था कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति वे हैं ही नहीं, बल्कि उस शख्स की कद-काठी भी उनसे मेल नहीं खाती है।
विरोधियों पर बरसे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने वीडियो में इस बात पर गहरी हैरानी और दुख जताया कि धर्म के सर्वोच्च और सम्मानित पदों पर बैठे कुछ लोग अपने निजी और राजनीतिक स्वार्थों (सियासी इरादों) को पूरा करने के लिए इस तरह के झूठे प्रोपेगेंडा का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें मजहब की आड़ लेकर उनके खिलाफ लगातार दुष्प्रचार कर रही हैं ताकि उनकी राजनीतिक साख को नुकसान पहुंचाया जा सके। मान ने साफ किया कि अकाल तख्त जैसी पवित्र संस्था का सम्मान वे दिल से करते हैं, लेकिन कुछ लोग राजनीतिक रंजिश निकालने के लिए इस मंच का इस्तेमाल कर रहे हैं।
सिख विधायकों और कैबिनेट की अकाल तख्त में तलबी
इस पूरे विवाद के बीच श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब सरकार पर अपना शिकंजा और कस दिया है। अकाल तख्त ने धार्मिक बेअदबी के खिलाफ कड़े कानून बनाने के सिलसिले में आगामी 29 जून को पंजाब के सभी सिख विधायकों को तलब किया है। खास बात यह है कि इसमें केवल सत्ताधारी दल के ही नहीं, बल्कि राज्य के सभी राजनीतिक दलों के सिख विधायकों और पूरी पंजाब कैबिनेट को हाजिर होने का हुक्म दिया गया है। विभिन्न सिख संगठनों के साथ हुई इस मैराथन बैठक में ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ जैसे अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण विधायी मामलों पर गंभीर चर्चा की गई है, जिसके बाद अब 29 जून की इस तलबी पर पूरे देश की नजरें टिक गई हैं।










