Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र की राजनीति में राकांपा (NCP) के दोनों गुटों के संभावित विलय की चर्चा लंबे समय से थी। दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार इस विलय के प्रति बेहद उत्साहित थे और उनका यह सपना जल्द ही साकार होने वाला था। उनके करीबी सहयोगी किरण गुजर ने हाल ही में इस रहस्य से पर्दा उठाया है।
अजित पवार का विलय पर जोर
किरण गुजर, जो 1980 के दशक से ही अजित पवार के करीब रहे हैं, ने बताया कि पवार ने विमान हादसे से ठीक पांच दिन पहले उनके साथ इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की थी। गुजर के अनुसार, अजित पवार दोनों गुटों को मिलाने के लिए पूरी तरह आश्वस्त और उत्साहित थे। उन्होंने कहा था कि विलय की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और आने वाले दिनों में इसे औपचारिक रूप से लागू किया जाएगा। गुजर ने बताया, “अजित पवार इस कदम को पार्टी और महाराष्ट्र के हित में देख रहे थे। उनका मानना था कि दोनों गुटों का एक होना राज्य और पार्टी के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।”
शरद पवार और अन्य नेताओं के साथ सकारात्मक वार्ता
किरण गुजर ने यह भी साझा किया कि अजित पवार शरद पवार, सुप्रिया सुले और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ लगातार सकारात्मक बातचीत कर रहे थे। संकेत मिले थे कि शरद पवार इस विलय के कदम का समर्थन कर सकते हैं। गुजर के अनुसार, इस प्रक्रिया के पीछे अजित पवार की रणनीति स्पष्ट थी: “उनका लक्ष्य था कि पार्टी की ताकत बढ़े और बारामती और महाराष्ट्र की बेहतरी के लिए एकजुट होकर काम किया जा सके।”
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चुनावी गठबंधन ने बढ़ाई उम्मीद
हाल ही में हुए नगर निकाय चुनावों में दोनों गुटों ने मिलकर पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में चुनाव लड़ा था। इसके अलावा, अगले महीने होने वाले जिला परिषद चुनावों के लिए भी गठबंधन बनाए रखने का निर्णय लिया गया था। इस सहयोग ने दोनों गुटों के बीच नजदीकियां बढ़ाईं और विलय की संभावनाओं को और मजबूत किया।
भविष्य के लिए रोडमैप तैयार
किरण गुजर ने बताया कि अजित पवार ने विलय के बाद बनने वाली संयुक्त राकांपा के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार किया था। उनका मानना था कि एकजुट होकर ही पार्टी बारामती और पूरे महाराष्ट्र में अपनी राजनीतिक और सामाजिक भूमिका को प्रभावी तरीके से निभा सकती है। उन्होंने इसे सिर्फ संगठन का कदम नहीं, बल्कि राज्य के हित में अहम रणनीति माना।
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त्रासदी ने तोड़ा सपना
गुजर ने दुख जताते हुए कहा, “कई सकारात्मक संभावनाएं उभर रही थीं, लेकिन यह त्रासदी हमारी आंखों के सामने हुई। अजित दादा हमसे हमेशा के लिए चले गए। अब उनकी अनुपस्थिति में दोनों गुटों के लिए यह और भी जरूरी हो गया है कि वे एकजुट होकर बारामती और महाराष्ट्र के हित में काम करें।” अजित पवार का यह सपना, जो जीवन में अधूरा रह गया, अब उनके विचारों और रोडमैप के आधार पर दोनों गुटों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी बना है।









