Airfare Hike: आसमान छूते हवाई किराए पर SC की सख्ती, एयरलाइंस नियम नहीं मानें तो उड़ानें बंद करने की चेतावनी

 नई दिल्ली त्योहारों और छुट्टियों के दौरान हवाई टिकटों के दाम अचानक बढ़ने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि अगर एयरलाइंस तय नियमों का पालन नहीं कर रही हैं तो उनकी उड़ानें रोक दी जाएं. कोर्ट ने कहा कि यात्रियों के हित में व्यवस्था तो बनाई गई है, लेकिन उसके पालन और नियमन को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है।  मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने बताया कि हवाई किराए और शुल्क से जुड़े नए

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Published On :

अगस्त 17, 2026

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 नई दिल्ली
त्योहारों और छुट्टियों के दौरान हवाई टिकटों के दाम अचानक बढ़ने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि अगर एयरलाइंस तय नियमों का पालन नहीं कर रही हैं तो उनकी उड़ानें रोक दी जाएं. कोर्ट ने कहा कि यात्रियों के हित में व्यवस्था तो बनाई गई है, लेकिन उसके पालन और नियमन को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है। 

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने बताया कि हवाई किराए और शुल्क से जुड़े नए नियम बनाने की प्रक्रिया अंतिम दौर में है. उन्होंने कोर्ट को सीलबंद लिफाफे में नियमों का मसौदा भी सौंपा. केंद्र ने कहा कि नियमों को अंतिम रूप देने में तीन हफ्ते का समय लगेगा और इसके बाद इसे कोर्ट के विचार के लिए पेश किया जाएगा। 

किराए पर लगाम को लेकर उठे सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि नागरिक उड्डयन मंत्री ने संसद में कहा है कि सरकार हवाई किराए पर कोई सीमा तय नहीं कर सकती. याचिकाकर्ता का आरोप है कि एयरलाइंस जिस तरह से यात्रियों से शुल्क वसूल रही हैं, उसके लिए बनाए गए आधिकारिक नियमों का प्रभावी तरीके से पालन नहीं हो रहा है। 

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इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मी नारायणन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. याचिका में निजी एयरलाइंस पर मनमाने तरीके से किराया तय करने और अलग-अलग अतिरिक्त शुल्क वसूलने का आरोप लगाया गया है. याचिका में हवाई किराए को पारदर्शी बनाने और यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए मजबूत नियामक व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। 

पहले भी कोर्ट ने जताई थी नाराजगी
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने त्योहारों और बड़े आयोजनों के दौरान हवाई किराए में अचानक होने वाली बढ़ोतरी को यात्रियों का शोषण बताया था. कोर्ट ने कहा था कि एक ही मार्ग पर अलग-अलग एयरलाइंस के किराए में बहुत ज्यादा अंतर है. मई में सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने एक ही मार्ग पर 8 हजार और 18 हजार रुपये तक के किराए का उदाहरण भी आया था। 

7 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की ओर से मांगा गया तीन हफ्ते का समय स्वीकार कर लिया है. अब मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी. कोर्ट के सामने केंद्र नए नियमों का अंतिम रूप रखेगा. इसके बाद यह तय होगा कि हवाई किराए और यात्रियों से लिए जाने वाले अतिरिक्त शुल्क को लेकर क्या कदम उठाए जा सकते हैं।