Air India Ticket Price: मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी युद्ध और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर अब भारतीय हवाई यात्रियों की जेब पर पड़ने वाला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और जेट फ्यूल (ATF) की कीमतों में हुई बेतहाशा वृद्धि के कारण देश की प्रमुख एयरलाइन एअर इंडिया (Air India) ने अपने ‘फ्यूल सरचार्ज’ में भारी बदलाव करने का निर्णय लिया है। एयरलाइन प्रबंधन के अनुसार, ईंधन की बढ़ती लागत के कारण परिचालन खर्च काफी बढ़ गया है, जिसे संतुलित करने के लिए टिकटों के दाम बढ़ाना मजबूरी बन गया है।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के दाम में वृद्धि
बताते चले कि, एअर इंडिया के इस हालिया फैसले के बाद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह के हवाई टिकटों की कीमतों में बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा। एयरलाइन द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, डोमेस्टिक फ्लाइट्स (घरेलू उड़ानें) के किराए में 299 रुपये से लेकर 899 रुपये तक की बढ़ोतरी होगी। वहीं, इंटरनेशनल फ्लाइट्स (अंतरराष्ट्रीय टिकट) के दाम में 2,200 रुपये से लेकर 26,000 रुपये तक की भारी वृद्धि दर्ज की जाएगी। यह कदम सीधे तौर पर उन यात्रियों को प्रभावित करेगा जो आने वाले गर्मी की छुट्टियों में विदेश यात्रा की योजना बना रहे थे।
नई दरों का क्रियान्वयन और समय सीमा
एयरलाइन ने स्पष्ट किया है कि जेट फ्यूल की वैश्विक कीमतों में उछाल के बाद नई दरें 8 अप्रैल, 2026 से अधिकांश रूट्स पर प्रभावी हो जाएंगी। हालांकि, लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए कुछ अतिरिक्त समय दिया गया है; यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे रूट्स पर बदला हुआ सरचार्ज 10 अप्रैल से लागू होगा। इस बार एअर इंडिया ने ‘दूरी-आधारित ग्रिड सिस्टम’ (Distance-based grid system) अपनाया है, जिसका अर्थ है कि आप जितनी लंबी दूरी की यात्रा करेंगे, फ्यूल सरचार्ज का बोझ उतना ही अधिक होगा।
एटीएफ कीमतों में 100% का उछाल
टिकटों के दाम बढ़ाने का यह निर्णय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ गहन चर्चा के बाद लिया गया है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के आंकड़ों के अनुसार, जेट फ्यूल की औसत वैश्विक कीमत मात्र एक महीने में 99.40 डॉलर से बढ़कर 195.19 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई है। ईंधन की कीमतों में यह लगभग 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। हालांकि, भारत सरकार ने घरेलू एटीएफ की कीमतों में वृद्धि को 25% तक सीमित रखने का प्रयास किया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रूट पर ऐसी कोई सीमा नहीं होने के कारण वहां कीमतों में अधिक अंतर दिखाई दे रहा है।










