हरिद्वार को सनातन नगरी घोषित करने के बाद, गैर हिंदुओं के प्रवेश पर क्या हो सकता है प्रतिबंध?

हरिद्वार अगले साल जनवरी में हरिद्वार में प्रस्तावित कुंभ मेला 2027 से पहले उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार हरिद्वार-ऋषिकेश नगर निगम क्षेत्र को सनातन पवित्र नगरी घोषित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है. सरकार के इस संभावित कदम ने धार्मिक, सियासी और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है. सवाल उठ रहा है कि क्या गैर हिंदुओं का हरिद्वार आना पूरी तरह बैन हो जाएगा या फिर यह सिर्फ कुंभ और चुनिंदा धार्मिक क्षेत्रों तक सीमित रहेगा? आइये इसे थोड़ा विस्‍तार से समझते हैं.. आखिर ये प्रस्ताव क्या है और क्यों आया? सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा बॉयलॉज

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Published On :

जनवरी 6, 2026

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हरिद्वार
अगले साल जनवरी में हरिद्वार में प्रस्तावित कुंभ मेला 2027 से पहले उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार हरिद्वार-ऋषिकेश नगर निगम क्षेत्र को सनातन पवित्र नगरी घोषित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है. सरकार के इस संभावित कदम ने धार्मिक, सियासी और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है. सवाल उठ रहा है कि क्या गैर हिंदुओं का हरिद्वार आना पूरी तरह बैन हो जाएगा या फिर यह सिर्फ कुंभ और चुनिंदा धार्मिक क्षेत्रों तक सीमित रहेगा? आइये इसे थोड़ा विस्‍तार से समझते हैं..

आखिर ये प्रस्ताव क्या है और क्यों आया?
सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा बॉयलॉज में हर की पैड़ी और कुछ चुनिंदा घाटों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर जो प्रतिबंध है, उसे बढ़ाकर हरिद्वार के सभी 105 गंगा घाटों और पूरे कुंभ क्षेत्र तक किया जा सकता है. इस दायरे में हरिद्वार के साथ-साथ ऋषिकेश को भी शामिल किए जाने पर विचार चल रहा है. सरकार का तर्क है कि कुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान क्षेत्र की पवित्रता, धार्मिक मर्यादा और सुरक्षा बनाए रखना प्राथमिकता है. साधु-संत और अखाड़ा परिषद लंबे समय से यह मांग करते रहे हैं कि हरिद्वार को विधिवत पवित्र धर्म नगरी का दर्जा मिले.

सूत्र बताते हैं कि यह प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और इस पर संतों, अखाड़ा परिषद तथा हरिद्वार में धार्मिक अनुष्ठानों का संचालन करने वाली प्रमुख संस्था श्री गंगा सभा से चर्चा की जा रही है. संतों की मांग सिर्फ घाटों तक सीमित नहीं है, बल्कि गैर हिंदुओं के रात में ठहरने पर भी प्रतिबंध की बात उठाई जा रही है, ताकि धार्मिक आयोजनों के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था या कथित धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कवायद के पीछे की मंशा साफ करते हुए कहा कि हरिद्वार मां गंगा, ऋषि-मुनियों और संत परंपरा की पवित्र भूमि है. वहां से लगातार मांग उठ रही है कि उसकी पवित्रता और धार्मिक पहचान बनी रहे. सरकार सभी पहलुओं, पुराने कानूनों, धार्मिक मान्यताओं और व्यावहारिक चुनौतियों का अध्ययन कर रही है और उसी के आधार पर आगे कदम उठाएगी.

क्या गैर हिंदुओं पर हमेशा के लिए रोक लगेगी?
इसके बाद अब जो सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है, वह है कि क्‍या गैर हिंदुओं पर हमेशा के लिए यहां रोक लग जाएगी? अभी तक जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक पूरे शहर में स्थायी और पूर्ण प्रतिबंध का कोई आखिरी फैसला नहीं हुआ है. चर्चा मुख्य रूप से कुंभ क्षेत्र और गंगा घाटों तक प्रतिबंध बढ़ाने को लेकर है. चूंकि प्रस्ताव विचाराधीन है, यानी इसमें बदलाव, सीमाएं और शर्तें तय हो सकती हैं.

अगर दूसरे शब्दों में बात की जाए तो यह जरूरी नहीं कि गैर हिंदुओं का हरिद्वार आना पूरी तरह बैन हो जाए, बल्कि धार्मिक आयोजनों और पवित्र स्थलों की सीमा में नियम सख्त किए जा सकते हैं. हालांकि अभी कुछ भी साफ नहीं है.

विपक्ष का विरोध और गंगा-जमुनी तहजीब की दलील
कांग्रेस ने इस प्रस्ताव का तीखा विरोध किया है. कांग्रेस की नेशनल मीडिया पैनलिस्ट सुजाता पॉल का कहना है कि यह कदम गंगा-जमुनी तहजीब को नुकसान पहुंचाने वाला और चुनावी ध्रुवीकरण की राजनीति का हिस्सा है. उनके मुताबिक, कुंभ मेले में वैसे भी हिंदू श्रद्धालुओं की भीड़ होती है, लेकिन भारतीय परंपरा में विभिन्न समुदायों का सहयोग और सहभागिता हमेशा रही है जैसा कि अयोध्या जैसे धार्मिक स्थलों पर भी देखा जाता है.

वहीं, महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी और हिंदूवादी नेता नितिन गौतम जैसे नेताओं का कहना है कि कुंभ क्षेत्र को गैर हिंदू प्रतिबंधित घोषित करना सुरक्षा और धार्मिक गरिमा के लिहाज से जरूरी है. उनका तर्क है कि कुंभ जैसे महाआयोजन में किसी भी प्रकार की साजिश या अव्यवस्था की आशंका को खत्म करने के लिए यह कदम उठाया जाना चाहिए.

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