Afghanistan Earthquake: सोते-सोते हिली धरती, अफगानिस्तान में जोरदार भूकंप से लोगों में दहशत

अफगानिस्तान में सोमवार तड़के आए 4.9 तीव्रता के भूकंप से लोगों में दहशत फैल गई, जिससे नींद से जागे नागरिक डरकर अपने घरों से बाहर निकल आए, हालांकि गनीमत रही कि फिलहाल किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।

Afghanistan Earthquake

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अक्टूबर 5, 2026

Afghanistan Earthquake: भारत के पड़ोसी देश अफगानिस्तान में एक बार फिर कुदरत का कहर देखने को मिला है। सोमवार तड़के आधी रात को अचानक धरती के कांपने से लोगों में भारी अफरा-तफरी मच गई। उस वक्त ज्यादातर लोग अपनी गहरी नींद में थे, लेकिन अचानक हुए इस कंपन ने लोगों को सहमा दिया। लोग अपनी जान बचाने के लिए नींद से उठकर इधर-उधर भागने लगे और घबराकर अपने घरों से बाहर खुले आसमान के नीचे आ गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.9 मापी गई है।

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कब और कहां आया भूकंप? जानिये पूरा समय और गहराई

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सोते-सोते हिली धरती

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के आंकड़ों के मुताबिक, अफगानिस्तान में यह भूकंप सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 की आधी रात को आया। भारतीय समयानुसार यह घटना रात 1 बजकर 57 मिनट 24 सेकंड पर दर्ज की गई।

इस भूकंप का केंद्र जमीन के काफी भीतर स्थित था। इसकी गहराई जमीन से लगभग 220 किलोमीटर नीचे दर्ज की गई। गनीमत यह रही कि इस मध्यम तीव्रता के भूकंप के कारण शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक किसी भी प्रकार के जानमाल के बड़े नुकसान की खबर सामने नहीं आई है, फिर भी मध्य रात्रि में आए इस झटके से लोगों के दिलों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

कितना खतरनाक होता है 4.9 तीव्रता का भूकंप?

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो रिक्टर स्केल पर 4.9 तीव्रता के भूकंप को मध्यम श्रेणी का माना जाता है। ऐसे भूकंप के झटके एक बड़े भू-भाग पर महसूस किए जा सकते हैं। हालांकि, किसी भी आपदा से होने वाला नुकसान केवल उसकी तीव्रता पर ही निर्भर नहीं करता, बल्कि इसके अन्य कई तकनीकी पहलू भी होते हैं, इस बार झटके का केंद्र जमीन से 220 किलोमीटर नीचे था, जो यह तय करता है कि सतह पर उसका प्रभाव कैसा महसूस होगा।

स्थानीय क्षेत्र के निर्माण कार्य और आबादी का घनत्व भी नुकसान के स्तर को तय करते हैं। चूंकि केंद्र काफी गहराई में था, इसलिए झटके महसूस होने के बावजूद शुरुआती तौर पर किसी बड़े विनाश की सूचना नहीं मिली है।

अफगानिस्तान में बार-बार क्यों आते हैं भूकंप?

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सोते-सोते हिली धरती

भूगर्भीय संरचना के लिहाज से अफगानिस्तान एक बेहद संवेदनशील और सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है। इस देश का अधिकांश हिस्सा प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों और फॉल्ट लाइनों के जंक्शन पर पड़ता है। यही मुख्य वजह है कि यहां अक्सर छोटे से लेकर बड़े झटके महसूस होते रहते हैं।

इसके अलावा, पहाड़ी इलाकों की बनावट और कमजोर बुनियादी ढांचे वाले मकान इस खतरे को और ज्यादा गंभीर बना देते हैं। भूकंप के तुरंत बाद पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन जैसी आपदाओं का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है, जिससे स्थानीय प्रशासन और नागरिकों को हमेशा सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। तड़के आए इस भूकंप के बाद से प्रभावित इलाकों में लोग अभी भी डरे हुए हैं।

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