Abhishek Banerjee ED : ईडी पूछताछ के बाद अभिषेक बनर्जी का बड़ा बयान! बोले- मैं नहीं झुकूंगा

ईडी की लंबी पूछताछ के बाद अभिषेक बनर्जी ने ऐसा बयान दिया है जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने साफ कहा कि वह किसी दबाव में नहीं झुकेंगे। आखिर पूछताछ में क्या हुआ और उनके इस बयान के पीछे क्या संकेत छिपे हैं, जानिए पूरी कहानी।

Abhishek Banerjee ED

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 16, 2026

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Abhishek Banerjee ED : तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेता, राष्ट्रीय महासचिव और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी सोमवार को एक बार फिर केंद्रीय जांच एजेंसी के रडार पर रहे। प्राइमरी स्कूल शिक्षक भर्ती भ्रष्टाचार मामले में पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें समन भेजा था। अभिषेक बनर्जी सुबह ठीक 11 बजे कोलकाता के साल्टलेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचे थे। वहां केंद्रीय जांच अधिकारियों की टीम ने उनसे कड़े सवालों का सिलसिला शुरू किया, जो देर रात तक जारी रहा। लगभग 10 घंटे से भी ज्यादा समय की कड़ी और मैराथन पूछताछ के बाद अभिषेक बनर्जी रात 9 बजकर 56 मिनट पर ईडी दफ्तर से बाहर निकले।

टीएमसी महासचिव का भाजपा पर तीखा प्रहार

ईडी दफ्तर से बाहर निकलते ही मीडिया कर्मियों से बातचीत में अभिषेक बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर जमकर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए कहा कि इस तथाकथित शिक्षक भर्ती घोटाले में जिन लोगों को पहले केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा गिरफ्तार किया गया था, उनमें से अधिकांश आरोपियों को अदालत से जमानत मिल चुकी है। इसके बावजूद उन्हें बार-बार परेशान करने के इरादे से बुलाया जा रहा है। अभिषेक बनर्जी ने सीधा आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करके उनकी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस को तोड़ने और कमजोर करने का पुरजोर प्रयास कर रही है, लेकिन वे अपने मंसूबों में कभी कामयाब नहीं होंगे।

लगातार हाजिरी और राजनीतिक दबाव का खेल

अभिषेक बनर्जी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि केंद्रीय एजेंसियां उनके पीछे हाथ धोकर पड़ी हैं। उन्होंने बताया कि कल भी उनसे लगभग 8 से 8.30 घंटे तक लंबी पूछताछ की गई थी और आज फिर से 11 घंटे तक लगातार सवालों की बौछार की गई। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला साल 2023 से चला आ रहा है और वे अब तक अलग-अलग मौकों पर लगभग 10 से 12 बार केंद्रीय एजेंसियों के सामने स्वेच्छा से हाजिर हो चुके हैं। इस कार्रवाई के पीछे किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव की बात पर उन्होंने चालाकी से टिप्पणी करते हुए कहा, “इस मामले में कोई राजनीतिक दबाव काम कर रहा है या नहीं, इस पर मैं सीधे तौर पर कुछ नहीं कहूंगा, लेकिन इतना जरूर है कि भाजपा के राजनीतिक तौर-तरीकों के बारे में जितना कम कहा जाए, उतना ही अच्छा है।”

झुकने से साफ इनकार

भाजपा की राजनीतिक नीतियों और चुनावी रणनीतियों पर निशाना साधते हुए टीएमसी सांसद ने साफ शब्दों में कहा कि एक तरफ वे लोग साम-दाम-दंड-भेद का इस्तेमाल कर हमारी पार्टी को विभाजित करने की कोशिश कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ चुनाव के बाद होने वाली कथित हिंसा का झूठा नैरेटिव गढ़ रहे हैं। उन्होंने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा, “बीजेपी वाले चाहे जो कर लें, अगर मेरा गला भी काट दिया जाए, तब भी मैं उनके सामने कभी नहीं झुकूंगा।”

सांसद ने यह भी जोड़ा कि जितने भी लोगों को इस केस में पकड़ा गया था, वे सब बाहर आ चुके हैं और जांच में कुछ भी ठोस नहीं निकला। उन्होंने कहा, “हम हमेशा से चाहते थे कि राज्य के युवाओं को पूरी निष्पक्षता और ईमानदारी से नौकरियां मिलें। अगर भविष्य में भी एजेंसी मुझे पूछताछ के लिए बुलाएगी, तो मैं एक कानून का पालन करने वाले नागरिक की तरह जरूर आऊंगा।”

वीडियोग्राफी और बयानों का मिलान

दूसरी तरफ, इस पूरे मामले पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के एक बेहद वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और विवादों से दूर रखने के लिए इस पूरी पूछताछ की आधिकारिक तौर पर वीडियोग्राफी कराई जा रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, पूछताछ के दौरान दर्ज किए गए अभिषेक बनर्जी के बयानों का बारीकी से सत्यापन किया जाएगा। इसके साथ ही इस घोटाले में पहले गिरफ्तार हो चुके अन्य मुख्य आरोपियों के बयानों, सबूतों और डिजिटल साक्ष्यों से बनर्जी के बयानों का आमना-सामना और मिलान (क्रॉस-वेरिफिकेशन) कराया जाएगा।

ईडी अधिकारी के मुताबिक, वर्तमान में जांच दल का पूरा ध्यान अवैध धन के लेन-देन (मनी ट्रेल) की मुख्य कड़ियों को जोड़ने पर है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस करोड़ों रुपये के काले धन का मुख्य प्रबंधन किसने किया, इसे किन फर्जी संस्थाओं (शेल कंपनियों) और बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर किया गया, और क्या इसके असली स्रोत को छिपाने के लिए लेयरिंग का इस्तेमाल किया गया था।

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